नीट पेपर लीक को लेकर सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में देशभर से स्टूडेंट्स शामिल हो रहे हैं। क्या स्कूल और क्या कॉलेज हर उम्र का छात्र CJP के प्रोटेस्ट में नजर आ चुका है, लेकिन इस बीच आईआईटी रुड़की ने अपने छात्रों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा गया है कि अभी चल रहे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन में छात्र और स्टाफ का कोई भी कर्मचारी अपना समर्थन न दिखाए। आईआईटी रुड़की ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि छात्र इंस्टीट्यूट की इजाजत के बिना किसी पॉलिटिकल चर्चा या किसी एक्टिविटी में शामिल न हों और न ही कोई बयानबाजी करें।
सोशल मीडिया पर आंदोलन को सपोर्ट कर रहे थे कुछ छात्र
संस्थान की ओर से 20 जुलाई को भेजे गए एक ईमेल में स्टाफ और स्टूडेंट्स से कहा गया है कि इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ स्टूडेंट्स ने अपनी बात कहने और अभी चल रहे पॉलिटिकल मूवमेंट्स के प्रति अपना लगाव दिखाया है। सर्कुलर में कहा गया है कि सभी स्टूडेंट्स, एम्प्लॉइज, स्टेक होल्डर्स को प्यार से यह याद दिलाया जाता है कि IIT ने स्टूडेंट्स या स्टाफ को इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, साइंस और आर्ट्स में इंस्ट्रक्शन, रिसर्च और लर्निंग को आगे बढ़ाने और ज्ञान फैलाने के लिए एडमिशन दिया है। नोटिफाइड कंडक्ट रूल्स में यह लिखा है कि किसी भी स्टूडेंट या एम्प्लॉई को इंस्टिट्यूट की पहले से परमिशन के बिना पॉलिटिकल डिस्कशन में शामिल होने या किसी भी पॉलिटिकल एक्टिविटी में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
CJP प्रोटेस्ट को लेकर था संस्थान का यह सर्कुलर?
बता दें कि आईआईटी रुड़की का यह फरमान जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें देशभर से छात्र शामिल हो रहे हैं। हालांकि संस्थान के मेल में CJP का कहीं नाम शामिल नहीं था। सोमवार को तो यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया था। इस मार्च में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया जिसमें कई स्टूडेंट्स को चोटें आईं। कभी पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसी मार्च को लेकर आईआईटी रुड़की ने सर्कुलर जारी किया था।
‘मीडिया में कोई बयान नहीं देगा’
सर्कुलर में कहा गया कि संस्थान का कोई भी स्टूडेंट और स्टाफ का सदस्य किसी ब्रॉडकास्ट/टेलीकास्ट या किसी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोई भी पब्लिक स्टेटमेंट नहीं देगा, किसी को भी इसकी इजाजत नहीं है। संस्थान ने कहा है कि इससे इंस्टिट्यूट और सेंट्रल गवर्नमेंट या किसी दूसरे ऑर्गनाइजेशन या पब्लिक मेंबर्स के बीच रिश्ते खराब हो सकते हैं।
