DU Admission 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने स्नातक प्रवेश प्रक्रिया के बीच एक विशेष व्यवस्था लागू करते हुए अपने दो संबद्ध कॉलेजों को बची हुई सीटों पर ऑफलाइन प्रवेश देने की अनुमति दी है। यह अनुमति केवल उन सीटों के लिए दी गई है, जो नियमित काउंसलिंग और सीट आवंटन के कई चरण पूरे होने के बाद भी खाली रह गई हैं। इस प्रक्रिया में पात्र अभ्यर्थियों का चयन 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह फैसला सामान्य प्रवेश नीति में बदलाव नहीं है। CUET और CSAS के जरिए होने वाली नियमित प्रवेश प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। ऑफलाइन मेरिट एडमिशन केवल खाली सीटों को भरने के उद्देश्य से सीमित अवधि के लिए लागू किया गया है।
इन कोर्सों में मिलेगा एडमिशन
इस विशेष प्रवेश प्रक्रिया के तहत बीकॉम (BCom), बीए (BA), बीएससी (BSc) समेत विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों की खाली सीटों पर आवेदन किए जा सकते हैं। संबंधित कॉलेजों ने इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।
क्या होगी चयन प्रक्रिया?
इस बार चयन के लिए CUET स्कोर की बजाय अभ्यर्थियों के 12वीं बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांक को आधार बनाया जाएगा। हालांकि प्रवेश पूरी तरह उपलब्ध सीटों पर निर्भर करेगा। आवेदन जमा होने के बाद दस्तावेजों की जांच और फीस जमा कराने की प्रक्रिया निर्धारित तिथियों पर पूरी की जाएगी।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
कॉलेजों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से नियमित प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाती हैं। विशेष रूप से ऐसे कॉलेज, जो शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थित हैं या महिला कॉलेज हैं, वहां अपेक्षा से कम छात्राएं प्रवेश ले रही हैं।
एक कॉलेज के अनुसार हाल के वर्षों में उसकी करीब 40 प्रतिशत स्नातक सीटें खाली रह गईं। संस्थान का मानना है कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कई छात्राएं CUET परीक्षा में शामिल ही नहीं हो पातीं, जिससे अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें दाखिले का अवसर नहीं मिल पाता।
यह स्थायी व्यवस्था नहीं
विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि CUET आधारित प्रवेश प्रणाली ही DU की मुख्य व्यवस्था रहेगी। ऑफलाइन मेरिट आधारित प्रवेश को केवल इस वर्ष खाली सीटों को भरने के लिए विशेष अनुमति के रूप में लागू किया गया है। भविष्य की प्रवेश प्रक्रिया पहले की तरह CUET और CSAS के माध्यम से ही संचालित होगी।
फैसले पर उठे सवाल
इस निर्णय के बाद शिक्षकों के एक संगठन ने सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि विश्वविद्यालय खाली सीटों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू करता है तो सभी कॉलेजों के लिए एक समान और पारदर्शी नीति बनाई जानी चाहिए। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में समान नियम लागू करने की मांग भी की है।
