इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट इंदौर (IIM Indore) ने अपने दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (PGP) 2026-28 के लिए एडमिशन पॉलिसी जारी कर दी है। प्रवेश प्रक्रिया तीन चरणों में होगी, जिसमें CAT 2025 स्कोर, क्लास 10 व 12 के अंक, वर्क एक्सपीरियंस और पर्सनल इंटरव्यू (PI) में प्रदर्शन प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

IIM Indore Admission 2026: कैट कट-ऑफ

प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को CAT 2025 में सेक्शनल और ओवरऑल कट-ऑफ क्लियर करनी होगी, जिसकी जानकारी इस प्रकार है।

श्रेणीवार CAT 2025 न्यूनतम कट-ऑफ

General/EWS: ओवरऑल 90 पर्सेंटाइल, सेक्शनल 80 पर्सेंटाइल

NC-OBC: ओवरऑल 80 पर्सेंटाइल

SC: 60 पर्सेंटाइल

ST: 45 पर्सेंटाइल

PwD: 45 पर्सेंटाइल

पहला चरण: शॉर्टलिस्टिंग के लिए वेटेज

IIM Indore ने इस बार भी क्लास 12 के अंकों को अधिक महत्व दिया है। शॉर्टलिस्टिंग स्कोर में शामिल वेटेज इस प्रकार है।

CAT 2025 सेक्शनल स्कोर – 55%

क्लास 12 अंक – 25%

क्लास 10 अंक – 10%

वर्क एक्सपीरियंस – 3%

डाइवर्सिटी फैक्टर – 7 मार्क्स

शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को जनवरी 2026 में सूचना भेजी जाएगी।

इंटरव्यू कहां होंगे?

IIM इंदौर इंटरव्यू ऑफलाइन मोड में सात शहरों में आयोजित करेगा जिसमें, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता और मुंबई शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन इंटरव्यू की व्यवस्था भी की जा सकती है।

दूसरा चरण: फाइनल सिलेक्शन में क्या होगा महत्वपूर्ण?

फाइनल सिलेक्शन में पर्सनल इंटरव्यू (PI) सबसे निर्णायक कारक है।

फाइनल कंपोजिट स्कोर में वेटेज

पर्सनल इंटरव्यू – 45%

CAT 2025 सेक्शनल स्कोर – 40%

क्लास 10 अंक – 5%

क्लास 12 अंक – 5%

डाइवर्सिटी फैक्टर – 5 मार्क्स

IIM Indore ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम कट-ऑफ क्लियर करने से ही कॉल की गारंटी नहीं मिलती। PI में न्यूनतम आवश्यक स्कोर न पाने पर उम्मीदवार डिसक्वालिफाई भी हो सकता है।

आरक्षण नीति और COVID प्रभावित छात्रों के लिए राहत

IIM इंदौर केंद्र सरकार की आरक्षण नीति का पालन करेगा, जिसकी जानकारी इस प्रकार है।

NC-OBC – 27%

SC – 15%

ST – 7.5%

EWS – 10% तक

PwD – 5%

जिन छात्रों के क्लास 10 या 12 के अंक COVID-19 मूल्यांकन नीति से प्रभावित हुए हैं, उनके अंकों का वेटेज CAT स्कोर और उपलब्ध बोर्ड मार्क्स में आनुपातिक रूप से पुनर्वितरित किया जाएगा।

संभावित बदलाव

संस्थान ने कहा है कि सरकारी या संस्थागत निर्देशों में बदलाव आने पर एडमिशन प्रक्रिया में संशोधन किया जा सकता है।