महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की उन महिलाओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है जो किसी वजह से अपने बच्चों की अकेले परवरिश कर रही हैं और उन्हें स्कूलों में एडमिशन के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, राज्य सरकार ने सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए स्कूलों में एडमिशन के दौरान एक अलग एडमिशन कैटेगरी शुरू करने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम उन महिलाओं के लिए एडमिशन प्रोसेस को आसान बनाने के लिए है।
सरकार के इस फैसले से किसे होगा फायदा?
राज्य सरकार के इस स्टेप से उन बच्चों को फायदा होने की उम्मीद है जिनकी परवरिश सिर्फ उनकी मां ने की है। ऐसी महिलाएं पति से तलाक, अलग रहने या फिर विधवा होने जैसी दूसरी वजहों के कारण सिंगल पैरेंट होती हैं। इन महिलाओं को अपने बच्चों के एडमिशन के दौरान डॉक्यूमेंटेशन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सरकार का यह फैसला इन महिलाओं को एडमिशन प्रोसेस के समय ऐसी चुनौतियों से राहत दिलाएगा।
इस पॉलिसी के आने के बाद क्या होगा?
नई पॉलिसी के तहत महाराष्ट्र के स्कूल सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए एक अलग एडमिशन कैटेगरी बनाएंगे। इस कैटेगिरी का मकसद उन मामलों में पिता के डॉक्यूमेंट्स की जरूरत को खत्म करके एप्लीकेशन प्रोसेस को आसान बनाना है जहां वह उपलब्ध नहीं हो सकते। अधिकारियों का मानना है कि यह सुधार एजुकेशन सिस्टम को सिंगल मदर्स महिलाओं के लिए आसान बनाएगा।
क्या जरूरत थी इस अलग कैटेगिरी की?
बता दें कि हाल के कुछ सालों में राज्य के अंदर कई सिंगल मदर्स को स्कूल एडमिशन के दौरान पिता का नाम या उससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स जैसी जरूरी शर्तों को पूरा करना होता था और इस वजह से उन्हें की तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन नई कैटेगिरी के आ जाने से ऐसी मुश्किलें अब दूर हो जाएंगी। सरकार का प्लान है कि इस योजना को आगे हायर एजुकेशन में भी लागू कर दिया जाए।
राज्य के एजुकेशन मिनिस्टर ने की हाई लेवल मीटिंग
शनिवार को राज्य के हायर और टेक्निकल एजुकेशन मिनिस्टर चंद्रकांत पाटिल ने एक हाई लेवल मीटिंग की जिसके बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि इस पहल को असरदार तरीके से लागू करने और सिंगल मदर्स के बच्चों को छूट, प्राथमिकता और एजुकेशनल सपोर्ट देने के लिए यह मीटिंग बुलाई गई थी। उन्होंने बताया कि स्कूलों के साथ-साथ सरकार का प्रयास है कि हायर एजुकेशन में भी इस पॉलिसी को लागू किया जाए।
चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि राज्य के करीब 1500 कॉलेजों के प्रिंसिपलों की एक खास ऑनलाइन मीटिंग 17 जून को होगी, ताकि जमीनी हालात को समझा जा सके और एडमिशन के दौरान ऐसे स्टूडेंट्स के सही रजिस्ट्रेशन के प्रोसेस पर चर्चा की जा सके। उन्होंने बताया कि कॉलेज लेवल पर भी ऐसा एक सिस्टम तैयार किए जाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
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