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बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग में अवसरों की भरमार, जानिए शैक्षणिक योग्यता से लेकर सैलरी तक की जानकारी

इंजीनियरिंग की इस शाखा के बढ़ते महत्व की वजह से बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग में अवसरों की कोई कमी नहीं है। निकट भविष्य में बॉयोमेडिकल इंजीनियरों की मांग कम नहीं होगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग की वजह से ही डॉक्टर किसी रोग को बेहतर तरीके से समझ और उसके निदान के लिए उन्नत तरीकों को अमल में ला रहे हैं। एक्स-रे, एमआरआइ, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी संबंधी मशीनों का विकास बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग के कारण ही संभव हो पाया है। किडनी की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए डायलिसिस मशीन, हृदय रोगियों के लिए पेसमेकर, सुनने में अक्षम लोगों के लिए हियरिंग एड सहित मानव शरीर के विभिन्न कृत्रिम अंगों का विकास भी इस इंजीनियरिंग की देन है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में हुई वृद्धि से बॉयोमेडिकल क्षेत्र के पेशवरों की मांग भी बढ़ी है। इंजीनियरिंग की इस शाखा के बढ़ते महत्व की वजह से बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग में अवसरों की कोई कमी नहीं है। निकट भविष्य में बॉयोमेडिकल इंजीनियरों की मांग कम नहीं होगी।

क्या है बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग
बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग में इंजीनियरिंग के उन सिद्धांतों और तकनीकों का अध्ययन किया जाता है, जिनका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में होता है। बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग के जरिए कृत्रिम अंगों, चिकित्सा उपकरणों और रोग की पहचान में सहायक उपकरणों का विकास और निर्माण किया जाता है। इंजीनियरिंग की इस शाखा में विशेषज्ञता रखने वालों को बॉयोमेडिकल इंजीनियर कहा जाता है। बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल और इंजीनियरिंग के विभिन्न विषयों का मिलाजुला रूप है। इसमें बॉयो-मेकेनिक्स, टिश्यू एंड सेल्यूलर इंजीनियरिंग, जेनेटिक इंजीनियरिंग, आॅथोर्पेडिक सर्जरी, बॉयो-इंस्ट्रूमेंटेशनस, मेडिकल इमेजिंग और बॉयो-मेटेरियल्स आदि के बारे में पढ़ाया जाता है।

कई जगह है इस क्षेत्र में काम
इस विधा के पेशेवर अपने ज्ञान का इस्तेमाल मेडिकल और बॉयोलॉजिकल साइंस के क्षेत्र में सामने आने वाली समस्याओं का हल करने में करते हैं। बॉयोमेडिकल इंजीनियर स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरत के साजो-सामान का विकास और निर्माण करते हैं। साथ ही मानव शरीर के कृत्रिम अंगों का निर्माण भी उनका ही कार्य है। बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग कंपनियों की निर्माण और विकास शाखाओं में काम करने के अलावा वे अस्पतालों में कार्य करते हैं।

शैक्षणिक योग्यता
विज्ञान और गणित विषय के साथ 10वीं पास करके बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लिया जा सकता है। पॉलिटेक्निक संस्थानों में चलने वाले इस पाठ्यक्रम में 10वीं के अंकों या प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला होता है। तीन वर्षीय इस पाठ्यक्रम के दौरान औद्योगिक प्रशिक्षण भी दिलाया जाता है। डिप्लोमा करने के बाद बीटेक पाठ्यक्रम के दूसरे साल में प्रवेश (लेटरल एंट्री) लेने का भी विकल्प मौजूद होता है। बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग के बीई या बीटेक दाखिले के लिए विज्ञान विषयों (जीवविज्ञान जरूरी) के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। अभियांत्रिकी के सभी पाठ्यक्रमों की तर्ज पर आगामी शैक्षणिक सत्र में इस पाठ्यक्रम के दाखिले भी संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-मेन, जेईई- एडवांस्ड) के आधार पर होते हैं। संबंधित विषय में स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग या उससे संबंधित विषयों के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया जा सकता है। इसके लिए विभिन्न संस्थान प्रवेश परीक्षा का आयोजन करते हैं।

वेतनमान
इस क्षेत्र में पेशेवरों को अच्छा वेतन मिलता है। डिप्लोमाधारकों को शुरुआत में 18 हजार रुपए या उससे अधिक वेतन पर नियुक्त किया जाता है। स्नातक डिग्रीधारकों के लिए वेतन सीमा 30 से 35 हजार रुपए के बीच होती है। बॉयोमेडिकल इंजीनियरिंग से संबंधित किसी विषय में विशेषज्ञता हासिल करने या इस क्षेत्र में कुछ वर्षों का अनुभव होने के बाद वेतन की शुरुआत लगभग 45 हजार रुपए से होती है।

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