भारत में ऊर्जा परिवर्तन से लेकर टेक्नोलॉजी के भविष्य तक कई बड़े सवालों के बीच इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे ने अहम बातें रखी हैं। उन्होंने साफ किया कि देश का एनर्जी ट्रांजिशन केवल इरादों से नहीं, बल्कि मजबूत स्थितियों से तय होगा। साथ ही, तेजी से बदलते दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी उन्होंने बड़ा संदेश दिया कि, AI से IIT स्टूडेंट्स को खतरा नहीं, बल्कि जो इसे समझेगा और अपनाएगा वही आगे बढ़ेगा।

The Indian Express के Idea Exchange में आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे ने एआई से लेकर टेक्नोलॉजी तक तमाम विषयों पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया और अपनी राय रखी जिसकी पूरी रिपोर्ट नीचे दी गई है।

नीति से तय होगा एनर्जी ट्रांजिशन

केदारे के अनुसार, किसी भी बदलाव के लिए तीन चीजें जरूरी हैं, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक स्थिरता, सामाजिक स्थिरता। उन्होंने कहा कि उद्योग तभी नई तकनीक अपनाएगा जब वह आर्थिक रूप से फायदेमंद हो। यही कारण है कि पॉलिसी सबसे अहम भूमिका निभाती है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क में कार्बन उत्सर्जन पर जुर्माना लगाया जाता है, जिससे कंपनियों को क्लीन एनर्जी अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी में क्या हैं चुनौतियां

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500GW रिन्यूएबल एनर्जी हासिल करना है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां हैं, जिसमें मुख्य रूप से सोलर PV पर ज्यादा निर्भरता, आयात पर निर्भरता
नई तकनीकों पर कम सब्सिडी, जागरूकता की कमी शामिल हैं।

केदारे ने कहा कि केवल सोलर ही नहीं, बल्कि विंड एनर्जी, बायोमास और वेस्ट-टू-एनर्जी भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

AI से IIT छात्रों को खतरा नहीं

AI को लेकर बढ़ती चिंता पर उन्होंने साफ कहा कि, “जो AI को समझेगा, वही आगे रहेगा।” इसके लिए सिर्फ कोडिंग जानने वाले छात्रों को खुद को अपग्रेड करना होगा क्योंकि AI डेवलपमेंट, डेटा मैनेजमेंट और वेलिडेशन में बड़े अवसर हैं, जिससे आईआईटी ग्रेजुएट्स के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी।

IIT छात्रों पर बढ़ा दबाव

केदारे ने माना कि IIT में पढ़ने वाले छात्रों पर दबाव बढ़ा है, जिसमें पैरेंट्स और सोसाइटी की अपेक्षाएं, प्लेसमेंट पैकेज की तुलना और सोशल मीडिया का प्रभाव मुख्य कारणों में गिने जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र सिर्फ “ब्रांड IIT” के लिए आते हैं, सीखने के लिए नहीं।

कोचिंग कल्चर पर क्या बोले

कोचिंग के विषय पर केदारे ने कहा कि, कोचिंग छात्रों को “एग्जाम क्रैक” करना सिखाती है लेकिन IIT में “कंसेप्ट और लॉजिक” जरूरी होता है और यही अंतर कई छात्रों के लिए मुश्किल बन जाता है।

कैंपस में भेदभाव पर क्या कहा

कास्ट आधारित भेदभाव पर केदारे ने कहा, रोजमर्रा के जीवन में सिस्टमेटिक भेदभाव का कोई बड़ा पैटर्न नहीं बल्कि अलग-अलग बैकग्राउंड से आने वाले छात्रों को एडजस्ट करना पड़ता है। इसे देखते हुए संस्थान ने सपोर्ट सिस्टम मजबूत किए हैं।

इंटरनेशनल रैंकिंग और विदेशी छात्रों पर नजर

आईआईटी में विदेशी छात्रों और फैकल्टी को लेकर उन्होंने कहा कि, कुछ विदेशी फैकल्टी पहले से मौजूद हैं, जिसकी वजह साउथ-ईस्ट एशिया से छात्रों को आकर्षित करने की योजना और रैंकिंग से ज्यादा जरूरी रिसर्च और उसका इम्पैक्ट है।

JEE में बदलाव की तैयारी

संयुक्त प्रवेश परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसके अनुसार जेईई मे कई बड़े बदलावों की तैयारी की जा रही है, जो इस प्रकार हैं।

एमसीक्यू पर निर्भरता कम की जाएगी

न्यूमेरिकल और एप्लिकेशन बेस्ड सवाल बढ़ेंगे

AI आधारित मूल्यांकन भविष्य में संभव

द इंडियन एक्सप्रेस आइडिया एक्सचेंज में आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे का पूरा इंटरव्यू पढ़ने के लिए इस Link पर क्लिक करें।