केंद्र सरकार द्वारा भारत में टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी ने टेलीग्राम की एक ऐसी तकनीकी कमजोरी की ओर इशारा किया है, जिसे उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद खतरनाक बताया है।
सरकार ने टेलीग्राम की सेवाओं को 22 जून तक ब्लॉक करने और भारतीय यूजर्स के लिए मैसेज एडिटिंग फीचर को 30 जून तक बंद करने का निर्देश दिया है। यह कदम नीट यूजी 2026 परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और फर्जी सूचनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
क्या है टेलीग्राम की कथित कमजोरी?
वी. कामकोटी के अनुसार टेलीग्राम पर भेजे गए मैसेज को बाद में एडिट किया जा सकता है लेकिन उसका मूल टाइमस्टैम्प नहीं बदलता। इसका मतलब है कि किसी संदेश की सामग्री बाद में बदली जा सकती है, जबकि देखने वालों को लगेगा कि वही जानकारी पहले से मौजूद थी।
उन्होंने कहा कि इस फीचर का दुरुपयोग करके परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने का झूठा दावा किया जा सकता है और छात्रों के बीच भ्रम तथा घबराहट फैलाई जा सकती है।
PDF फाइल को भी बदला जा सकता है
आईआईटी मद्रास निदेशक ने एक डेमो वीडियो में दिखाया कि टेलीग्राम पर भेजी गई पीडीएफ फाइल को बाद में दूसरी फाइल से रिप्लेस किया जा सकता है, जबकि पुराना टाइमस्टैम्प बरकरार रहता है। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति पहले सामान्य दस्तावेज भेजे और बाद में उसे कथित प्रश्नपत्र से बदल दे, तो ऐसा प्रतीत हो सकता है कि प्रश्नपत्र पहले ही साझा कर दिया गया था।
पहले इन परीक्षाओं में सामने आ चुकी है समस्या
कामकोटी ने कहा कि इसी प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल पहले जेईई एडवांस्ड और आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट जैसी परीक्षाओं के दौरान भ्रम फैलाने के लिए किया गया था। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कथित पेपर लीक सामग्री पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही सही मानें।
एनटीए ने भी किया फैसले का समर्थन
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने भी टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का समर्थन किया है। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि भले ही कुछ लोग वीपीएन के जरिए प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना सकते हैं लेकिन प्रतिबंध से फर्जी खबरें, अफवाहें और कथित पेपर लीक सामग्री फैलाने वाले नेटवर्क की पहुंच काफी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा से पहले फैलने वाली गलत सूचनाएं लाखों छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
NEET 2026 री-टेस्ट से पहले सख्ती
यह कार्रवाई नीट यूजी 2026 री- एग्जाम से कुछ दिन पहले की गई है। सरकार और जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि परीक्षा से पहले किसी भी प्रकार की अफवाह, फर्जी पेपर लीक या गलत सूचना छात्रों तक न पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसी तकनीकी सुविधाओं का दुरुपयोग प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
