संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। जहां इस सूची में सुरक्षा गार्ड के बेटे, रेलवे कुली की बेटी और बस कंडक्टर के बेटे जैसे ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं जिनके लिए यह आरक्षण वास्तव में अवसर का माध्यम बना, वहीं कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिनकी शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि ईडब्ल्यूएस कोटे की मूल भावना पर बहस छेड़ रही है।

द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में सामने आया है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में चयनित कई उम्मीदवार प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में पढ़े, महंगी सिविल सेवा कोचिंग प्राप्त की, IIT और NIT जैसे संस्थानों से पढ़ाई की तथा कुछ उम्मीदवार बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) में नौकरी भी कर चुके थे।

EWS कोटे से 104 उम्मीदवार हुए चयनित

सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत कुल 104 उम्मीदवारों का चयन हुआ। ईडब्ल्यूएस आरक्षण 2019 में लागू किया गया था, जिसके तहत सामान्य वर्ग के उन परिवारों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है जिनकी वार्षिक सकल आय 8 लाख रुपये से कम हो और जो निर्धारित संपत्ति संबंधी शर्तों को पूरा करते हों।

इंडियन एक्सप्रेस ने 2025 में ईडब्ल्यूएस कोटे से चयनित सभी 104 उम्मीदवारों की सोशल मीडिया प्रोफाइल, कोचिंग संस्थानों के रिकॉर्ड, स्कूल और कॉलेज संबंधी जानकारी का अध्ययन किया। यह परीक्षा चक्र मार्च 2025 में घोषित अंतिम परिणामों के साथ पूरा हुआ था।

जांच में सामने आए प्रमुख तथ्य

अधिकांश उम्मीदवारों ने ली महंगी कोचिंग: जांच के अनुसार कम से कम 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और अन्य शहरों के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थानों जैसे वाजीराम और रवि, वाजीराव और रेड्डी और दृष्टि आईएएस में तैयारी की। इन संस्थानों की वार्षिक फीस 2.65 लाख रुपये तक पहुंचती है।

कुल मिलाकर 104 में से कम से कम 84 उम्मीदवारों ने किसी न किसी प्रकार की औपचारिक सिविल सेवा कोचिंग ली। इनमें फोरमआईएएस, नेक्स्टआईएएस, किंगमेकर्स आईएएस और यूपीएससी वाला जैसे संस्थान भी शामिल हैं। हालांकि कुछ संस्थान छात्रवृत्ति प्रदान करते हैं, लेकिन उनका दायरा सीमित है।

निजी स्कूलों में पढ़े कई अभ्यर्थी: जांच में पाया गया कि कम से कम 46 उम्मीदवारों ने दिल्ली-एनसीआर और विभिन्न राज्य राजधानियों जैसे लखनऊ, रायपुर और जयपुर के निजी स्कूलों में पढ़ाई की। इन स्कूलों की वार्षिक फीस 45,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये तक बताई गई है।

28 उम्मीदवारों के परिवारों का व्यवसाय: कम से कम 28 उम्मीदवार ऐसे पाए गए जिनके माता-पिता किसी न किसी व्यवसाय से जुड़े हैं। इनमें दुकानदारी, व्यापार, स्टील फैब्रिकेशन, कपड़ा और कन्फेक्शनरी जैसे कारोबार शामिल हैं। इनमें से कम से कम पांच परिवार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), एक राज्य की राजधानी और आठ अन्य जिला मुख्यालयों में स्थित बताए गए हैं।

निजी क्षेत्र में नौकरी कर चुके उम्मीदवार: कम से कम 10 उम्मीदवार UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले निजी क्षेत्र में कार्यरत थे। इनमें कुछ उम्मीदवार बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में अच्छी-खासी तनख्वाह पर काम कर चुके थे।

IIT, NIT और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से पढ़ाई: EWS श्रेणी में चयनित 104 उम्मीदवारों में कम से कम 14 उम्मीदवार IIT से स्नातक या स्नातकोत्तर हैं। वहीं कम से कम तीन उम्मीदवार NIT से पढ़े हैं।

इसके अलावा 27 उम्मीदवार दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और कम से कम तीन उम्मीदवार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से शिक्षित हैं।

EWS का उद्देश्य पूरा करने वाले उम्मीदवार भी शामिल

जांच में ऐसे कई उम्मीदवार भी सामने आए जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनके नाम प्रकाशित नहीं किए गए हैं।

एक उम्मीदवार सेवानिवृत्त सैनिक और वर्तमान में सुरक्षा गार्ड के बेटे हैं।

एक अन्य उम्मीदवार स्कूल बस कंडक्टर के पुत्र हैं।

एक महिला उम्मीदवार पूर्व रेलवे कुली की बेटी हैं।

कुछ उम्मीदवार दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगार अभिभावकों के परिवारों से आते हैं।

नवोदय विद्यालय और ग्रामीण पृष्ठभूमि

कम से कम सात उम्मीदवारों ने जवाहर नवोदय विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की, जो मुख्य रूप से ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए संचालित आवासीय सरकारी स्कूल हैं। कई उम्मीदवार हिंदी माध्यम से पढ़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जहां उनके पिता किसान हैं।

29 उम्मीदवार किसान परिवारों से

EWS कोटे से चयनित उम्मीदवारों में 29 उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके माता-पिता किसान हैं। इनमें उत्तर प्रदेश से 7, बिहार से 4, हरियाणा से 4, मध्य प्रदेश से 4, एक दक्षिणी राज्य के एक ही परिवार से 2 उम्मीदवार शामिल हैं।

किन राज्यों से आए सबसे अधिक उम्मीदवार?

रिकॉर्ड के अनुसार 104 उम्मीदवार देशभर के विभिन्न राज्यों से हैं, जो इस प्रकार हैं।

उत्तर प्रदेश – 25
बिहार – 17
मध्य प्रदेश – 14
हरियाणा – 9
राजस्थान – 8
गुजरात – 5
उत्तराखंड – 4
कर्नाटक – 4
केरल – 3

पूर्व अधिकारियों ने जताई चिंता

पूर्व और वर्तमान सिविल सेवा अधिकारियों का कहना है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के कई उम्मीदवारों द्वारा वर्षों तक तैयारी करना, दिल्ली जैसे शहरों में रहकर महंगी कोचिंग लेना और निजी स्कूलों में पढ़ाई करना इस बात पर सवाल खड़े करता है कि क्या इस आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत बेहतर आर्थिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले लोग उठा रहे हैं।

पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पूर्व सचिव सत्यनंद मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा: “EWS व्यवस्था आय और संपत्ति संबंधी मानकों पर आधारित है। प्रमाणपत्र जारी करने वाली एजेंसियों को केवल स्व-घोषणा और आयकर रिटर्न पर निर्भर रहने के बजाय गहन जांच करनी चाहिए। यदि आर्थिक रूप से सक्षम लोग इस लाभ पर कब्जा कर लेते हैं तो EWS आरक्षण का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।”

Jansatta Education Expert Conclusion

सिविल सेवा परीक्षा 2025 के ईडब्ल्यूएस चयनित उम्मीदवारों की प्रोफाइल ने एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। एक ओर यह व्यवस्था वास्तव में वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को अवसर प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर जांच में सामने आए कुछ मामलों ने ईडब्ल्यूएस पात्रता सत्यापन और जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता पर सवाल खड़े किए हैं।