कब हुए थे भारत में पहले चुनाव? वह सीट जिस पर खड़े हुए थे 1033 उम्मीदवार? जानें चुनावों से जुड़े ऐसे रोचक तथ्य

1996 से पहले तक उम्मीदावारों को दो से अधिक लोकसभा सीटों से इलेक्शन लड़ने की छूट थी।

Election facts, historical facts about loksabha election, West Bengal Election Result 202125 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। प्रतीकात्मक फोटो (Photo – The Indian Express)

आज पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और असम के विधानसभा के नजीते घोषित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही यूपी में पंचायत चुनाव के परिणाम भी जारी हो रहे है। हम यहां आपको चुनाव से जुड़े कई रोचक तथ्य बता रहे हैं जो भारत में कई चुनावों के दौरान हुए हैं। 1996 से पहले तक उम्मीदावारों को दो से अधिक लोकसभा सीटों से इलेक्शन लड़ने की छूट थी परंतु रेप्रेज़ेंटेशन ऑफ द पीपुल ऐक्ट 1951 में संशोधन कर इसे दो सीटों तक सीमित कर दिया गया। अगर कोई नोता दोनो सीटों से चुनाव जीतता है तो उसे 10 दिनों के अंदर एक सीट को खाली करना होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 2014 के लोकसभा के चुनाव में वाराणसी और वडोदरा से चुनाव लड़ा था और दोनो ही जगह से जीत हासिल की थी जिसके बाद उन्होंने वाराणसी सीट को चुना था।

तमिलनाडु में 1996 में विधानसभा के चुनाव में मोडाकुरुची में एक साथ 1,033 उम्मीदवार खड़े हुए थे। इस चुनाव में बैलेट पेपर एक पुस्तिका के रूप में था। देश में पहले चुनाव के लिए 17 लाख वैलेट बॉक्स बनाए गए थे। इन बॉक्स को गोदरेज कंपनी ने बनाया था जिसके लिए सरकार ने एक बॉक्स के लिए 5 रुपए का भुगतान किया था।

25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। लोकसभा और राज्यसभा में यह अंतर है कि लोकसभा संसद का निचला सदन है, जबकि राज्यसभा ऊपरी सदन कहलाता है। भारत में आजादी के बाद पहले चरण का चुनाव 25 अक्तूबर,1951 को हुआ था और अंतिम चरण का चुनाव 21 फरवरी, 1952 को हुआ था।

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