Jharkhand Student Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों को बड़ी कामयाबी मिली है। हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC-CGL 2024 परीक्षा रद्द करने के साथ ही निजी एजेंसी टीडीपीएल की ओर से 2014 से अब तक कराई गई भर्ती परीक्षाओं, उनके परिणामों और नियुक्तियों को भी रद्द करने का फैसला किया है। सरकार ने इन मामलों की व्यापक जांच कराने की बात कही है।
छात्रों का आंदोलन कई सप्ताह से चल रहा था और प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना थी। सरकार के फैसले को इसलिए आंदोलनकारी छात्रों की बड़ी राजनीतिक और नैतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी परीक्षा रद्द होने के बाद इसे झारखंड के छात्रों की बड़ी जीत बताया है।
आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन करीब 24 दिनों तक चला। प्रदर्शनकारी लगातार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। आखिरकार सरकार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और TDPL से जुड़ी अन्य परीक्षाओं पर भी कार्रवाई का फैसला लेना पड़ा। यानी इस आंदोलन का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि जिस मुद्दे को लेकर छात्र सड़क पर उतरे थे, सरकार को उसी पर अपना फैसला बदलना पड़ा।
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा रद्द की गई परीक्षाओं में JPSC 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के अलावा संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023, संयुक्त सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET), वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा, सहायक वन संरक्षक नियुक्ति परीक्षा और TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाएं शामिल हैं।
छात्रों की मांगों के आगे झुकी सरकार
राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं में एक बार प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद छात्रों का भरोसा वापस हासिल करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
झारखंड में छात्रों ने लगातार यह मुद्दा उठाया कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में अगर गड़बड़ी की आशंका है तो उसका समाधान सिर्फ आश्वासन से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से होना चाहिए।
परीक्षा रद्द करने का फैसला इसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है। हालांकि सरकार का फैसला आने के बाद भी छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग पर कायम हैं।
JSSC-CGL रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों पर असर
इस फैसले का दूसरा पहलू भी है कि JSSC-CGL परीक्षा में सफल होकर नियुक्ति प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके करीब 2,000 उम्मीदवारों का भविष्य अब प्रभावित हुआ है। ऐसे उम्मीदवारों का कहना है कि अगर उन्होंने किसी गड़बड़ी में हिस्सा नहीं लिया है तो उन्हें इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।
इसलिए सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है, जिसमें एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठाई गई चिंताओं का समाधान करना और दूसरी तरफ उन उम्मीदवारों के हितों की रक्षा करना जिन्होंने मौजूदा प्रक्रिया में सफलता हासिल की है।
क्या सिर्फ परीक्षा रद्द करना काफी है?
यही अब सबसे बड़ा सवाल है। परीक्षा रद्द करना आंदोलनकारी छात्रों की बड़ी जीत जरूर है, लेकिन इससे विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने 2014 से राज्य में हुई संबंधित परीक्षाओं की जांच की बात कही है। अब असली परीक्षा जांच की पारदर्शिता और उसके नतीजे की होगी।
अगर जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी करनी होगी इसलिए छात्रों की CBI जांच की मांग अभी भी बनी हुई है और सरकार के फैसले के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म हो गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगा।
देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म की भूख हड़ताल
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। यह फैसला सरकार की ओर से JSSC-CGL और संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल जारी रहने की खबर है।
यह घटनाक्रम बताता है कि छात्रों का आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लगातार सड़क पर बने दबाव ने सरकार को फैसला लेने के लिए मजबूर किया।
छात्रों की जीत का बड़ा संदेश
झारखंड का यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश देता है। जब हजारों छात्र अपनी परीक्षा, नौकरी और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर लगातार और संगठित तरीके से आवाज उठाते हैं, तो सरकारों के लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होता।
हालांकि आंदोलन की सफलता का अंतिम पैमाना सिर्फ परीक्षा रद्द होना नहीं होगा। असली सफलता तब मानी जाएगी जब अगली भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और विवादों से मुक्त हो और योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी संदेह के उनका अधिकार मिले।
