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जानिए- कैसे मिलता है आईएएस-आईपीएस को कैडर और मोदी सरकार चाहती है क्‍या बदलाव

आज भी अधिकारियों को फाउंडेशन कोर्स करना होता है लेकिन इसके मार्क्स से उनके सर्विस या कैडर पर कोई असर नहीं पड़ता है। फिलहाल यह कोर्स सिर्फ क्वालिफाइंग है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सिविल सेवा परीक्षाओं में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सिविल सेवा परीक्षाओं में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। यूपीएससी परीक्षा में पीटी, मेन्स और इंटरव्यू के आधार पर सफल अभ्यर्थियों को मेरिट और च्वाइस के आधार पर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या अन्य केंद्रीय सेवाओं में तैनात किया जाता रहा है और बाद में उसे अलग-अलग कैडर (राज्य सेवा) आवंटित किया जाता है। यानी मेरिट और च्वाइस के आधार पर ही अब तक सेवा और राज्य संवर्ग का बंटवारा होता रहा है लेकिन मोदी सरकार की योजना है कि प्रोबेशन के दौरान होने वाले फाउंडेशन कोर्स के मार्क्स को जोड़कर ही अधिकारियों को सेवा और कैडर आवंटित किया जाय। प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने इस बाबत सभी मंत्रालयों को 17 मई को पत्र लिखा है और उस पर सुझाव मांगा है। सरकार इसे मौजूदा साल से ही लागू करना चाहती है।

संविधान के मुताबिक अभी तक यूपीएससी को परीक्षा का आयोजन करना और अभ्यर्थियों को उनके अंकों और इच्छा के अनुरूप ही आईएएस, आईपीएस, आईएफएस आदि संवा संवर्गों का बंटवारा करना होता था लेकिन अब फाउंडेशन कोर्स के मार्क्स मेरिट में जुड़ने से कई तरह की गड़बड़ी होने की आशंका पैदा हो गई है। उदाहरण के लिए अगर किसी अभ्यर्थी ने लिखित और इंटरव्यू परीक्षा के आधार पर 10वां स्थान हासिल किया है और उसके भारतीय राजस्व सेवा (इनकम टैक्स) के लिए अपनी पसंद जाहिर की है तो उसे पहली बार में ही यह सेवा मिल जाएगी क्योंकि मेरिट में उसका स्थान बहुत ऊंचा है। इसी तरह अगर किसी अभ्यर्थी को 180वां रैंक मिला है और उसने आईएएस सेवा के लिए अपनी पसंद दी है तो उसे आईएएस कैडर मिलने में दिक्कत होगी क्योंकि उसका मेरिट रैंक में कम नंबर है और उससे ज्यादा नंबर वालों ने इसके लिए आवेदन किया है। ऐसी स्थिति में उसे दूसरी या तीसरी पसंद के मुताबिक सर्विस ग्रुप मिल सकेगा। अब तक यही व्यवस्था कायम है, जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है।

ऐसे होता है राज्यों के कैडर का बंटवारा- सभी राज्यों में एक निश्चित संख्या में रिक्ति होती है। उदाहरण के लिए अगर राजस्थान में चार रिक्ति है तो राज्य से बाहर के तीन लोगों को राजस्थान कैडर मिलेगा जबकि एक सीट पर राज्यवासी को होम कैडर मिलेगा। अभी तक यही फार्मूला अपनाया जाता रहा है।

सरकार क्या बदलाव लाने जा रही है?- केंद्र सरकार इस पुरानी परंपरा को अब बदला चाहती है। सरकार की योजना के मुताबिक अब यूपीएससी परीक्षा और इंटरव्यू का आयोजन कर एक कंबाइंड मेरिट लिस्ट सरकार को सौंपेंगी। उदाहरण के लिए यूपीएससी ने 2000 लोगों का चयन कर कंबाइंड मेरिट लिस्ट सरकार को सौंप दी। इसके बाद सरकार उन चयनित सिविस सेवकों को एक फाउंडेशन कोर्स कराएगी। यह कोर्स इन सर्विस ट्रेनिंग प्रोग्राम का ही हिस्सा होगा। फाउंडेशन कोर्स के दौरान प्रशिक्षक प्रशिक्षु अधिकारियों को परीक्षा और प्रदर्शन के आधार पर मार्क्स देंगे।

कार्मिक मंत्रालय वे विभिन्न मंत्रालयों को पत्र लिखा है और उस पर सुझाव मांगा है।

उदाहरण के लिए अगर किसी सिविल सेवक ने ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट में दसवां रैंक हासिल किया है और 300 अंकों के फाउंडेशन कोर्स में उसे सिर्फ 100 अंक प्राप्त हुए हैं तब उसे आईएएस या आईपीएस जैसा प्रतिष्ठित सेवा संवर्ग नहीं मिलेगा भले ही उसने 10वां रैंक हासिल किया हो। नई व्यवस्था के तहत उसे राजस्व, रक्षा या अकाउंट्स सर्विस मिल सकता है। इसी तरह किसी अभ्यर्थी ने अगर मेरिट लिस्ट में 300वां रैंक हासिल किया है और फाउंडेशन कोर्स में अच्छा अंक हासिल किया है, तब उसे आईएएस या आईपीएस सेवा संवर्ग मिल सकता है।

बता दें कि आज भी अधिकारियों को फाउंडेशन कोर्स करना होता है लेकिन इसके मार्क्स से उनके सर्विस या कैडर पर कोई असर नहीं पड़ता है। फिलहाल यह कोर्स सिर्फ क्वालिफाइंग है। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकैडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में प्रशिक्षण लेकर अधिकारी राज्यों में तैनात होते हैं, फिर वहां परीक्षा देकर अपना प्रोबेशन पीरियड पूरा कर लेते हैं। इस व्यवस्था से न तो अधिकारियों के सेवा संवर्ग और न ही राज्य संवर्ग पर कोई फर्क पड़ता है लेकिन मोदी सरकार की नई योजना से यह दोनों प्रभावित होगा।

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