झारखंड में JPSC-JSSC पेपर लीक को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल, एक सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इस याचिका में 19 अप्रैल को हुई JPSC प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की मांग की गई है और साथ ही पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में सीबीआई जांच की मांग

इस याचिका में मांग की गई है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और परीक्षा को रद्द करके उसे दोबारा आयोजित किया जाएगा। याचिकाकर्ता ने जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की है।

जांच समिति में किस-किस को रखने की हुई है मांग?

इस याचिका में कहा गया है कि अगर जांच के लिए समिति बनाई जाती है तो उसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस को दी जाए। इसके अलावा समिति में फॉरेंसिक साइंस, IT, साइबर सुरक्षा, परीक्षा सुरक्षा, OMR जांच और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की भी मांग की गई है।

‘एग्जाम से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं’

याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष तरीके से जांच हो सकेगी। PIL में परीक्षा से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इनमें मूल OMR शीट, प्रश्नपत्र, आंसर की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और परीक्षा केंद्रों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

‘सबूत न नष्ट हो इसलिए रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं’

याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा के रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न किए जा सकें या फिर उन्हें बदला ना जा सके। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि झारखंड में पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। यह आंदोलन JPSC की 2025 प्रीलिम्स परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद शुरू हुआ है। कथित तौर पर 02 जुलाई को इस पेपर में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई और आरोप लगा कि पेपर-1 में सिर्फ 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उस अभ्यर्थी को आगे की परीक्षा के लिए योग्य घोषित किया गया। इसके बाद छात्र भड़क गए और पेपर को रद्द करने की मांग और पेपर लीक जांच को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

वहीं राज्य सरकार ने इस मामले की जांच CID को सौंप दी, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। वह 25 जुलाई से रांची में आंदोलन कर रहे हैं। वहीं सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है। सरकार का कहना है कि हम छात्रों के हितों के लिए हर फैसला लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बीच छात्रों और सरकार के बीच सेकंड राउंड की बातचीत भी असफल रही है। इसको लेकर विस्तृत जानकारी आपको नीचे दी गई खबर में मिलेगी।

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झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार को दूसरे दौर की बातचीत हुई। यह वार्ता भी छात्रों की मांगों पर बिना किसी अंतिम निर्णय के समाप्त हो गई। यहां पढ़ें पूरी खबर…