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योगगुरू रामदेव छात्रों को देंगे वेदों की शिक्षा, अगले सत्र से शुरू हो रहा है देश का पहला वैदिक शिक्षा बोर्ड

बोर्ड का मुख्‍यालय फिलहाल पतंजलि योगपीठ में है जिसे जल्‍द ही देश की राजधानी दिल्‍ली में शिफ्ट किया जाएगा।

Author Updated: August 19, 2019 6:08 PM
बाबा रामदेव (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश के पहले वैदिक शिक्षा बोर्ड पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का विचार पूरा हो चुका है और अब अगले सत्र से ही यह शिक्षा बोर्ड देश भर के स्‍कूल कॉलेजों में काम शुरू करेगा। बोर्ड के निदेशन मंडल का चयन भी पूरा हो चुका है तथा योग गुरू रामदेव इस बोर्ड के आजीवन अध्‍यक्ष रहेंगे। वैदिक शिक्षा बोर्ड, आगामी सत्र से ही लागू होने जा रहा है। बोर्ड अब अन्‍य शिक्षा बोर्डों की तरह ही स्‍कूल कॉलेजों से जुड़कर पढ़ाई कराएगा। बोर्ड का सिलेबस भी तैयार कर लिया गया है।

ज्ञात हो कि रामदेव पहले ही देश में प्राचीन और अर्वाचीन शिक्षा पद्यति के प्रचार प्रसार के लिए 8वीं कक्षा तक के लिए आचार्यकुलम की स्‍थापना कर चुके हैं। योजना थी कि इसी कार्यकुलम को आगे की कक्षाओं के लिए भी आगे बढ़ाया जाए मगर बाद में 8वीं से आगे की कक्षाओं के लिए अलग से शिक्षा बोर्ड का ढांचा तैयार कर मानव संसाधन मंत्रालय के सामने सौंपा गया। इस बोर्ड से सम्‍बद्ध स्‍कूल/कॉलेजों में वैदिक और आधुनिक शिक्षा एक साथ दी जाएगी।

बोर्ड का मुख्‍यालय फिलहाल पतंजलि योगपीठ में है जिसे जल्‍द ही देश की राजधानी दिल्‍ली में शिफ्ट किया जाएगा। संबद्ध विद्यालयों में वेदों की शिक्षा भी दी जाएगी जो देश में इस प्रकार का पहला प्रयास है। CBSE बोर्ड द्वारा जितने भी पाठ्यक्रम वर्तमान में मान्य हैं, उन सभी को वैदिक शिक्षा बोर्ड में शामिल किया जाएगा।

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