अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 2026 के मौके पर देश के युवाओं और नौकरी की तलाश कर रहे फ्रेशर्स के लिए रोजगार बाजार से अच्छी खबर सामने आई है।टीमलीज एडटेक की करियर आउटलुक रिपोर्ट जुलाई-दिसंबर 2026 के मुताबिक, 2026 की दूसरी छमाही में भारत में 75 फीसदी नियोक्ता फ्रेशर्स को नौकरी देने की योजना बना रहे हैं। यह आंकड़ा पिछली छह महीने की अवधि के 73 फीसदी के मुकाबले बढ़ा है।
रिपोर्ट के लिए मई से जुलाई 2026 के बीच देशभर के 1,097 नियोक्ताओं से सर्वे किया गया। हालांकि, रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि फ्रेशर्स के लिए नौकरी के अवसर सभी सेक्टरों में समान नहीं हैं। कुछ उद्योगों में भर्ती का रुझान तेजी से बढ़ा है, जबकि कुछ पारंपरिक सेक्टरों में कंपनियां अपेक्षाकृत सतर्क नजर आ रही हैं।
इन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा फ्रेशर हायरिंग
फ्रेशर्स की भर्ती के मामले में ई-कॉमर्स और टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स तथा रिटेल सेक्टर 93-93 फीसदी हायरिंग इंटेंट के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग में 89 फीसदी, FMCG में 86 फीसदी और ट्रैवल एवं हॉस्पिटैलिटी में 81 फीसदी नियोक्ता फ्रेशर्स की भर्ती करने की योजना बना रहे हैं।
| सेक्टर | फ्रेशर हायरिंग इंटेंट |
| ई-कॉमर्स और टेक स्टार्टअप | 93% |
| रिटेल | 93% |
| मैन्युफैक्चरिंग | 89% |
| एफएमसीजी | 86% |
| ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी | 81% |
| आईटी | 76% |
ई-कॉमर्स और टेक स्टार्टअप्स में हायरिंग इंटेंट पहली छमाही के 90 फीसदी से बढ़कर 93 फीसदी हुआ है। रिटेल में यह 91 से 93 फीसदी और मैन्युफैक्चरिंग में 85 से 89 फीसदी पहुंचा है। FMCG में 80 से 86 फीसदी और ट्रैवल-हॉस्पिटैलिटी में 77 से 81 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
इस सेक्टर में घटा हायरिंग इंटेंट
आईटी सेक्टर में फ्रेशर्स के लिए 76 फीसदी हायरिंग इंटेंट दर्ज किया गया है। हालांकि, पिछली छमाही में यह 81 फीसदी था। यानी IT में फ्रेशर्स की मांग में 5 प्रतिशत अंक की कमी आई है।
इसी तरह कंसल्टिंग में हायरिंग इंटेंट 22 से घटकर 19 फीसदी, एजुकेशनल सर्विसेज में 23 से 21 फीसदी, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट में 54 से 52 फीसदी और मार्केटिंग एवं एडवरटाइजिंग में 62 से 59 फीसदी हुआ है। टेलीकॉम में भी यह 64 से घटकर 61 फीसदी रहा।
फ्रेशर्स के लिए कौन सी नौकरियां बढ़ रही हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेशर्स के लिए नौकरी के अवसर अब केवल पारंपरिक IT या सामान्य ग्रेजुएट भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। कंपनियां टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और डिजिटल कारोबार से जुड़ी भूमिकाओं में भी नए उम्मीदवारों की तलाश कर रही हैं।
फ्रेशर्स के लिए टॉप पांच जॉब रोल हैं:
AI एप्लीकेशन डेवलपर
जूनियर सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर
डेटा सेंटर ऑपरेशन्स एसोसिएट
प्रोग्रामैटिक एडवरटाइजिंग एसोसिएट
इन्वेंट्री और डिस्पैच एग्जीक्यूटिव
इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट, फुल-स्टैक डेवलपर, क्विक-कॉमर्स ऑपरेशंस एग्जीक्यूटिव, डिजिटल मीडिया एनालिस्ट, बायोमेडिकल इक्विपमेंट टेक्नीशियन, डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, डेटा रिसर्च एनालिस्ट, ऑटोमेशन एवं कंट्रोल्स इंजीनियर, सप्लाई चेन प्लानर और GIS एनालिस्ट जैसी भूमिकाओं में भी अवसर बताए गए हैं।
इस शहर में फ्रेशर्स के लिए सबसे ज्यादा अवसर
शहरों की बात करें तो बेंगलुरु 89 फीसदी हायरिंग इंटेंट के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मुंबई 75 फीसदी और चेन्नई 71 फीसदी पर है।
| शहर | फ्रेशर हायरिंग इंटेंट |
| बेंगलुरु | 89% |
| मुंबई | 75% |
| चेन्नई | 71% |
| हैदराबाद | 60% |
| दिल्ली | 49% |
| पुणे | 41% |
रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी छह प्रमुख शहरों में 2026 की दूसरी छमाही के लिए फ्रेशर हायरिंग इंटेंट पिछली छमाही की तुलना में बढ़ा है।
डिग्री से ज्यादा स्किल पर जोर
रिपोर्ट का एक अहम निष्कर्ष यह है कि कंपनियों का फोकस केवल उम्मीदवार की डिग्री पर नहीं, बल्कि उसकी प्रैक्टिकल स्किल और काम करने की क्षमता पर बढ़ रहा है। नियोक्ताओं की मांग वाली प्रमुख तकनीकी स्किल्स में फुल-स्टैक इंजीनियरिंग, क्लाउड सिक्योरिटी, बिजनेस एनालिटिक्स, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी, मशीन लर्निंग एवं प्रेडिक्टिव मॉडलिंग, बिग डेटा इंजीनियरिंग, सस्टेनेबिलिटी, परफॉर्मेंस मार्केटिंग एनालिटिक्स और सेमीकंडक्टर डिजाइन शामिल हैं।
वहीं, सॉफ्ट स्किल्स में जवाबदेही, बारीकियों पर ध्यान, क्रिटिकल थिंकिंग, वर्क एथिक्स और एडाप्टेबिलिटी को अहम माना गया है।
युवाओं के लिए क्या है इसका मतलब?
नौकरी बाजार के ये आंकड़े बताते हैं कि फ्रेशर्स के लिए अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं हो सकता। AI, डेटा, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, डिजिटल मार्केटिंग और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक कौशल विकसित करने वाले युवाओं को नए अवसरों का फायदा मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर रोजगार बाजार का यह संकेत युवाओं के लिए सकारात्मक है, लेकिन साथ ही यह भी बताता है कि आने वाले समय में योग्यता-आधारित हायरिंग से क्षमता-आधारित हायरिंग की ओर बदलाव तेज हो रहा है। यानी नौकरी पाने के लिए डिग्री के साथ यह दिखाना भी जरूरी होगा कि उम्मीदवार उस ज्ञान को वास्तविक काम में कैसे लागू कर सकता है।
