International Literacy Day 2026: हर साल 8 सितंबर को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस इस बार बेहद खास है। वर्ष 2026 में इस वैश्विक दिवस के 60 साल पूरे हो रहे हैं। छह दशकों में दुनिया की साक्षरता दर में बड़ा सुधार हुआ है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग आज भी बुनियादी पढ़ने-लिखने की क्षमता से वंचित हैं। यूनेस्को के अनुसार, दुनिया में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी की वयस्क साक्षरता दर 2024 में करीब 88 फीसदी पहुंच चुकी है। इसके बावजूद कम से कम 739 मिलियन यानी 73.9 करोड़ युवा और वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से दूर हैं।

यही वजह है कि विश्व साक्षरता दिवस सिर्फ पढ़ना-लिखना सीखने की बात नहीं करता, बल्कि शिक्षा, समान अवसर, सामाजिक भागीदारी, रोजगार और बेहतर भविष्य से भी जुड़ा है।

International Literacy Day 2026 क्यों है खास?

यूनेस्को ने 1966 में विश्व साक्षरता दिवस की घोषणा की थी और पहला अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर 1967 को मनाया गया था। 2026 में इस दिवस के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर UNESCO की ओर से 8 और 9 सितंबर 2026 को चियापास, मेक्सिको में वैश्विक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली पहलों को यूनेस्को इंटरनेशनल साक्षरता पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

International Literacy Day 2026 की थीम क्या है?

इस साल विश्व साक्षरता दिवस की थीम, “Literacy for people, the planet and prosperity” है, जिसका हिंदी में इसका अर्थ है- “लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता।”

यह थीम बताती है कि आज साक्षरता का अर्थ सिर्फ अक्षरों को पढ़ लेना या अपना नाम लिख लेना नहीं है। साक्षर व्यक्ति जानकारी को समझने, अपने फैसले लेने, समाज में भागीदारी करने और बेहतर आर्थिक अवसर हासिल करने में अधिक सक्षम होता है।

1950 में सिर्फ 56 फीसदी थी वैश्विक साक्षरता

आज दुनिया में वयस्क साक्षरता दर करीब 88 फीसदी है, लेकिन कुछ दशक पहले तस्वीर काफी अलग थी।

UNESCO के आंकड़ों के अनुसार:

यानी 1950 से 2024 के बीच वैश्विक वयस्क साक्षरता दर में करीब 32 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।

यह सुधार दुनिया में शिक्षा के विस्तार और स्कूलिंग तक बढ़ती पहुंच का बड़ा संकेत है। हालांकि, 73.9 करोड़ लोगों का अभी भी बुनियादी साक्षरता से दूर रहना बताता है कि सार्वभौमिक साक्षरता का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

इतने लोग आज भी बुनियादी साक्षरता से दूर

यूनेस्को के मुताबिक 2024 में दुनिया में कम से कम 739 मिलियन वयस्क बुनियादी साक्षरता कौशल से वंचित थे। इनमें करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं। इस आंकड़े को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि साक्षरता की कमी केवल परीक्षा या नौकरी की समस्या नहीं है। इसका असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है, जैसे किसी सरकारी सूचना को समझना, फॉर्म भरना, स्वास्थ्य संबंधी निर्देश पढ़ना, बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करना या डिजिटल जानकारी को समझना।

भारत में कितनी है साक्षरता दर?

भारत ने भी पिछले कुछ दशकों में साक्षरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। यूनेस्को के 2025 के आंकड़ों में भारत की साक्षरता दर को अपडेट कर 2024 में करीब 81 फीसदी किया गया था, जबकि 2023 के लिए यह आंकड़ा 77 फीसदी बताया गया था।

भारत के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय आंकड़ों में भी हाल के वर्षों में सुधार दिखाई देता है। PLFS 2023-24 के आधार पर भारत की साक्षरता दर 80.9 फीसदी बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में उम्र-समूह और डेटा-पद्धति के अंतर के कारण आंकड़े अलग हो सकते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तुलना करते समय संबंधित स्रोत की परिभाषा देखना जरूरी है।

साक्षरता सिर्फ पढ़ना-लिखना क्यों नहीं है?

आज के समय में साक्षरता का मतलब केवल किताब पढ़ लेना नहीं रह गया है। डिजिटल दुनिया में किसी व्यक्ति के लिए सूचना को समझना, उसकी विश्वसनीयता परखना और उसका सही इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण है।

उदाहरण के लिए, एक विद्यार्थी के लिए साक्षरता का अर्थ है, किताब और पाठ्य सामग्री को समझना, ऑनलाइन जानकारी को पढ़ना और उसका मूल्यांकन करना, डिजिटल फॉर्म भरना जरूरी सरकारी या शैक्षणिक सूचना समझना, वित्तीय और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पढ़ पाना, गलत सूचना और सही सूचना में अंतर करना और अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझना। इसीलिए यूनेस्को साक्षरता को शिक्षा और आजीवन सीखने की व्यापक प्रक्रिया से जोड़ता है।

युवा साक्षरता दर भी बढ़ी

युवाओं में साक्षरता की स्थिति वयस्क आबादी की तुलना में बेहतर है। यूनेस्को के अनुसार 2024 में वैश्विक यूथ लिटरेसी रेट करीब 93 फीसदी थी। यह इस बात का संकेत है कि शिक्षा तक पहुंच बढ़ने का फायदा युवा पीढ़ी को मिला है। लेकिन यहां भी चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। साक्षरता सीखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चे और युवा वास्तव में पढ़ने-समझने की बुनियादी क्षमता हासिल कर रहे हैं।

4 में से 1 बच्चा न्यूनतम पढ़ने में दक्षता से दूर

यूनेस्को के विश्व साक्षरता दिवस 2026 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में हर 10 में से करीब 4 बच्चे न्यूनतम पढ़ने की दक्षता तक नहीं पहुंच रहे हैं। इसके अलावा 2023 में करीब 272 मिलियन बच्चे और किशोर स्कूल से बाहर थे। इससे यह साफ है कि, सिर्फ स्कूल में दाखिला बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वास्तविक सीखने के परिणाम देना भी उतना ही जरूरी है।

साक्षरता और रोजगार का क्या संबंध है?

साक्षरता व्यक्ति को आगे की शिक्षा और कौशल हासिल करने के लिए आधार देती है। पढ़ने-लिखने की क्षमता होने से व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन, दस्तावेजों की समझ, डिजिटल सेवाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है।

विश्व साक्षरता दिवस 2026 की थीम में प्रोसपेरिटी यानी समृद्धि को शामिल करना इसी व्यापक संबंध की ओर इशारा करता है। साक्षरता व्यक्ति की क्षमता और अवसरों को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

साक्षरता और महिलाओं का संबंध

739 मिलियन वयस्कों के बुनियादी साक्षरता कौशल से दूर होने वालों में करीब दो-तिहाई महिलाएं हैं। इसलिए महिला साक्षरता में सुधार केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं है। इसका संबंध परिवार, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और सामाजिक निर्णयों में महिलाओं की भूमिका से भी जुड़ता है।

International Literacy Day का इतिहास

विश्व साक्षरता दिवस की शुरुआत यूनेस्को की पहल से हुई, जिसमें 1966 में यूनेस्को ने विश्व साक्षरता दिवस की घोषणा की और 8 सितंबर 1967 को पहली बार विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया है। 2026 में इस वैश्विक दिवस के 60 वर्ष पूरे हुए है। इस दिवस का उद्देश्य दुनिया का ध्यान साक्षरता के महत्व और उन लोगों की ओर आकर्षित करना है जो अभी भी बुनियादी पढ़ने-लिखने के अवसरों से वंचित हैं।

छात्रों के लिए विश्व साक्षरता दिवस का महत्व

विद्यार्थियों के लिए यह दिन सिर्फ स्कूल में भाषण या निबंध प्रतियोगिता तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह दिन छात्रों को यह समझने का अवसर देता है कि शिक्षा मिलने का मतलब केवल परीक्षा पास करना नहीं है। पढ़ने की आदत, सवाल पूछना, जानकारी को समझना और उसका सही इस्तेमाल करना भी शिक्षा का हिस्सा है।