कल्पना कीजिए, किसी व्यक्ति के मन में किसी चीज को पाने की इतनी तीव्र इच्छा हो और वह बार-बार उसी के बारे में सोचता रहे। यह केवल सामान्य चाह नहीं, बल्कि भीतर से उठने वाली गहरी आकांक्षा होती है। यही भावना ‘लालसा’ कहलाती है। ‘लालसा’ केवल इच्छा नहीं, बल्कि किसी वस्तु, लक्ष्य या भाव को पाने की प्रबल चाह को व्यक्त करने वाला शब्द है।
जनसत्ता.कॉम की ‘सही हिंदी’ मुहिम का उद्देश्य हिंदी भाषा की शुद्धता, सुंदरता और व्याकरणिक समझ को आम पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाना है। साथ ही ऐसे शब्दों का प्रयोग, जिनका हम दैनिक जीवन में करते हैं, लेकिन उनके सही अर्थ और संदर्भ को लेकर स्पष्टता कम होती है।
यह पहल बोले और लिखे जाने वाले शब्दों के सही रूप, अर्थ, उच्चारण और व्याकरण को समझाकर भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है। आज की कड़ी का शब्द ‘लालसा’ है।
- लालसा: संस्कृत मूल का यह शब्द गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति रखता है। लालसा: तीव्र इच्छा, प्रबल आकांक्षा, गहरी चाह।
- यह शब्द उस स्थिति को दर्शाता है, जब किसी चीज को पाने की इच्छा सामान्य स्तर से अधिक गहरी और लगातार बनी रहती है।
शब्द का महत्व
‘लालसा’ शब्द साहित्य, मनोविज्ञान और दैनिक जीवन में व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है। यह केवल भौतिक वस्तुओं की चाह नहीं, बल्कि ज्ञान, सफलता, प्रेम या सम्मान जैसी भावनात्मक और वैचारिक इच्छाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। हिंदी में ‘ज्ञान की लालसा’, ‘सफलता की लालसा’ या ‘प्रसिद्धि की लालसा’ जैसे प्रयोग आम हैं।
उदाहरण
- स्वामी विवेकानंद के मन में ईश्वर को जानने और सत्य को समझने की तीव्र लालसा थी।
- सत्ता की लालसा अच्छे-अच्छे नेताओं को भी उनके आदर्शों से भटका देती है।
- एक अच्छे विद्यार्थी में हमेशा कुछ नया सीखने की लालसा होनी चाहिए।
- धन-दौलत की अत्यधिक लालसा मनुष्य का सुख-चैन छीन लेती है।
- कवि की रचनाओं में प्रकृति के प्रति गहरी लालसा दिखाई देती है।
समानार्थी शब्द
आकांक्षा, इच्छा, अभिलाषा, चाह।
इच्छा और लालसा में अंतर
व्याकरण और भाव की दृष्टि से ‘इच्छा’ बहुत सामान्य है, जो पूरी होने पर शांत हो जाती है। लेकिन ‘लालसा’ में एक व्याकुलता और तीव्रता होती है। यह अक्सर आसानी से शांत नहीं होती और इंसान को लगातार बेचैन रखती है।
लालसा शब्द लिखने के दौरान होने वाली गलतियां
कुछ लोग इसे ‘लालशा’ लिख देते हैं, जो गलत है। सही शब्द लालसा है।
अभिप्राय
‘लालसा’ एक ऐसा शब्द है जो मन की गहरी इच्छा और आकांक्षा को व्यक्त करता है। यह बताता है कि इंसान केवल आवश्यकताओं से नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और सपनों से भी संचालित होता है। हिंदी की यही विशेषता है, एक शब्द और अर्थ की पूरी दुनिया।

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