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नई व्यवस्थाः अब गायब नहीं हो पाएंगे सरकारी स्कूलों के ‘गुरुजी’, सिर्फ एक फोन लगाएगा लापरवाही पर लगाम

रियल टाइम टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विलांस प्लान से सरकारी स्कूलों के 1.95 लाख शिक्षकों पर नजर रखी जाएगी। नई व्यवस्था 10 जून के बाद नए शैक्षणिक सत्र से शुरू हो जाएगी।

Author गांधीनगर | Published on: May 21, 2019 9:13 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाने और शिक्षकों पर सख्ती के लिए गुजरात सरकार ने नया फंडा अपनाया है। अब एक फोन कॉल की वजह से राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षण कार्य छोड़कर गायब होना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने एक ऐसा कॉल सेंटर बनाया है, जहां से शिक्षकों को कॉल किया जाएगा। इस कॉल पर उन्हें अपनी लोकेशन, दिन के कामकाज, काम किसने दिया आदि के संबंध में पूरी जानकारी मांगी जा सकती है। इसी तरह अगर वे छुट्टी पर हैं तो उन्हें यह बताना होगा कि कितनों दिनों की छुट्टी पर हैं और किसने अनुमति दी।

इस रियल टाइम टेक्नोलॉजी इनेबल्ड सर्विलांस प्लान से सरकारी स्कूलों के 1.95 लाख शिक्षकों पर नजर रखी जाएगी। नई व्यवस्था 10 जून के बाद नए शैक्षणिक सत्र से शुरू हो जाएगी। इसका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक हर दिन के अपने कामकाज की रूपरेखा से जुड़े रहें। अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम कई तरह की रिपोर्ट्स के अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। रिपोर्ट्स में शिक्षकों की उदासीनता की बातें सामने आई थीं।

नई व्यवस्था में सिर्फ शिक्षकों पर ही नजर नहीं रखी जाएगी। इसके तहत स्कूल परिसर में किसी मोबाइल या अन्य जीपीएस डिवाइस की एंट्री या एग्जिट पर भी अलर्ट जारी हो जाएगा। यह पूरा ऑपरेशन राजधानी गांधीनगर में बने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से शुरू होगा। इस सेंटर में 50 लोग काम करेंगे। इनकी नियुक्ति समग्र शिक्षा अभियान और प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के तहत की जा रही है। यह ऑपरेशन मुख्य सचिव (शिक्षा) विनोद राव के नेतृत्व में काम करेगा।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में राव ने कहा, ‘शिक्षक अपने कामकाज की उपेक्षा न करे इसके लिए हम यह रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लाए हैं।’ इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने एक पायलट कंट्रोल सेंटर का दौरा किया और पाया कि करीब 30 लोग कम्प्यूटर्स के सामने हेडफोन लगाए बैठे हैं और गूगल पर बने फॉर्म में शिक्षकों की प्रतिक्रियाएं रिकॉर्ड कर रहे हैं। हर दिन की जानकारी को एक्सेल शीट में भरा जा रहा है। वहां मौजूद एक कर्मचारी ने कहा कि वो एक दिन में लगभग 500 कॉल कर रहे हैं। एक बार जब आधिकारिक रूप से ऑपरेशन शुरू होगा तो यह संख्या करीब 1250 तक जाने की अपेक्षा है।

अधिकारियों का कहना है कि कॉल सेंटर के जरिए मिले फीडबैक को दूसरे स्रोतों जैसे शिक्षकों, प्रिंसिपल, कल्स्टर और ब्लॉक रिसॉर्स सेंटर के कॉर्डिनेटर द्वारा जुटाई गई जानकारियों से मिलान करके पुष्टि की जाएगी। राव ने कहा, ‘हमारे ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से शिक्षकों को पहले ही अहसास है कि उनकी मॉनिटरिंग की जा रही है।’

कंट्रोल सेंटर की भी रोजाना पर मॉनिटरिंग की जाएगी। यह काम शिक्षा से जुड़े राज्य के अहम विभागों के प्रमुखों जैसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, गुजरात शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, गुजरात सेकंडरी और हायर सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड और स्कूलों के कमिश्नर करेंगे। इन सभी में से कम से कम किसी एक को रोजाना कंट्रोल सेंटर जाना होगा और आंकड़ों का विश्लेषण करना होगा।

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अधिकारियों का कहना है कि सभी कॉलर को 10 सवाल पूछने होंगे। ये सवाल विचार-विमर्श के बाद रणनीति के तहत विशेषज्ञों की टीम ने तैयार किए हैं। हर दिन सवालों में भी बदलाव होगा। यह बदलाव स्कूल में चल रहे प्रोजेक्ट और अन्य गतिविधियों पर आधारित होगा।

इस कॉल सेंटर सिस्टम को कुछ शिक्षकों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी के समाधान के रूप में भी देखा जा रहा है। शिक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘कुछ दिनों पहले एक सरकारी स्कूल के शिक्षक या कॉर्डिनेटर ने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया तो अधिकारी सीधे स्कूल में ही पहुंच गए। हम उनसे सवाल नहीं कर सकते थे क्योंकि शिक्षकों को स्कूल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है।’

राव ने कहा, ‘नए ट्रैकिंग सिस्टम से शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक माहौल बनेगा। हम शिक्षकों से पढ़ाई के तौर-तरीकों में भी इनोवेशन लाने के लिए कहेंगे, ताकि अपेक्षित लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। ये सभी सवाल उन्हें अहसास दिलाएंगे कि उनकी बातें भी सुनी जा रही हैं और उनकी कोशिशों को विभाग की तरफ से संज्ञान में लिया जा रहा है।’

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