भारतीय प्रबंधन संस्थान नागपुर (IIM Nagpur) में छात्रों ने प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में मिड-टर्म परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। जानकारी के अनुसार, 40 से अधिक छात्रों को कथित तौर पर बिना अनुमति रातभर कैंपस से बाहर रहने के कारण 24 और 25 फरवरी 2026 को होने वाली मिड-टर्म परीक्षाओं से वंचित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के विरोध में लगभग 60 छात्रों ने एकजुटता दिखाते हुए परीक्षा में शामिल न होने का फैसला किया।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि 21 फरवरी की रात करीब 75 छात्र-छात्राएं डिनर के लिए कैंपस से बाहर गए थे। छात्रों के अनुसार, दो कैंपस क्लबों ने प्रशासन को देर से लौटने की जानकारी दी थी। हालांकि, जब छात्र सुबह कैंपस लौटे तो उन्हें गेट पर रोक लिया गया। इस समूह में प्रथम वर्ष और सीनियर दोनों बैच के छात्र शामिल थे।

अगले दिन कई छात्रों को “IIMN MBA Barred from appearing in Mid Term Examinations 24th and 25th Feb 2026” शीर्षक से ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें उन्हें परीक्षा से डिबार किए जाने की सूचना दी गई।

‘फेयरवेल जैसा अनौपचारिक कार्यक्रम था’

छात्रों का कहना है कि यह कोई औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि अंतिम क्लास के बाद एक तरह का अनौपचारिक मिलन या फेयरवेल था। एक छात्र ने कहा, “हमारे MBA के केवल सात-आठ दिन ही बचे हैं। यह हमारी आखिरी क्लास थी। कुछ छात्रों ने संस्थान को सूचना दी थी, फिर भी सभी को सुबह गेट पर रोक लिया गया।”

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्राओं के अभिभावकों को फोन कर उनसे ‘रूखे तरीके’ से बात की गई।

सीनियर छात्रों ने भी दिया समर्थन

प्रथम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने के बाद सीनियर छात्रों ने उनके समर्थन में परीक्षा का बहिष्कार करने का निर्णय लिया, जिसके बाद 60 से अधिक छात्र मिड-टर्म परीक्षा में शामिल नहीं हुए। छात्रों का कहना है कि मिड-टर्म परीक्षा का कुल मूल्यांकन में महत्वपूर्ण योगदान होता है, इसलिए यह कार्रवाई उनके अकादमिक भविष्य को प्रभावित कर सकती थी।

एक छात्र ने कहा, “हम प्रोफेशनल कोर्स के छात्र हैं, बच्चे नहीं। कभी-कभी क्लास रात 11 बजे खत्म होती है और हम थोड़ी देर टहलने के लिए बाहर चले जाते हैं। हमारे साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।”

निलंबन और पदों से हटाने का आरोप

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना में शामिल कुछ छात्रों को MBA प्रोग्राम से निलंबित कर दिया गया और उन्हें ‘पोजिशन ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी’ से हटा दिया गया। सोशल मीडिया पर भी कुछ छात्रों ने सवाल उठाया कि क्या 2026 में MBA छात्रों की ‘मोरल पुलिसिंग’ उचित है?

संस्थान का पक्ष

संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित छात्र बिना पूर्व अनुमति के पूरी रात कैंपस से बाहर रहे, जिसके चलते संस्थान को ये कदम उठाना पड़ा। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया, “संस्थान के नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी छात्रों को कैंपस छोड़ने से पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य है। यह नियम छात्रों की सुरक्षा, कल्याण और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। इनका उल्लंघन गंभीर विषय है।”

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन छात्रों को फिलहाल परीक्षा से रोका गया है, उन्हें बाद में परीक्षा देने का अवसर दिया जाएगा।