महाराष्ट्र में 28 जून 2026 को आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 पेपर लीक के चलते एक दिन पहले यानी 27 जून को रद्द कर दी गई थी। अब इस परीक्षा को दोबारा आयोजित कराया जाएगा जिसकी नई तारीख का ऐलान होना बाकी है, लेकिन पेपर लीक की जांच के बीच कुछ नए खुलासे हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र टीईटी का पेपर आगरा के उस प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था जहां इस पेपर की छपाई होनी थी। बता दें कि यह परीक्षा 28 जून को 1028 सेंटर्स पर आयोजित होनी थी 6 लाख से अधिक उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होने थे।
जूतों में छिपाकर बाहर लाया गया था पेपर
एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 और 17 जून के बीच प्रिंटिंग प्रेस के एक एम्प्लॉई ने क्वेश्चन पेपर्स की मुड़ी हुई कॉपियां अपने जूते के सोल के नीचे छिपाकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाली थी। इस दौरान कर्मचारी ने सिक्योरिटी गार्ड की आंखों में धूल झोंककर इस काम को अंजाम दिया था और इसके लिए प्रिंटिंग प्रेस के दो कर्मचारियों को 8 हजार रुपए और 1 प्लॉट देने का वादा किया गया था। इन दोनों कर्मचारियों ने 3 दिन के अंदर यही तरीका अपनाकर क्वेश्चन पेपर्स के सेट को प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला था।
गार्ड्स ने चेक नहीं किए थे जूते
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कर्मचारियों ने जिन गार्ड्स की आंखों में धूल झोंककर इस पेपर को बाहर निकाला था वह रिटायर्ड आर्मी अफसर थे। उन्होंने कपड़ों की तलाशी तो ले ली थी, लेकिन जूते चेक नहीं किए थे। बता दें कि TET में दो पेपर्स होते हैं, पेपर 1 और पेपर 2 और हर एक के दो सेट प्रिंट किए गए थे ताकि एक सेट रैंडमली उठाया जा सके और एग्जाम के दिन दिया जा सके। चारों सेट जूते में छिपाकर ही बाहर लाए गए थे।
आगरा में कहां प्रिंट होने थे पेपर?
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र टीईटी का पेपर आगरा की माहिम पेट्रन प्राइवेट लिमिटेड में प्रिंट के लिए लाए गए थे। यह एक ऐसी प्रेस थी जिसकी पहचान सिर्फ महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन (MSCE) के हेड को ही पता थी और उनकी ही यह जिम्मेदारी थी कि वह इस सीक्रेसी को बनाए रखें। इस मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने एक्सप्रेस को बताया है कि आमतौर पर छोटे अपराधों में भी बड़ी रकम का लेनदेन किया जाता है और एडवांस्ड में रकम दी जाती है, लेकिन हमें इस बात की हैरानी हुई की जिन क्वेश्चन पेपर का असर राज्य के 6 लाख शिक्षक उम्मीदवारों पर पड़ेगा वह सिर्फ 8 हजार रुपए में बिक गए।
बाहर ही क्यों प्रिंट कराए गए क्वेश्चन पेपर?
बता दें कि महाराष्ट्र के लगभग सभी कॉम्पिटेटिव एग्जाम के पेपर राज्य के बाहर प्रिंट होते हैं। लॉजिक यह था कि दूसरे राज्यों में प्रेस के कर्मचारी न तो दिलचस्पी लेंगे और न ही कंटेंट पढ़ पाएंगे, जिससे सीक्रेसी बनी रहेगी। राज्य के स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, एक बार फाइनल होने के बाद प्रेस की पहचान पूरी तरह से कॉन्फिडेंशियल रखी जाती है, डिपार्टमेंट के अंदर सभी ऑफिशियल कम्युनिकेशन से उसका नाम हटा दिया जाता है।
एजुकेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि आगरा की माहिम पटरन प्राइवेट लिमिटेड प्रेस पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन (MSCE) द्वारा आयोजित परीक्षाओं के लिए क्वेश्चन पेपर छापती आ रही है। काउंसिल राज्य सरकार की कई भर्ती परीक्षाओं के साथ-साथ क्लास 4 और 7 के लिए स्कॉलरशिप परीक्षाएं भी आयोजित करती है। अब पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
आगरा से दो कर्मचारी हुए गिरफ्तार
बता दें कि महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में बिहार और हरियाणा से पहली तीन गिरफ्तारियां हुईं। फिर जांच करने वालों ने लीक के सोर्स का पता लगाया और 20 सदस्यों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई। आखिरकार लीक का कनेक्शन आगरा तक पहुंच गया, जहां पुलिस ने प्रेस के मौजूदा कर्मचारी नरेश कुमार माहोरे उर्फ निक्की और बाबूलाल कुशवाहा के साथ-साथ पुराने कर्मचारी संजय कुमार शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया।
