Indian Students Abroad 2025 30% decline in 3 years: भारत से उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में पिछले तीन वर्षों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 9.08 लाख भारतीय छात्र विदेश पढ़ने गए थे। यह संख्या 2024 में घटकर 7.7 लाख और 2025 में 6.26 लाख रह गई। इस तरह 2023 से 2025 के बीच लगभग 31 प्रतिशत की कुल गिरावट दर्ज की गई है। ये आंकड़े गृह मंत्रालय के अंतर्गत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन द्वारा संकलित किए गए हैं और उन छात्रों पर आधारित हैं जिन्होंने यात्रा का उद्देश्य “study/education” बताया।

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

राज्यसभा में लिखित प्रश्न के जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि विदेश में पढ़ाई करना “व्यक्ति की इच्छा और चयन” पर निर्भर करता है। इसमें मुख्य रूप से ये कारक प्रभाव डालते हैं:

पढ़ाई का खर्च और वहन क्षमता

बैंक लोन की उपलब्धता

विदेशी समाज और शिक्षा प्रणाली का आकर्षण

विशेष विषयों में विशेषज्ञता

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार वैश्विक कार्यस्थल में भारतीय प्रतिभा को संपत्ति मानती है।

गिरावट के पीछे क्या कारण हैं?

हालांकि संसद में किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय बदलाव इस गिरावट को समझने में मदद करते हैं।

वीजा नियमों में सख्ती

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों ने पिछले दो वर्षों में, वित्तीय प्रमाण की राशि बढ़ाई और स्टडी वीजा श्रेणियों पर कैप लगाए साथ ही पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट में बदलाव करने के साथ संस्थानों की सख्त जांच शुरू की।

कनाडा में स्टडी परमिट की संख्या सीमित करने और बढ़ती जीवन-यापन लागत ने दाखिलों को प्रभावित किया है। वहीं अमेरिका में H-1B वीज़ा और टेक सेक्टर की धीमी भर्ती ने छात्रों की धारणा बदली है।

बढ़ती फीस और रुपये की कमजोरी

पश्चिमी देशों में ट्यूशन फीस लगातार बढ़ी है, जिसके साथ रुपये के मुकाबले डॉलर और पाउंड मजबूत हुए हैं और छात्रों के रहने, बीमा और यात्रा खर्च में वृद्धि हुई है। परिवार अब कुल निवेश बनाम संभावित आय का आकलन अधिक सावधानी से कर रहे हैं।

भारत में बेहतर हो रहा उच्च शिक्षा ढांचा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत:

इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार

रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा

मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम

इंटरडिसिप्लिनरी कोर्स

सरकार का दावा है कि भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।

विदेशी विश्वविद्यालय अब भारत में

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 14 विदेशी संस्थानों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी दी गई है, जिसमें GIFT City (गुजरात) में 5 विदेशी विश्वविद्यालय संचालन की अनुमति भी शामिल है। यूनिवर्सिटी ऑफ सरे जैसे संस्थान भारत में उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में, जिससे छात्रों को बिना विदेश जाए अंतरराष्ट्रीय डिग्री हासिल करने का विकल्प मिल रहा है।

क्या छात्र नए देशों की ओर रुख कर रहे हैं?

हां, ट्र्रेंड में बदलाव देखा जा रहा है। अब छात्र केवल US, UK, Canada, Australia तक सीमित नहीं हैं। वे जर्मनी (कम ट्यूशन फीस, आयरलैंड (टेक जॉब अवसर), फ्रांस (अंग्रेज़ी माध्यम कोर्स), सिंगापुर और एशियाई देश जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। छात्र अब अधिक रणनीतिक निर्णय ले रहे हैं, जिसमें वे वीजा स्थिरता, नौकरी के अवसर और स्थायी निवास की संभावनाओं की तुलना कर रहे हैं।

क्या यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि वीज़ा नियम और कड़े होते हैं तो गिरावट जारी रह सकती है। भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने से आउटबाउंड संख्या और घट सकती है लेकिन ग्लोबल एक्सपोजर की मांग पूरी तरह खत्म नहीं होगी। भारत विश्व में सबसे बड़ा छात्र आउटबाउंड बाजार रहा है और भविष्य में भी रहेगा, लेकिन पैटर्न बदल सकता है।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में

Indian Students Abroad 2025 FAQ

Q1. विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कितनी गिरावट आई है?

A. 2023 से 2025 के बीच लगभग 31% की गिरावट दर्ज की गई है।

Q2. गिरावट का मुख्य कारण क्या है?

A. वीजा नियमों में सख्ती, बढ़ती फीस, आर्थिक अनिश्चितता और भारत में बेहतर शिक्षा विकल्प प्रमुख कारण हैं।

Q3. क्या भारत में विदेशी विश्वविद्यालय खुल रहे हैं?

A. हां, 14 विदेशी संस्थानों को मंजूरी मिली है और GIFT City में 5 विदेशी विश्वविद्यालयों को संचालन की अनुमति दी गई है।

Q4. क्या छात्र अब अन्य देशों को चुन रहे हैं?

A. हां, जर्मनी, आयरलैंड, फ्रांस और एशियाई देशों की लोकप्रियता बढ़ रही है।

Q5. क्या NEP 2020 का असर पड़ा है?

A. सरकार का मानना है कि NEP 2020 के तहत सुधारों ने भारतीय संस्थानों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है।

Jansatta Education Expert Conclusion

विदेश में पढ़ाई का सपना अभी भी लाखों भारतीय छात्रों के लिए आकर्षक है, लेकिन बदलते वैश्विक नियम, बढ़ती लागत और भारत में शिक्षा के बेहतर विकल्पों ने इस प्रवृत्ति को प्रभावित किया है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों का विस्तार इस गिरावट को और तेज करता है या छात्र नए अंतरराष्ट्रीय अवसरों की तलाश में नए देशों की ओर रुख करते हैं।