Gandhi Jayanti 2026: 2 अक्टूबर को देशभर में गांधी जयंती मनाई जाती है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था और आजादी की लड़ाई में सत्य और अहिंसा के उनके विचारों से तो लगभग हर विद्यार्थी परिचित है, लेकिन उनकी पढ़ाई, कॉलेज, लंदन में कानून की शिक्षा और वकील बनने के सफर के बारे में कई रोचक बातें हैं, जो शायद बहुत कम लोग ही जानते हैं।
गांधी जी की शिक्षा का सफर भी बिल्कुल सीधा नहीं था। उन्होंने राजकोट में स्कूल की पढ़ाई की और मैट्रिक पास करने के बाद भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन वहां ज्यादा समय नहीं पढ़ सके। इसके बाद वह कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए और आगे चलकर इनर टेम्पल से जुड़े और 1891 में बार में बुलाए गए।
गांधी जयंती पर जानें उनकी शिक्षा से जुड़े 10 अहम सवालों के जवाब
महात्मा गांधी का जन्म कहां और कब हुआ था?
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत में दीवान थे और उनकी मां का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी की शुरुआती शिक्षा पोरबंदर में हुई। बाद में उनका परिवार राजकोट चला गया, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई की।
गांधी जी ने स्कूल की पढ़ाई कहां से की?
परिवार के राजकोट चले जाने के बाद गांधी जी ने वहां प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में हाई स्कूल में दाखिला लिया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वह 1881 में राजकोट के हाई स्कूल में पहुंचे थे। ऐतिहासिक विवरणों में उनके राजकोट के स्कूल का नाम अल्फ्रेड हाई स्कूल मिलता है, जिसे बाद में मोहनदास गांधी हाई स्कूल के नाम से जाना गया।
क्या गांधी जी पढ़ाई में बहुत तेज थे?
यह जानकर छात्रों को शायद हैरानी हो कि गांधी जी ने खुद को बचपन में कोई असाधारण छात्र नहीं बताया। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार वह पढ़ाई में औसत छात्र थे और खेल-कूद में भी उनकी खास रुचि नहीं थी। लेकिन उनकी शिक्षा की खास बात सिर्फ परीक्षा के अंक नहीं थे क्योंकि आगे चलकर उन्होंने पढ़ाई को चरित्र निर्माण और कर्तव्य की समझ से जोड़कर देखा और उसका अनुसरण भी किया।
गांधी जी ने मैट्रिक कब पास किया?
गांधी जी ने 1887 में मैट्रिक की परीक्षा पास की, जिसके बाद उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन वहां की पढ़ाई उनके लिए आसान नहीं रही और वह सिर्फ एक टर्म तक ही कॉलेज में पढ़ सके और बाद उनके सामने आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर बड़ा सवाल था।
गांधी जी डॉक्टर क्यों नहीं बने?
गांधी जी की इच्छा डॉक्टर बनने की भी थी लेकिन उनकी मां पुतलीबाई धार्मिक विचारों वाली थीं और चिकित्सा पेशे से जुड़ी कुछ परिस्थितियों को लेकर सहमत नहीं थीं। परिवार के परिचितों ने उन्हें कानून की पढ़ाई करने का सुझाव दिया और यहीं से गांधी जी के जीवन में कानून की पढ़ाई का रास्ता खुला।
गांधी जी कानून की पढ़ाई के लिए लंदन क्यों गए?
गांधी जी के परिवार के लिए यह माना जाता था कि कानून की शिक्षा उन्हें आगे चलकर बेहतर पेशेवर अवसर दे सकती है और इसी सलाह के बाद उन्होंने इंग्लैंड जाकर कानून पढ़ने का फैसला किया। वह 4 सितंबर 1888 को बॉम्बे से इंग्लैंड के लिए रवाना हुए और उस समय उनकी उम्र करीब 18 वर्ष थी। लंदन में उनका मुख्य उद्देश्य कानून की पढ़ाई पूरी करना था।
गांधी जी ने लंदन में कहां कानून की पढ़ाई की?
गांधी जी इनर टेम्पल से जुड़े, जो लंदन के ऐतिहासिक इन्स ऑफ कोर्ट में से एक है। इनर टेम्पल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार गांधी को 6 नवंबर 1888 को छात्र के रूप में दाखिला दिया गया था।
लंदन में शुरुआत में उन्होंने अंग्रेजी समाज के तौर-तरीकों को समझने की कोशिश भी की। उन्होंने डांस और वायलिन सीखने तथा भाषण कला की कक्षाएं लेने की कोशिश की लेकिन बाद में उनका ध्यान मुख्य रूप से कानून की पढ़ाई पर केंद्रित हो गया।
क्या गांधी जी ने लंदन में सिर्फ कानून पढ़ा था?
लंदन में गांधी जी का अनुभव केवल कानून की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने वहां अंग्रेजी समाज और जीवनशैली को करीब से देखा। इसी दौरान उन्हें शाकाहार के बारे में गंभीरता से पढ़ने का अवसर मिला और वह वेजिटेरियन सोसायटी से भी जुड़े। इनर टेम्पल के रिकॉर्ड के अनुसार वह इस संस्था की गतिविधियों में सक्रिय रहे। यानी लंदन का समय उनके लिए पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण का भी दौर था।
गांधी जी वकील कैसे बने?
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद गांधी जी को 10 जून 1891 को इनर टेम्पल में बार में बुलाया गया। अगले दिन उनका हाई कोर्ट में एनरोलमेंट हुआ हुआ। इसके बाद वह भारत लौटे और वकालत शुरू करने की कोशिश की। भारत सरकार के गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि वह 1891 में इंग्लैंड से कानून की पढ़ाई पूरी करके भारत लौटे और बॉम्बे तथा राजकोट में वकालत शुरू की।
क्या गांधी जी की शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित थी?
गांधी जी की शिक्षा को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं थी। उनके विचारों में चरित्र, कर्तव्य और जीवन से सीखना महत्वपूर्ण था।
उनका जीवन भी इसका उदाहरण माना जाता है, जिन्हें कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद दक्षिण अफ्रीका में काम करते हुए उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। वहां के अनुभवों ने उनके विचारों और अहिंसक प्रतिरोध की पद्धति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में सत्याग्रह और अहिंसा उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख पहचान बने।
छात्रों के लिए गांधी जी की शिक्षा से क्या मिलती है सीख?
गांधी जी की पढ़ाई की कहानी आज के छात्रों के लिए इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि इसमें यह संदेश मिलता है कि शैक्षणिक सफर हमेशा एकदम सीधा नहीं होता। उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई छोड़ी, फिर विदेश जाकर कानून की शिक्षा हासिल की। लंदन में शुरुआत में उनका ध्यान पढ़ाई के अलावा दूसरी चीजों पर भी गया, लेकिन उन्होंने खुद को दोबारा पढ़ाई पर केंद्रित किया। आगे चलकर उनकी शिक्षा और जीवन के अनुभवों ने उनके विचारों को आकार दिया।
इसलिए गांधी जयंती पर विद्यार्थियों के लिए उनकी कहानी सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि लगातार सीखते रहने और अनुभवों से खुद को बेहतर बनाने की कहानी भी है।
