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दिमाग के अनजाने हिस्से की खोज

ऑस्ट्रेलिया के ‘न्यूरोसाइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ में शोध हुआ। मस्तिष्क की संरचना की नई मैपिंग के दौरान इस हिस्से का पता चला। यह हिस्सा उस जगह पाया गया, जहां मस्तिष्क ‘स्पाइनल कॉर्ड’ से मिलता है।

Author January 15, 2019 5:18 AM
प्रोफेसर पेक्सिनोस

जनसत्ता संवाद 

मानव मस्तिष्क में दो मिलीमीटर आकार के एक नए हिस्से की खोज की गई है। मस्तिष्क की संरचना की नई मैपिंग करने में जुटे वैज्ञानिक मानव मस्तिष्क की तस्वीरें ले रहे थे, तभी उन्हें अलग तरह का हिस्सा नजर आया। यह खोज करने वाले ऑस्ट्रेलिया के न्यूरो साइंटिस्ट प्रोफेसर जॉर्ज पेक्सिनोस ने दिमाग के इस हिस्से को ‘एंडोरेस्टिफॉर्म न्यूक्लियस’ नाम दिया है। प्रो. पेक्सिनोस और उनकी टीम ने इसकी खोज ‘स्टेनिंग’ और ‘इमेजिंग’ तकनीक से की है। उन्होंने अपनी इस खोज के बारे में ‘ह्यूमन ब्रेन स्टेम’ शीर्षक से किताब लिखी है, जो जल्द ही प्रकाशित होगी। ऑस्ट्रेलिया के ‘न्यूरोसाइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ के निदेशक प्रोफेसर पेक्सिनोस दुनिया के जाने- माने ‘ब्रेन कार्टोग्राफर’ हैं।

दिमाग का यह नया हिस्सा उस जगह पाया गया है, जहां मस्तिष्क स्पाइनल कॉर्ड से मिलता है। यह छोटा-सा हिस्सा मस्तिष्क के निचले ‘सेरिबेलर पेंडुकल’ के भीतर स्थित है और अब तक इसे अनजाना माना जा रहा था। इस हिस्से को ‘रेस्टिफॉर्म बॉडी’ भी कहा जाता है। इस कारण इस हिस्से को ‘एंडोरेस्टिफॉर्म न्यूक्लियस’ नाम दिया गया है। प्रो. पेक्सिनोस के अनुसार, दिमाग में खोजे गए इस खास हिस्से को लेकर अभी शोध जारी है। यह मस्तिष्क के उस हिस्से में पाया गया है, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान और शरीर का संतुलन बनाने में मदद करता है। प्रो. पेक्सिनोस के मुताबिक, नया हिस्सा पार्किंसन और ‘मोटर न्यूरॉन’ जैसी बीमारियों के इलाज में मदद कर सकता है। पार्किंसन मस्तिष्क से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिसमें मरीज के शरीर में कंपन और अकड़न होती है। इससे उसे चलने और शारीरिक संतुलन बनाने में दिक्कत होती है। वहीं ‘मोटर न्यूरॉन’ में दिमाग से जुड़ी तंत्रिका कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं और व्यक्ति चल-फिर पाने की स्थिति में भी नहीं रह जाता। ‘एंडोरेस्टिफॉर्म न्यूक्लियस’ जैसी कोई भी संरचना बंदरों या दूसरे जानवरों में नहीं पाई गई है। चिंपांजी के मस्तिष्क का अध्ययन किया जा रहा है।

शोध के मुताबिक, ‘एंडोरेस्टिफॉर्म न्यूक्लियस’ कहा जा रहा दिमाग का हिस्सा ही दरअसल वह जगह है, जहां संगीत या आनंद की किसी स्थिति का सबसे ज्यादा असर होता है। यही कारण है कि पार्किंसंस के इलाज में संगीत को कारगर माना जा रहा है। प्रोफेसर पेक्सिनोस की टीम ने अमेरिका में आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं से संपर्क साधा है, जिसने एक चिकित्सीय गायन समूह के 17 प्रतिभागियों की दिल की धड़कन, खून के दबाव और कोर्टिसोल के स्तर को मापा। अपने इस शोध में वैज्ञानिकों ने यह देखा पार्किंसंस के लक्षण कम हुए हैं। शोधकर्ताओं ने इन प्रतिभागियों की उदासी, चिंता, खुशी और गुस्से के बारे में जानकारियां जुटाईं। उन्हें लगातार एक हफ्ते तक एक घंटे के गायन सत्र में भेजा गया। एक हफ्ते के बाद नतीजों का अध्ययन किया गया। सहायक प्रोफेसर एलिजाबेथ स्टीगमोलर के मुताबिक, दिल की धड़कन, खून के दबाव और कोर्टिसोल के स्तर में व्यापक सुधार दिखा। इस टीम ने अपने शोध में पाया कि पार्किंसंस से प्रभावित लोगों की मांसपेशियों में व्यापक सुधार दिखा।

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