दो छात्र, एक हॉस्टल और वर्षों की तैयारी, जिसके बाद वे भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक के शीर्ष पर पहुंचे। जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणामों में शुभम कुमार ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की, जबकि कबीर छिल्लर ने AIR 2 प्राप्त की है।

इस वर्ष के परिणामों की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि दोनों टॉपर कोटा में एलन के छात्र हैं और एक ही हॉस्टल में रहकर वर्षों तक साथ पढ़ाई करते रहे। इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम ने दोनों टॉपर्स से उनकी तैयारी, गलतियों, AI के उपयोग, JEE में संभावित बदलावों और IIT Bombay में Computer Science चुनने के कारणों पर बातचीत की।

प्रश्न: आपने कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में कैसा प्रदर्शन किया? क्या आप दोनों CBSE बोर्ड से हैं?

कबीर छिल्लर: हम दोनों CBSE बोर्ड से हैं। मैंने 97.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

शुभम कुमार: और मैंने 97 प्रतिशत अंक हासिल किए।

प्रश्न: इस वर्ष मॉडरेशन और OSM से जुड़े मुद्दों पर काफी चर्चा हुई। क्या आपको ऐसी किसी समस्या का सामना करना पड़ा?

शुभम कुमार: नहीं, हमें OSM से जुड़ी कोई समस्या नहीं हुई, जबकि दुर्भाग्यवश कई छात्र इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

कबीर छिल्लर: सच कहूं तो हमने अपने बोर्ड अंकों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। परिणाम आने के दिन देखा और बस। मेरा मुख्य फोकस JEE था।

प्रश्न: आपकी JEE की तैयारी कब शुरू हुई?

शुभम कुमार: मेरी औपचारिक तैयारी कक्षा 11 में कोचिंग जॉइन करने के साथ शुरू हुई। उससे पहले कक्षा 10 से ही मैं फिजिक्स की थ्योरी किताबें जैसे HC Verma, NCERT और कुछ विदेशी लेखकों की पुस्तकें पढ़ता था। लेकिन व्यवस्थित तैयारी, कोचिंग सामग्री और तीनों विषयों का संतुलन कक्षा 11 से शुरू हुआ।

कबीर छिल्लर: मैंने दिल्ली में कक्षा 9 से तैयारी शुरू की थी और फिर कक्षा 11 में कोटा आ गया।

प्रश्न: तैयारी के दौरान आप प्रतिदिन कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

कबीर छिल्लर: हमारे शिक्षकों ने एक तय कार्यक्रम दिया हुआ था और हमारा मुख्य लक्ष्य उसे पूरा करना होता था। यदि समय बचता था तो मैं कमजोर क्षेत्रों की पुनरावृत्ति करता था। परीक्षा के करीब मैं लगभग 12 घंटे पढ़ता था, लेकिन ज्यादातर समय 8 से 10 घंटे पढ़ाई होती थी।

शुभम कुमार: मेरे लिए भी लगभग ऐसा ही था। कक्षाओं के अलावा प्रतिदिन 9 से 10 घंटे पढ़ाई करता था। परीक्षा के समय दबाव बढ़ने के कारण पढ़ाई के घंटे भी बढ़ गए। शाम को 20-30 मिनट खेलने के अलावा लगभग पूरा दिन पढ़ाई में बिताता था।

प्रश्न: तैयारी के दौरान तनाव को कैसे संभाला?

कबीर छिल्लर: कोटा आने से पहले मैंने कभी टेबल टेनिस नहीं खेला था। हॉस्टल में टेबल टेनिस टेबल थी और हमने कक्षा 11 और 12 में काफी खेला। शाम को कुछ अन्य खेल भी खेलते थे।

शुभम कुमार: मेरे लिए बैडमिंटन और क्रिकेट तनाव दूर करने का माध्यम थे। शाम को दोस्तों के साथ खेलना मेरी सबसे बड़ी हॉबी थी।

प्रश्न: क्या आपने पढ़ाई के अलावा कोई नई रुचि विकसित की?

कबीर छिल्लर: संगीत सुनना मेरी नई रुचि बन गई। JEE की तैयारी से पहले मैं बहुत कम संगीत सुनता था, लेकिन तैयारी के दौरान इसे सुनना शुरू किया।

प्रश्न: आपकी तैयारी में सोशल मीडिया की क्या भूमिका रही?

कबीर छिल्लर: मैं इंस्टाग्राम या स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करता था। मुख्य रूप से WhatsApp का इस्तेमाल शिक्षकों, दोस्तों और परिवार से बात करने के लिए करता था।

शुभम कुमार: मेरे लिए भी लगभग यही स्थिति थी। मैं परिवार और दोस्तों से संपर्क के लिए WhatsApp का उपयोग करता था। इसके अलावा प्रतिदिन 15-20 मिनट YouTube Shorts पर समाचार और खेल अपडेट देखता था।

प्रश्न: AI छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। क्या आपने AI टूल्स का उपयोग किया?

शुभम कुमार: मैं लगभग हर दिन Claude और NotebookLM जैसे AI टूल्स का उपयोग करता था। मैं पाठ्यपुस्तकों और कोचिंग सामग्री की PDF अपलोड कर उनसे क्विज और सारांश तैयार करता था, जिससे पुनरावृत्ति आसान हो जाती थी।

मैं Claude और कभी-कभी Gemini का उपयोग कोचिंग सामग्री को व्यवस्थित PDF और प्रश्नपत्रों में बदलने के लिए भी करता था। कई बार मैंने वास्तविक परीक्षा जैसे Computer Based Test भी तैयार किए।

कबीर छिल्लर: मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने कभी AI का उपयोग नहीं किया।

प्रश्न: अगर आपको दोबारा मौका मिले तो कौन-सी गलती नहीं दोहराएंगे?

कबीर छिल्लर: मैं सिद्धांत और नोट्स की पुनरावृत्ति पर अधिक समय देता और प्रश्न हल करने पर थोड़ा कम।

शुभम कुमार: हम अक्सर सोचते हैं कि कोई काम कुछ मिनटों में हो जाएगा और उसे टाल देते हैं। परीक्षा के दौरान यही छोटी देरी बड़ा फर्क पैदा करती है। यदि मैंने टालमटोल नहीं की होती तो सफर और आसान होता।

प्रश्न: बोर्ड परीक्षा और JEE की तैयारी में संतुलन कैसे बनाया?

शुभम कुमार: बोर्ड परीक्षा के दौरान हमें केवल उन्हीं विषयों को NCERT और CBSE के अनुसार दोहराना होता था जिन्हें हम JEE के लिए पहले ही पढ़ चुके थे। एक-दो दिन की तैयारी पर्याप्त थी।

कबीर छिल्लर: गणित में LPP जैसा अध्याय है जो बोर्ड में आता है लेकिन JEE में नहीं। उसे अलग से पढ़ना पड़ा। फिजिक्स में कुछ विषय और चित्र बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए NCERT की पुनरावृत्ति की। अंग्रेजी और IP के लिए अलग तैयारी करनी पड़ी।

प्रश्न: क्या JEE की तैयारी अपने आप बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी करा देती है?

शुभम कुमार: यदि आप JEE की तैयारी कर रहे हैं तो बोर्ड की तैयारी भी साथ ही हो जाती है। केवल दो-तीन दिन अलग तरीके से पुनरावृत्ति करनी होती है।

प्रश्न: इस वर्ष JEE Main और JEE Advanced का कठिनाई स्तर कैसा रहा?

कबीर छिल्लर: JEE Main अपेक्षा से अधिक कठिन था और पिछले वर्षों की तुलना में भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण था।

शुभम कुमार: JEE Main पिछले वर्ष की तुलना में अधिक कठिन और लंबा था। हालांकि हमने इससे भी कठिन प्रश्नपत्रों का अभ्यास किया था।

प्रश्न: परीक्षा में कठिन प्रश्न आने पर आप क्या करते थे?

शुभम कुमार: मैं प्रश्न को दोबारा पढ़ता था ताकि यह देख सकूं कि कहीं कोई महत्वपूर्ण जानकारी छूट तो नहीं गई। यदि फिर भी हल नहीं होता तो उसे समीक्षा के लिए छोड़ देता था।

कबीर छिल्लर: किसी प्रश्न को बाद के लिए छोड़ने में संकोच नहीं करना चाहिए। एक ही प्रश्न पर अधिक समय देना समय की बर्बादी है।

प्रश्न: तैयारी के दौरान खुद को अलग रखना बेहतर है या सामाजिक रूप से जुड़े रहना?

शुभम कुमार: मेरा मानना है कि दोनों के बीच संतुलन सबसे अच्छा तरीका है। कभी-कभी मैं एकांत में पढ़ता था, लेकिन दोस्तों के साथ समय भी बिताता था।

कबीर छिल्लर: हां, संतुलित रास्ता ही सबसे बेहतर है।

प्रश्न: एक ही शिक्षक और हॉस्टल में रहने के बावजूद साथियों का कितना प्रभाव रहा?

कबीर छिल्लर: मैं हमेशा अकेले पढ़ना पसंद करता था।

शुभम कुमार: मैं दूसरों की रणनीतियों को देखता था, लेकिन अंततः अपने निर्णय पर चलता था। दूसरों के विचारों को अपनी रणनीति में शामिल करना मददगार साबित हुआ।

प्रश्न: मॉक टेस्ट में कमजोरियां सामने आने पर प्राथमिकता क्या होती थी—कॉन्सेप्ट रिवीजन या प्रश्न अभ्यास?

कबीर छिल्लर: प्रश्न अभ्यास। यदि किसी विषय में लगातार गलतियां हो रही थीं तो मैं अधिक प्रश्न हल करता था।

शुभम कुमार: परीक्षा में अंक प्रश्न हल करने से मिलते हैं। इसलिए अधिक से अधिक प्रश्नों को सटीकता के साथ हल करने पर ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न: आपकी पसंदीदा कॉलेज और ब्रांच कौन-सी है?

शुभम कुमार और कबीर छिल्लर: IIT Bombay, Computer Science।

प्रश्न: IIT Bombay और Computer Science ही क्यों?

कबीर छिल्लर: सबसे महत्वपूर्ण चीज वहां का पीयर ग्रुप है। IIT Bombay सिर्फ फैकल्टी नहीं, बल्कि देश के सर्वश्रेष्ठ छात्रों का केंद्र है। ऐसे लोगों के बीच रहना सबसे महत्वपूर्ण है।

शुभम कुमार: कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। IIT Bombay में देशभर के श्रेष्ठ छात्र एक साथ आते हैं, जो सीखने का बेहतरीन माहौल प्रदान करता है।

प्रश्न: कबीर, आपने खगोल विज्ञान में रुचि की बात की है। फिर Computer Science क्यों?

कबीर छिल्लर: मैं खगोल विज्ञान में आगे बढ़ना चाहता हूं। लेकिन आज के समय में खगोल विज्ञान में भी प्रोग्रामिंग और AI बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए Computer Science उस रुचि को और मजबूत करेगी।

प्रश्न: क्या आप भविष्य में खगोल विज्ञान की ओर लौटना चाहेंगे?

कबीर छिल्लर: बिल्कुल।

प्रश्न: शुभम, कंप्यूटर साइंस के बाद आपकी क्या योजना है?

शुभम कुमार: फिलहाल मैं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में गहराई से काम करना चाहता हूं और यह समझना चाहता हूं कि इसे दुनिया के लिए अधिक सुरक्षित, सुलभ और उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है।

प्रश्न: यदि आपको JEE प्रणाली में एक बदलाव करने का मौका मिले तो वह क्या होगा?

कबीर छिल्लर: मेरा मानना है कि पढ़ाई में कुछ व्यावहारिक घटक शामिल किए जाने चाहिए, हालांकि इसे लागू करना आसान नहीं होगा।

शुभम कुमार: AI को कोचिंग इकोसिस्टम में सकारात्मक तरीके से शामिल किया जाना चाहिए। छात्रों को इसका उपयोग केवल उत्तर प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि क्विज बनाने, पेपर विश्लेषण करने और तैयारी बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए। इससे पूरे उद्योग में बड़ा बदलाव आ सकता है।