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JNU Election 2019: राजस्थान से बंगाल, उड़ीसा से यूपी-बिहार तक, जेएनयू छात्रसंघ ‘अध्यक्ष’ पद की दौड़ में शामिल हैं ये कैंडिडेट्स

Jawaharlal Nehru University: एबीवीपी की ओर से सभी पदों पर मैदान में अपने उम्मीदवार उतारने के साथ ही जेएनयू छात्रसंघ का बिगुल बज गया। हालांकि जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में कई उम्मीवार ऐसे भी हैं जिनका किसी दल से वास्ता नहीं और वे निर्दलीय रूप से यह छात्रसंघ चुनाव लड़ेंगे ।

JNU प्रतीकात्मक चित्र फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Jawaharlal Nehru University: जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी (JNU) में शुक्रवार को संयुक्त वामपंथी मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) की ओर से सभी पदों पर मैदान में अपने उम्मीदवार उतारने के साथ ही जेएनयू छात्रसंघ का बिगुल बज गया। हालांकि जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में कई उम्मीवार ऐसे भी हैं जिनका किसी दल से वास्ता नहीं और वे निर्दलीय रूप से यह छात्रसंघ चुनाव लड़ेंगे । इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश करने वाले छात्र JNU में  भारत के अलग-अलग राज्यों से यहाँ पढ़ने आये हैं ।

आयशा घोष (24 वर्ष): स्टूडेंट्स फेडरेशन इंडिया (SFI) के पहले उम्मीदवार के रूप में आयशा घोष ने इस छात्रसंघ चुनाव में अपनी दावेदारी पेश की है। 2015 में SFI ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के साथ गठबंधन किया था इसीलिए इन समीकरणों के मद्देनज़र चुनाव में संयुक्त रूप से उम्मीदवार उतारे जाते हैं। पश्चिम बंगाल की रहने वाली आयशा JNU में International Relations से एम.फिल. कर रही हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। 2016 में SFI के साथ जुड़ने वाली आयशा बताती हैं कि इस चुनाव में उनका मुद्दा JNU कैम्पस में लोकतान्त्रिक ढांचा बचाए रखने को लेकर है, साथ ही उनकी लड़ाई सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के खिलाफ है।

मनीष जांगिड (25 वर्ष): स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट स्टडीज़ में पीएचडी तृतीय वर्ष के शोध छात्र मनीष जांगिड राजस्थान के रहने वाले हैं जिन्होंने जोधपुर के MBM इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद JNU में दाखिला लिया। एबीवीपी दल के सचिव और अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मनीष विश्वविद्यालय में पॉइंट सिस्टम को पुनर्स्थपित करने के पक्ष में हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि हॉस्टल तथा पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए ज्यादा से ज्यादा फंड मुहैया कराया जा सके।

जितेन्द्र सुना (29 वर्ष): पीएचडी तृतीय वर्ष के छात्र जितेन्द्र बिरसा फुले आंबेडकर एसोसिएशन (BAPSA) से अध्यक्ष पद की रेस के लिए मैदान में हैं जिन्होंने JNU से ही एमए किया और अब Center for Social Exclusion and Inclusive Policy में शोध छात्र हैं। उडीसा के एक गाँव से अपने सफ़र की शुरुआत करने वाले  जितेन्द्र ने वहीँ के एक कॉलेज से ग्रेजुएशन कर JNU का रुख किया । इस चुनाव में जीतेन्द्र लोगों का ध्यान Reserved Category के उन छात्रों की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं जिन्हें फेलोशिप कम या न मिलने की वजह से अपनी पढाई बीच में ही छोडनी पड़ती है।

प्रशांत कुमार (26 वर्ष): नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के उम्मीदवार के रूप में फिलोसोफी के शोध छात्र  प्रशांत कुमार का मुद्दा है कि विज्ञान संकाय के छात्रों की समस्याओं पर ख़ास ध्यान दिया जाए साथ ही हॉस्टल और लाइब्रेरी की दशा सुधारना भी उनके मुद्दे के अहम् बिंदु हैं। उत्तर प्रदेश के घाटमपुर जिले के रहने वाले प्रशांत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से ग्रेजुएशन किया जिसके बाद वे एमए के लिए JNU से जुड़े।

प्रियंका भारती (22 वर्ष): जर्मन भाषा में एमए की छात्रा पटना के पास फतुहा कस्बे से निकलकर उच्च-शिक्षा ग्रहण करने के लिए पहुँचने वाली पहली इन्सान हैं जिन्होंने पिछले ही साल छात्र राष्ट्रीय जनता दल (CRJD) ज्वाइन किया और अब इसी दल से वे JNU छात्रसंघ अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं। उनका मुद्दा है कि पॉइंट सिस्टम वापस लिया जाना चाहिए, यह अकादमिक गैरबराबरी को बढ़ावा देता है। यूनिवर्सिटी में जीएसकैश को लागू किया जाना भी उनकी मांग में शामिल है।

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