आईआईटी रुड़की ने जेईई एडवांस्ड स्टूडेंट्स की जानकारी लीक होने के मामले में एक अहम जानकारी साझा की है। संस्थान की ओर से कहा गया है कि सोशल मीडिया पर यह दावे किए जा रहे हैं कि डेटा ब्रीच से लाखों JEE एडवांस्ड स्टूडेंट्स की निजी जानकारी लीक हो गई है, लेकिन IIT रुड़की इन दावों को खारिज करता है। संस्थान ने कहा है कि ऐसे दावे छात्रों को गुमराह करने के लिए किए जा रहे हैं जो कि गलत है। इंस्टीट्यूट ने एग्जामिनेशन सिस्टम में लोगों का भरोसा जानबूझकर कम करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी है।
डेटा लीक का रिजल्ट पर नहीं पड़ेगा कोई असर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर IIT रुड़की ने एक पोस्ट के जरिए ये माना कि 2 जून को क्लाउड स्टोरेज कंपोनेंट में एक टेम्पररी मिसकॉन्फिगरेशन हुआ था, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी तुरंत ही पता चल गई थी। इसके बाद हमने इसे तुरंत ठीक कर दिया था। आईआईटी रुड़की ने इस बात से इनकार किया कि कोई भी सेंसिटिव डेटा बड़े पैमाने पर निकाला गया था या एग्जाम के नतीजों पर किसी भी तरह का कोई असर पड़ेगा। संस्थान ने साफ कर दिया है कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा।
क्या कहा है आईआईटी रुड़की ने?
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आईआईटी रुड़की ने लिखा है, “लाखों JEE (एडवांस्ड) कैंडिडेट्स पर असर डालने वाले डेटा ब्रीच और प्राइवेसी वायलेशन के दावे गुमराह करने वाले हैं। सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी गुमराह करने वाली है और जो हुआ उसे सही तरह से नहीं दिखाती है। गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है, जो सच्चाई से कोसों दूर है।”
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संस्थान ने आगे लिखा है, “2 जून 2026 को एडमिट कार्ड डेटा एक्सेस करने में मुश्किलों का सामना कर रहे कैंडिडेट्स की मदद करने और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसानी से चलाने के लिए कुछ टेक्निकल दखल संस्थान की ओर से दिए गए थे। उसी प्रक्रिया के दौरान क्लाउड स्टोरेज कंपोनेंट में थोड़ी, टेम्पररी गलत कॉन्फिगरेशन हुई। एक एथिकल हैकर राइलन अनिल ने इस गलत कॉन्फिगरेशन को पहचाना और इसकी जानकारी हम तक पहुंचाई। इस समस्या को तुरंत ठीक कर दिया गया और डेटा तक एक्सेस रोक दिया गया।”
‘रिजल्ट पर नहीं पड़ेगा कोई असर’
संस्थान ने आगे कहा है कि जिस स्टोरेज पर असर पड़ा था वह रीड ओनली था, जिसका मतलब है कि कोई भी डेटा एडिट या डिलीट नहीं किया जा सकता। क्लाउड एक्सेस लॉग के एनालिसिस से यह कन्फर्म हुआ कि कोई बल्क डाउनलोड नहीं हुआ (रीड-ओनली एक्सेस डेटा के 0.05% से भी कम तक सीमित था)। कोई भी सेंसिटिव जानकारी कॉम्प्रोमाइज नहीं हुई या बड़े पैमाने पर निकाली नहीं गई। इस घटना का एग्जाम के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा, जिसमें कैंडिडेट्स के मार्क्स, रैंक और कैटेगरी शामिल हैं।
