IIT Bombay PhD: देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) ने पीएचडी कार्यक्रम को लेकर बड़ा बदलाव किया है। संस्थान ने नए पीएचडी रजिस्ट्रेशन के लिए कार्यक्रम पूरा करने की अधिकतम अवधि 8 साल तय कर दी है। यह फैसला उन मामलों की समीक्षा के बाद लिया गया, जिनमें कुछ शोधार्थियों की पीएचडी 10 साल से भी ज्यादा समय तक लंबित रही थी।

संस्थान के इस कदम का उद्देश्य पीएचडी पूरी करने में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना और शोधार्थियों को तय समयसीमा के भीतर अपना शोध पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

क्यों लिया IIT Bombay ने 8 साल का फैसला?

IIT Bombay ने लंबे समय से लंबित पीएचडी मामलों की समीक्षा की। इस दौरान सामने आया कि कुछ शोधार्थियों की डिग्री एक दशक से अधिक समय तक पूरी नहीं हो पाई थी। संस्थान के निदेशक Shireesh Kedare के अनुसार, पीएचडी में देरी के पीछे कई कारण रहे हैं।

इनमें शोध पर्यवेक्षकों का दूसरे प्रोजेक्ट में व्यस्त होना, शोधार्थियों का दूसरी नौकरियों या कार्यों में चले जाना और बाहरी उम्मीदवारों का अपने करियर में आगे बढ़ जाना शामिल है। कोविड-19 महामारी के कारण भी कई शोध कार्य प्रभावित हुए। इसी समीक्षा के बाद नए रजिस्ट्रेशन के लिए अधिकतम अवधि निर्धारित करने का फैसला किया गया।

पहले कितने समय तक चल सकती थी PhD?

आईआईटी बॉम्बे के मौजूदा पीएचडी नियमों के अनुसार सामान्य पीएचडी और मास्टर्स+पीएचडी विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन अधिकतम 8 साल तक बढ़ाया जा सकता है। एक्सटर्नल और कॉलेज टीचर श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए यह सीमा 10 साल तक है। निर्धारित अधिकतम अवधि पूरी होने पर रजिस्ट्रेशन स्वतः रद्द किए जाने का प्रावधान है।

इसलिए 8 साल की सीमा को केवल समय कम करने के फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह संस्थान के मौजूदा नियमों में तय अधिकतम सीमा को नए पीएचडी रजिस्ट्रेशन पर स्पष्ट रूप से लागू करने की दिशा में कदम है।

IIT Bombay में रिकॉर्ड 620 PhD डिग्रियां

इस फैसले के साथ आईआईटी बॉम्बे ने 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में रिकॉर्ड संख्या में पीएचडी डिग्रियां प्रदान की हैं। संस्थान ने इस साल 620 पीएचडी डिग्रियां प्रदान कीं, जो आईआईटी बॉम्बे के इतिहास में सबसे अधिक हैं। यह पहली बार है जब संस्थान ने एक वर्ष में 600 से ज्यादा पीएचडी डिग्रियां दी हैं।

इससे पहले आईआईटी बॉम्बे किसी एक साल में 500 से ज्यादा PhD डिग्रियां प्रदान नहीं कर पाया था। लंबित शोध कार्यों को पूरा कराने और बैकलॉग कम करने के प्रयासों का भी इस रिकॉर्ड में योगदान रहा।

किन विषयों में सबसे ज्यादा PhD डिग्रियां?

2025-26 में प्रदान की गई 620 पीएचडी डिग्रियों में अलग-अलग विभागों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जो इस प्रकार है।

केमिकल इंजीनियरिंग: 77 PhD

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: 62 PhD

मैकेनिकल इंजीनियरिंग: 49 PhD

ह्यूमैनिटीज: 40 PhD

IIT Bombay Convocation में 3,763 डिग्रियां

आईआईटी बॉम्बे के 64वें दीक्षांत समारोह में कुल 3,763 डिग्रियां प्रदान की जा रही हैं। ये डिग्रियां कुल 3,442 विद्यार्थियों को दी गईं, जिसकी जानकारी इस प्रकार है।

इस बैच में 791 छात्राएं और 2,651 छात्र शामिल हैं।

PhD छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

नए पीएचडी शोधार्थियों के लिए आठ साल की अधिकतम सीमा का मतलब है कि शोध, प्रयोग, डेटा विश्लेषण, थीसिस लेखन और अन्य अकादमिक आवश्यकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।

इस फैसले से संस्थान को लंबे समय से लंबित शोध मामलों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वहीं शोधार्थियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने सुपरवाइजर के साथ रिसर्च टाइमलाइन पहले से तय करें और शोध के अलग-अलग चरणों को समय पर पूरा करें।

IIT Bombay की आधिकारिक जानकारी के अनुसार PhD विद्यार्थियों की Teaching Assistantship अधिकतम पांच साल या थीसिस जमा करने तक, जो भी पहले हो, उपलब्ध होती है।

IIT Bombay का एक और अहम बदलाव

इसी दीक्षांत समारोह में संस्थान ने चार वर्षीय BTech कार्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए तीन वर्षीय Bachelor of Science (BS) डिग्री के early-exit विकल्प की जानकारी भी साझा की। आवश्यक क्रेडिट पूरा करने वाले विद्यार्थी चार साल की BTech डिग्री पूरी किए बिना BS डिग्री के साथ बाहर निकल सकते हैं। संस्थान के अनुसार यह विकल्प उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकता है जो स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं या किसी कारण से चार वर्षीय कार्यक्रम पूरा नहीं कर पाते।