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JNU Row: 9 फरवरी से 9 सितंबर तक का सफर

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्याल छात्रसंघ चुनाव के मतदान से ठीक दो दिन पहले अध्यक्षीय भाषण हुआ।

Author नई दिल्ली | Published on: September 9, 2016 1:00 AM
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्याल के छात्र (फाइल फोटो)

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्याल छात्रसंघ चुनाव के मतदान से ठीक दो दिन पहले अध्यक्षीय भाषण हुआ। नौ फरवरी की घटना, शोधार्थी पर बलात्कार के आरोप के अलावा रोहित वेमुला से लेकर कश्मीर तक के मुद्दे छाए रहे। बुधवार रात दस बजे शुरू हुए अध्यक्षीय भाषण का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इसमें सभी छात्र संगठनों के अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को 12-12 मिनट बोलने का समय दिया गया। शुक्रवार को जेएनयू में मतदान है।

सबसे पहले मंच पर बाप्सा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार राहुल पूनाराम आए। राहुल ने कहा कि वाम हो या दक्षिण असल में दोनों ही दलित विरोधी हैं। उन्होंने वामपंथी संगठनों को भी पाखंडी और लालची करार दिया। अभाविप की उम्मीदवार जाह्नवी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मनुस्मृति पढ़ेंगी तो उनके साथ हो जाएंगी। बलात्कार मामले पर आइसा को घेरा। इसके अलावा ड्रॉप आउट स्टूडेंट्स के मुद्दे को उठाया और कहा कि दलितों के अनुकूल माहौल न होने से उन्हें बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ी है। राहुल को मिलीं तालियां वोट में बदलीं तो वाम गठबंधन के वोट कट सकते हैं।

वहीं वामपंथी गठबंधन की ओर से आइसा के उम्मीदवार मोहित ने कहा कि दक्षिणपंथी दरअसल ‘गुड दलित-बैड दलित’ में दलितों को भी बांटते हैं। संघियों के डर का नारा ‘शटडाउन जेएनयू’ में दिखता है। उन्होंने रोहित वेमुला का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राष्ट्र विरोधी बताकर उसकी हत्या कर दी गई। इसे छात्र देख रहे हैं व इसका जवाब देंगे। एसएफआइ व आइसा के गठबंधन के एक सवाल पर मोहित ने कहा कि हां हम मानते हैं कि सीपीआइ व सीपीआइएमएल एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। उसी तरह आइसा व एसएफआइ भी वैचारिक रूप से बिल्कुल अलग अस्तित्व रखते हैं। लेकिन अभी सवाल उससे भी बड़े व भयानक खतरे का है। दक्षिणपंथी ताकतों को परिसर में रोकने के लिए हम एकजुट हुए हैं। हम वैचारिक रूप से भले ही अलग हैं पर एबीवीपी का विरोध करने के लिए पूरी तरह एकजुट हैं। कश्मीर के मसले पर सिर्फ इतना कहा कि कश्मीर हो या पूर्वोत्तर हम सेना या पुलिसिया दमन का विरोध करते हैं।

एबीवीपी की उम्मीदवार जाह्नवी ने वामपंथ पर निशाना साधते हुए कहा कि नौ फरवरी को देश बांटने की बात की गई। इसे देश के छात्रों ने भी देखा है। हम नौ फरवरी का जवाब नौ सितंबर को देंगे। जाह्नवी ने पिछले छात्र संघ चुनाव में जीते अपने साथी सौरभ के साल भर के कामकाज का ब्योरा पेश किया। उन्होंने प्लेसमेंट, छात्रावास व दूसरे संसाधनों पर प्रयासों के बाबत बात रखी। आइसा पर हमला करते हुए कहा कि परिसर में ऐसे छात्र संगठनों को आने से रोकना होगा जिनके सामने छात्राएं सुरक्षित नही हैं। प्रचार अभियान के छात्रों के निजी नंबरों पर भेजने के सवाल पर सिर्फ इतना कहा कि प्रचार के लिए सबसे किफायती माध्यम (एसएमएस ) को चुना था ताकि लिंग्दोह की सिफारिशों पर अमल हो सके।

एनएसयूआइ से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार शनि धीमान ने कहा कि फरवरी की घटना संघ और वामपंथियों की साजिश थी। अण्णा आंदोलन, आप के निर्माण व विवाद के दौरान उभरे छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन फॉर स्वराज (एसएफएस) के उम्मीदवार दिलीप कुमार भी मैदान में हैं। कुमार ने वाम पर हमला बोलते हुए कहा, ‘स्टैंड विद जेएनयू के समय क्या हुआ था, उस समय सभी कामरेड गायब हो गए थे। तब तो कोई नजर नहीं आया था’।

जेएनयू में लगे भारत विरोधी नारों के आरोप में मौजूदा छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के साथ उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य राष्टÑ द्रोह के आरोप में जेल गए। इस बार के चुनाव में वही मुद्दा मुख्य रूप से गरमाया हुआ है। पिछले चुनाव में कई साल बाद अभाविप का खाता खुला था। परिषद इस बार कुछ ज्यादा की उम्मीद लगाए हुए है। लेकिन उसे वाम के गढ़ में वाम गठबंधन भेदने में कितनी सफलता मिलती है यह आने वाला वक्तही बताएगा। मतदान शुक्रवार को है। नतीजे उसके शनिवार देर रात या रविवार को आएंगे।

 

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