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अवसर: आभूषण डिजाइनिंग में है सुनहरे करिअर का मौका

विश्व में भारत हीरा कटाई तथा पॉलिश करने का सबसे बड़ा केंद्र है। दुनिया के 90 फीसद भारत में ही तराशे जाते हैं। आज के समय में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी आभूषण पहनना पसंद करने लगे हैं। इससे बाजार में तेजी आ गई है। इस वजह से इस क्षेत्र में युवाओं को अच्छे मौके मिल रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

वर्तमान में भारत का रत्न और आभूषण उद्योग सालाना करीब 15 फीसद की दर से विकास कर रहा है। इस समय देश में यह कारोबार 13 अरब रुपए से अधिक का हो चुका है। एक अनुमान के मुताबिक 2022 तक इस क्षेत्र में 82 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। भारत हीरे-जवाहरात और अन्य रत्नों का 45 फीसद निर्यात कर रहा है। विश्व में भारत हीरा कटाई तथा पॉलिश करने का सबसे बड़ा केंद्र है। दुनिया के 90 फीसद भारत में ही तराशे जाते हैं। आज के समय में महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी आभूषण पहनना पसंद करने लगे हैं। इससे बाजार में तेजी आ गई है। इस वजह से इस क्षेत्र में युवाओं को अच्छे मौके मिल रहे हैं।

पाठ्यक्रम: आभूषण डिजाइनिंग के ज्यादातर पाठ्यक्रम डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के तौर पर ही कराए जाते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जो तीन वर्षीय या चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रदान करते हैं। पाठ्यक्रम के दौरान प्रकृति अध्ययन, फ्री हैंड ड्राइंग, सरफेस डिजाइन, इंट्रोडक्शन टू जेमोलॉजी, एलिमेंट्स आॅफ डिजाइन, मेटल एंड बिहेवियर, हिस्ट्री आॅफ इंडियन ज्वेलरी, इलस्ट्रेशन एंड रेंडरिंग, डिजाइन प्रोसेस, क्रिएटिव ज्वेलरी, जेम आइडेंटिफिकेशन टूल्स आदि का अध्ययन कराया जाता है। इस आधार पर इस क्षेत्र को स्नातक, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों में बांटा जा सकता है। इसके अधिकांश पाठ्यक्रमों में दाखिला साक्षात्कार या योग्यता के आधार पर मिलता है।

वेतनमान: बतौर प्रशिक्षु काम शुरू करने वाले पेशेवर को शुरुआत में 8,000-10,000 रुपए प्रति महीने मिलते हैं जबकि अनुभव बढ़ने पर यह राशि बढ़कर 18,000-20,000 प्रति माह हो जाती है। रिटेल स्टोर्स पर ज्यादातर काम कमीशन के आधार पर होता है इसलिए पैसे भी उसी रूप में मिलते हैं। स्वतंत्र डिजाइनरों की कमाई भी 10,000-30,000 रुपए प्रति माह हो जाती है। 7 से 10 साल के अनुभव होने पर 12 लाख रुपए सालाना तक पहुंच सकती है।

आवश्यक योग्यताएं: आभूषण डिजाइनिंग में सर्टिफिकेट और वोकेशनल पाठ्यक्रमों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता बारहवीं (10+2) है। इसके बाद ही डिप्लोमा, डिग्री और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम कर सकते हैं। छात्रों की दिलचस्पी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम की ओर ज्यादा रहती है। कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जो 10वीं के बाद छोटी अवधि के पाठ्यक्रम कराते हैं। स्नातकोत्तर के लिए स्नातक डिग्री जरूरी है।

आवश्यक हुनर: आभूषण डिजाइनिंग के लिए सबसे अधिक आवश्यकता रचनात्मकता की होती है। सटीक आकलन, आंखों-हाथों के कुशल समन्वय और दिमाग को केंद्रित करके ही उत्कृष्ट डिजाइन तैयार किया जा सकता है। बाजार की समझ और मांग को प्राथमिकता देते हुए काम के प्रति समर्पित लोगों की इस उद्योग को हमेशा जरूरत रहती है।

कैड की जानकारी जरूरी: सॉफ्टवेयर की जानकारी जरूरी
आभूषण डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी पेशेवरों को कंप्यूटर की जानकारी होनी जरूरी है। कंप्यूटर एडेड डिजाइन (कैड) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल उत्पादन कंपनियों में उत्पाद का डिजाइन बनाने में किया जाता है। ज्यादातर कंपनियां कैड का प्रयोग आभूषण के टुकड़े का वर्चुअल रियलिटी मॉडल तैयार करने, डिजाइन बनाने, पत्थरों को बदलने तथा अन्य कार्यों में करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर एडेड मैन्युफैक्चरिंग (कैम) कहलाती है। इसके जरिए किसी डिजाइन के एक जैसे कई पीस तैयार करने और देश से बाहर रिटेल के वितरण में मदद करता है। इसके अलावा मैक एंड पीसी, तुका कैड, तुका स्टूडियो, आॅटो कैड, 3-डी मैक्स, रिवेट, स्केच अप, ज्वेल कैड, डिस्क्रीट माया, एपल एफसीपी, आईवन फ्यूजन आदि उपयोग में लाए जाते हैं।

प्रमुख संस्थान:
’भारतीय रत्न एवं आभूषण संस्थान, नई दिल्ली
’राष्ट्रीय फैशन तकनीक संस्थान (निफ्ट), नई दिल्ली
’डिजाइन एंड इनोवेशन एकेडमी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
’आभूषण डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, नोएडा
’नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ आभूषण डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
’पॉलिटेक्निक फॉर वुमन, नई दिल्ली

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