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Dhirubhai Ambani: स्कूल में राष्ट्रीय झंडा फहराकर कैसे हीरो बने धीरूभाई अंबानी, जानिए किस्सा

Dhirubhai Ambani and Ratan Tata Education: धीरूभाई अंबानी को गांव के स्कूल में पांचवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, आगे की पढ़ाई के लिए जूनागढ़ शहर में भेज दिया गया। रतन टाटा ने शुरुआती पढ़ाई कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल मुंबई से की।

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आज धीरूभाई अंबानी की जयंती है। साल 1932 को गुजरात के जूनागढ़ के चोरवाड़ में उनका जन्म हुआ था। उनका नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। इनके अलावा देश के एक और बड़े बिजनेसमैन रतन टाटा का भी जन्मदिन आज है। रतन टाटा 1937 में गुजरात के सूरत में पैदा हुए थे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी ने अपनी पढ़ाई जूनागढ़ में ही की थी। वह 10वीं तक पढ़े थे।आर्थिक दिक्कतों के कारण उन्हें इसके बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। रतन टाटा ने शुरुआती पढ़ाई कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल मुंबई से की। इसके बाद वे बिशप कॉटन स्कूल शिमला में पढ़े। यहां से आर्कीटेक्टर की डिग्री लेने के बाद वे 1962 में कोर्नेल यूनिवर्सिटी चले गए। 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की।

धीरूभाई अंबानी को गांव के स्कूल में पांचवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद, आगे की पढ़ाई के लिए जूनागढ़ शहर में भेज दिया गया। पढ़ाई से ज्यादा वह खेल के लिए स्कूल में प्रसिद्ध थे, वह नियमित क्लास टेस्ट में उतना अच्छा नहीं कर पा रहे थे जितना खेलों में कर रहे थे। फिर भी, उन्होंने अपनी वार्षिक परीक्षाओं में  ठीक ठाक प्रदर्शन किया, वह अंकगणित में बड़ी मुश्किल से पास हुए थे। चाहे स्कूल में हो या बोर्डिंग हाउस, वह सभी स्कूली बच्चों में मजाक में सबसे आगे थे। वह वीकेंड पर गिरनार हिल्स के टॉप पर जाने वाले स्कूली छात्रों और शेरों को देखने के लिए प्रसिद्ध गिर जंगल में भी जाने वाले स्टूडेंट्स को लीड करते थे। स्कूल में अपने तीसरे साल में वह जूनागढ़ छात्र संघ के महासचिव चुने गए। जूनागढ़ उन दिनों एक मुस्लिम नवाब द्वारा शासित रियासत थी।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, जैसा कि ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था, नवाब को अपने राज्य को भारतीय संघ के साथ विलय करने की जरूरत थी लेकिन नवाब इसके लिए सहमत नहीं थे। 15 अगस्त, 1947 को, जब भारत अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब भी जूनागढ़ के लोग जंजीरों में जकड़े हुए थे। उन्हें घर के अंदर रहने के लिए कहा गया था। सभी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने की घोषणा की गई थी।

धीरूभाई अंबानी ने एक स्कूल के मैदान में सभी जूनागढ़ के छात्रों की एक बैठक बुलाई, जहां बड़ी धूमधाम के साथ एक ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया। कई देशभक्ति गीत गाए गए और उन लोगों के बीच मिठाई बांटी गई। धीरूभाई ने रैली में अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया। यह एक संक्षिप्त लेकिन भावुक और गरजने वाला भाषण था। वह बड़े आत्मविश्वास से बोले थे।

आदेशों की अवहेलना करने पर रैली निकालने वालों को पास के पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था। वहां धीरूभाई अंबानी से कई घंटों तक पूछताछ की गई, उन्हें धमकाया गया लेकिन वे नहीं झुके। देर रात उन्हें बोर्डिंग हाउस लौटने की अनुमति दी गई। वह पहली बार था जब उन्हें अपने स्कूल के साथियों से हीरो का स्वागत मिला।

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