केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बीजेपी शासित राज्य गुजरात को ‘रेड जोन’ में रखा गया है और इसकी वजह है यहां के माध्यमिक स्कूलों का ड्रॉप आउट रेट जो कि 15 प्रतिशत से भी अधिक है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में हर 100 में से 15 से अधिक छात्र माध्यमिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं।

राष्ट्रीय औसत से भी कम है गुजरात का एवरेज

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार पिछले दो दशकों से ‘शाला प्रवेशोत्सव’ जैसे अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाने का प्रयास कर रही है।

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11वीं और 12वीं का एनरोलमेंट रेट 30 फीसदी से भी कम

UDISE+ की रिपोर्ट के अनुसार, जो स्कूलों से रियल टाइम डेटा जुटाया जाता है गुजरात में आयु के अनुसार विद्यालय में नामांकन (ASER) भी कम पाया गया है। 2025-2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 11 और 12 में गुजरात का नेट एनरोलमेंट रेट केवल 29.1 प्रतिशत है। यानी जिन 100 बच्चों को इन कक्षाओं में होना चाहिए, उनमें से केवल 29 बच्चे ही कक्षा 11 और 12 में एनरोल हुए हैं। वहीं लड़कियों का एनरोलमेंट रेट 29.6 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय औसत 41.1 प्रतिशत है।

2022-23 में सबसे अधिक था ड्रॉप आउट रेट

आंकड़ों के अनुसार, उच्च माध्यमिक स्तर पर नामांकन में लगातार गिरावट दिख रही है। 2022-23 में यह ड्रॉप आउट रेट 40 प्रतिशत से अधिक था, जो 2023-24 में 34.7 प्रतिशत और 2024-25 में घटकर 24 प्रतिशत रह गया। हालांकि 2025-26 में यह बढ़कर 29 प्रतिशत हुआ, लेकिन यह अभी भी राष्ट्रीय औसत 35.8 से बहुत कम है। ASER रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर जिन 100 बच्चों को स्कूल में होना चाहिए, उनमें से केवल 31 बच्चे ही पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय औसत पर यह क्रमश: 51.3 और 52.5 फीसदी है।

क्या वजह है बच्चों के ड्रॉप आउट की?

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, छात्रों के स्कूल छोड़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें दूसरे स्कूल में ट्रांसफर, कम उम्र में शादी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक समस्या और लड़कियों की शिक्षा से जुड़ी सामाजिक बाधाएं तथा परीक्षा में असफल होने के बाद पढ़ाई छोड़ने जैसे प्रमुख कारण शामिल हैं।

माध्यमिक स्तर पर गुजरात की स्थिति भले अच्छी न हो, लेकिन प्राइमरी एजुकेशन में गुजरात काफी बेहतर स्थिति में है। प्राइमरी एजुकेशन में इस राज्य का ड्रॉप आउट रेट लगभग शून्य है। इसके बावजूद कक्षा 9 और 10 में 17.6 प्रतिशत छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं, जो राष्ट्रीय औसत 10.9 प्रतिशत से काफी अधिक है। लड़कियों की ड्रॉपआउट दर भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दर्ज की गई है।

(यह खबर जनसत्ता डॉट कॉम के साथ इंटर्नशिप कर रही कल्याणी चौधरी ने लिखी है।)