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अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट भविष्य

अपशिष्ट प्रबंधन मूल रूप से वे सभी गतिविधियां हैं, जो कचरे की शुरुआत से लेकर अंतिम निपटान तक के लिए आवश्यक है।

अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट भविष्य
सांकेतिक फोटो।

अपशिष्ट प्रबंधन में मुख्य रूप से उच्च स्तर की निगरानी और विनियमन के साथ संग्रह, परिवहन, उपचार और कचरे का अंतिम निपटान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। अपशिष्ट प्रबंधन आम तौर पर कच्चे माल के निष्कर्षण, कच्चे माल के अंतिम उत्पादों में प्रसंस्करण, और अन्य मानवीय गतिविधियों के समय उत्पन्न सभी प्रकार के ठोस या तरल कचरे से संबंधित है। इसका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर हानिकारक प्रभावों को कम करना है।

इस दिशा में काम करने वाले लोगों की अभी बहुत कमी है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित और अनुभवी लोगों की मांग देश-विदेश में काफी बढ़ रही है। अगर आप में अपशिष्ट पदार्थों को फिर से इस्तेमाल करने लायक बनाने की दिलचस्पी है तो कचरा प्रबंधन एक अच्छा करिअर विकल्प है।

अपशिष्ट प्रबंधन में करिअर

अपशिष्ट प्रबंधन पर्यावरण प्रबंधन और संरक्षण का ही एक अहम पहलू है। इसके तहत पर्यावरण विज्ञान या पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कुछ प्रमुख क्षेत्रों में काम किया जा सकता है। घरों, शहरों और कंपनियों से निकलने वाले कूड़े और बेकार चीजों को खुले में फेंक देने से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। इसलिए पर्यावरण को स्वच्छ व सुरक्षित रखने के लिए बेकार सामान को पुनर्चक्रित किया जाता है।

कार्यक्षेत्र

यह क्षेत्र पर्यावरणविद् और उसके ईद-गिर्द घूमता है। पर्यावरण सुरक्षा संबंधी कार्य विज्ञान और इंजीनियरिंग के विभिन्न सिद्धांतों के प्रयोग से आगे बढ़ते हैं। वातावरण में व्याप्त प्रदूषण को दूर करने के लिए वैज्ञानिक कई प्रकार के शोध, थ्योरी और विधियों को अपनाते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रिया में पर्यावरणविद् का कार्य शोध से संबंधित ही होता है। इसमें प्रशासनिक, दिशानिर्देश और बचाव तीनों स्तर पर काम करना पड़ता है।

पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी पर्यावरण सुधारने का कार्य करते हैं, ताकि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा और अनाज व अन्य खाद्य पदार्थ उत्पादित करने के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध हो सके। प्रशिक्षित पर्यावरणविद् इंजीनियर अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र को इस तरह बनाता है और उसका रखरखाव करता है, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में रहने वाले लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।

योग्यता

इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन या पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर होना आवश्यक है। आप पर्यावरणीय विज्ञान में बीएससी पाठ्यक्रम कर सकते हैं। बीएससी करने के लिए यह आवश्यक है कि आपने भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान विषयों से बारहवीं पास की हो। इसके बाद अपशिष्ट प्रबंधन या पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी में एमएससी या पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं।

वहीं, अगर आपने भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों से बारहवीं पास की है तो आप पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी में बीई कर सकते हैं। इसके अलावा ऊर्जा एवं पर्यावरण प्रबंधन में एमटेक पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है। एमटेक करने के लिए आपके पास पर्यावरण में बीई या सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री होनी चाहिए। इस पाठ्यक्रम को करने से आपको इस क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव हासिल कर पाएंगे। पाठ्यक्रम करने के बाद शुरुआती दौर में आपको 20 से 25 हजार रुपए प्रति माह तक का वेतन मिल सकता है।
संस्थान

आइआइटी, दिल्ली, कानपुर, खड़गपुर और मद्रास,’दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली,’दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दिल्ली,’राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, इंदौर’अंतरराष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबंधन संस्थान, भोपाल’ भारतीय पर्यावरणीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई’दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय, सूरत
’मैसूर विश्वविद्यालय, मैसुरु।

आशीष झा (करिअर परामर्शदाता)

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First published on: 05-10-2022 at 11:31:13 pm
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