जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड 2026 क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवार जोसा काउंसलिंग 2026 प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जोसा काउंसलिंग का प्रोसेस 02 जून 2026 से शुरू हो गया है। जो भी कैंडिडेट इस प्रोसेस का हिस्सा बनना चाहते हैं उन्हें ऑफिशियल वेबसाइट josaa.nic.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। जोसा काउंसलिंग को लेकर उम्मीदवारों के मन में कई तरह से सवाल भी होंगे जिनके जवाब आपको यहां मिल जाएंगे।

जोसा रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को समझना जरूरी

IITs, NITs, IIITs, IISc और अन्य संस्थानों में एडमिशन के लिए कैंडिडेट्स को चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया के तहत अपनी पसंद के संस्थान सेलेक्ट करने होंगे। इसके बाद कैंडिडेट को जो संस्थान अलॉट किया जाएगा वहां जाकर उन्हें एडमिशन लेना होगा। उम्मीदवारों को जोसा काउंसलिंग के प्रोसेस को समझना उतना ही जरूरी है जितना कि जेईई में अच्छी रैंक पाना। JoSAA 2026 से जुड़े कुछ सवालों के जवाब यहां उपलब्ध हैं जो स्टूडेंट्स की ओर से पूछे जा सकते हैं।

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सवाल: क्या JoSAA रजिस्ट्रेशन जरूरी है?

हां बिल्कुल जरूरी है। जोसा रजिस्ट्रेशन के बिना कैंडिडेट्स को कोई संस्थान और उस संस्थान में कोई सीट अलॉट नहीं होगी। अगर किसी कैंडिडेट ने JEE Main या JEE Advanced में अच्छी रैंक हासिल की है तो उन्हें JoSAA पोर्टल पर जरूर रजिस्ट्रेशन करना होगा।

सवाल: JoSAA रजिस्ट्रेशन के जरिए कहां मिलेगा एडमिशन?

जोसा काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन के जरिए कैंडिडेट्स को IITs, IISc बेंगलुरु, NITs, IIITs, IIEST शिबपुर, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPAs) और कई दूसरे सेंट्रल या स्टेट-फंडेड टेक्निकल इंस्टिट्यूट में एडमिशन मिलेगा।

सवाल: जोसा के जरिए कैसे अलॉट होगी सीट?

सीट अलॉटमेंट कैंडिडेट की रैंक, कैटेगरी, एलिजिबिलिटी, रिजर्वेशन नियम, सीट की अवेलेबिलिटी और चॉइस फिलिंग के दौरान कैंडिडेट्स की ओर से दी गई प्रेफरेंस के आधार पर तय होगी। उम्मीदवारों को उनकी अवेलेबल प्रेफरेंस के आधार पर ही सीट अलॉट करता है।

सवाल: क्या चॉइस लॉक होने के बाद बदली जा सकती हैं?

हां, इसमें बदलाव हो सकता है बशर्ते चॉइस भरने की डेडलाइन खत्म न हुई हो। कैंडिडेट OTP वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करके JoSAA पोर्टल के जरिए चॉइस को चेंज कर सकते हैं।

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सवाल: अगर कोई कैंडिडेट चॉइस लॉक करना भूल जाता है तो क्या होगा?

अगर चॉइस सेव हो गई हैं लेकिन मैन्युअली लॉक नहीं की गई हैं तो JoSAA की डेडलाइन के बाद आखिरी सेव की गई चॉइस लिस्ट को ऑटोमैटिकली लॉक कर दिया जाएगा। फिर उस लिस्ट को सीट अलॉटमेंट के लिए ही माना जाएगा।

सवाल: मॉक सीट अलॉटमेंट क्या हैं और स्टूडेंट्स को इन पर ध्यान क्यों देना चाहिए?

मॉक अलॉटमेंट कैंडिडेट्स को यह समझने में मदद करते हैं कि उनके मौजूदा चॉइस ऑर्डर और रैंक के आधार पर उन्हें कौन सी सीट मिलने की संभावना है। चूंकि ये सिर्फ इंडिकेटिव हैं और फ़ाइनल अलॉटमेंट नहीं हैं, इसलिए कैंडिडेट्स डेडलाइन से पहले अपनी प्रेफरेंस लिस्ट को रिवाइज और ऑप्टिमाइज करने के लिए रिजल्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सवाल: क्या डेडलाइन समाप्त होने के बाद चॉइस फिलिंग में बदलाव हो सकता है?

नहीं। चॉइस-फिलिंग पीरियड खत्म होने के बाद कैंडिडेट अपनी प्रेफरेंस लिस्ट में प्रोग्राम और इंस्टीट्यूट में बदलाव नहीं कर सकते।

सवाल: सीट अलॉटमेंट मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया?

सीट अलॉटमेंट लिस्ट आने के बाद उसमें जिन उम्मीदवारों का नाम होगा उन्हें अलॉटेड संस्थान में रिपोर्ट करना होगा। इससे पहले ऑनलाइन रिपोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी जिसमें फ़्रीज, फ्लोट या स्लाइड चुनना, जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना और तय डेडलाइन के अंदर सीट एक्सेप्टेंस फीस देना शामिल है।

सवाल: सीट एक्सेप्टेंस फीस (SAF) क्या है?

सीट एक्सेप्टेंस फीस सीट अलॉट होने के बाद दी जाती है ताकि यह कन्फ़र्म हो सके कि कैंडिडेट सीट रखना चाहता है। डेडलाइन के अंदर फीस न देने पर अलॉटमेंट कैंसिल हो सकता है।

सवाल: पार्शियल एडमिशन फीस (PAF) क्या है?

पार्शियल एडमिशन फीस एक एक्स्ट्रा पेमेंट है जो NIT+ सिस्टम में सीट रखने वाले कैंडिडेट्स को JoSAA के फाइनल राउंड के बाद देनी होती है। यह पेमेंट अलॉटेड सीट को बनाए रखने के लिए तय टाइमलाइन के अंदर करनी होती है।

सवाल: SAF और PAF में क्या अंतर है?

काउंसलिंग में हिस्सा लेने की पुष्टि के लिए सीट अलॉट होने के तुरंत बाद SAF का पेमेंट किया जाता है। PAF का पेमेंट बाद में उन कैंडिडेट्स द्वारा किया जाता है जो फाइनल राउंड के बाद NIT+ सिस्टम में सीट बनाए रखते हैं।

सवाल: फ्रीज, फ्लोट और स्लाइड का क्या मतलब है?

फ्रीज का मतलब है कि एक कैंडिडेट अलॉटेड सीट को स्वीकार कर लेता है और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेना चाहता।

फ्लोट की प्रक्रिया में एक कैंडिडेट को किसी भी भाग लेने वाले इंस्टिट्यूट में हायर-प्रेफरेंस चॉइस के लिए एलिजिबल रहते हुए अलॉटेड सीट रखने की अनुमति होती है।

वहीं स्लाइड एक कैंडिडेट को मौजूदा सीट को बनाए रखते हुए उसी इंस्टिट्यूट में हायर-प्रेफरेंस प्रोग्राम चुनने की अनुमति देता है।

सवाल: क्या कोई कैंडिडेट बाद में फ़्रीज़, फ़्लोट या स्लाइड ऑप्शन बदल सकता है?

कोई कैंडिडेट काउंसलिंग के ज्यादातर राउंड के दौरान फ्लोट से स्लाइड या फ्रीज और स्लाइड से फ्रीज में बदल सकता है। हालांकि एक बार फ़्रीज चुनने के बाद आप बदलाव नहीं कर सकते।

सवाल: अगर किसी कैंडिडेट को बाद के राउंड में बेहतर सीट अलॉट हो जाती है तो क्या होगा?

अगर किसी कैंडिडेट ने फ्लोट या स्लाइड चुना है और उसे बाद के राउंड में अधिक पसंदीदा सीट मिल जाती है तो पहले अलॉट की गई सीट अपने आप कैंसल हो जाती है और उसकी जगह अपग्रेडेड अलॉटमेंट आ जाता है।

सवाल: क्या कोई कैंडिडेट अपग्रेड मिलने के बाद पहले अलॉट की गई सीट पर वापस आ सकता है?

नहीं। एक बार जब JoSAA प्रोसेस के जरिए अधिक पसंदीदा सीट को स्वीकार करने के बाद पहले अलॉट की गई सीट अपने आप कैंसल हो जाती है और उसे वापस नहीं लाया जा सकता।

सवाल: अगर कोई कैंडिडेट ऑनलाइन रिपोर्टिंग पूरी नहीं करता है तो क्या होगा?

डेडलाइन के अंदर सभी रिपोर्टिंग स्टेप्स पूरे न कर पाने को अलॉट की गई सीट का रिजेक्शन ही माना जाएगा। सीट कैंसल हो जाएगी और कैंडिडेट अगले राउंड के लिए एलिजिबिलिटी खो सकता है।

सवाल: JoSAA काउंसलिंग के दौरानकिन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है?

कैंडिडेट्स को क्लास 10वीं और 12वीं का सर्टिफिकेट, कैटेगरी सर्टिफिकेट (अगर लागू है तो), PwD डॉक्यूमेंट्स, स्टेट एलिजिबिलिटी का प्रूफ, मेडिकल सर्टिफिकेट और नेशनलिटी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए तैयार रखने चाहिए।