दिल्ली विश्वविद्यालय में हर साल 70 हजार से अधिक छात्र दाखिला लेते हैं, लेकिन उनके लिए छात्रावास की सुविधा बेहद सीमित है। डीयू से संबद्ध 77 कालेजों में से करीब 20 कालेजों में ही परिसर के भीतर छात्रावास उपलब्ध हैं। इन छात्रावासों की कुल क्षमता करीब 7,000 बिस्तर है। वहीं, 57 कालेजों के पास अपना छात्रावास नहीं है।
डीयू के जिन कालेजों में परिसर के भीतर छात्रावास की सुविधा है, उनमें मिरांडा हाउस, भारती कालेज, दीनदयाल उपाध्याय कालेज, दौलतराम कालेज, हंसराज कालेज, महाराजा अग्रसेन कालेज, रामजस कालेज, लेडी इरविन कालेज, किरोड़ीमल कालेज, हिंदू कालेज, श्रीराम कालेज आफ कामर्स (एसआरसीसी) और लेडी श्रीराम कालेज प्रमुख हैं। हालांकि, इन कालेजों में भी उपलब्ध बेड की संख्या छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले काफी कम है।
वीसी ने 10 दिनों के भीतर प्रस्तावित योजना तैयार करने को कहा
छात्रावासों की कमी के मुद्दे पर डीयू प्रशासन ने भी गंभीरता दिखाई है। कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कालेजों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों से अपने-अपने कालेज परिसर में छात्रावास उपलब्ध कराने के लिए 10 दिनों के भीतर प्रस्तावित योजना तैयार करने को कहा है।
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि अधिकांश कालेज अपने परिसर में छात्रावास निर्माण से बचने का प्रयास कर रहे हैं जिससे कि उन पर निर्माण कार्यों को लेकर किसी तरह के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के आरोप नहीं लगें।

सूत्रों का कहना है कि अगर इस तरह के प्रस्ताव को कालेज गंभीरता के साथ लेंगे तो काफी संख्या में छात्रावास की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और छात्रों को परिसर में आवास और सुरक्षा दोनों मिल सकेंगी। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश कालेजों के पास जमीन की उपलब्धता है।
छात्रावास की कमी पर एनएचआरसी सख्त
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कालेजों में छात्रावास की कमी को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को इसे दूर करने के लिए समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि ‘द नेटवर्क फार एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन’ की शिकायत के बाद वर्ष 2025 में यह मामला आयोग के सामने आया था।
शिकायतकर्ता ने कहा था कि डीयू में लगभग 71 हजार स्रात्तकोतर छात्र हैं जबकि छात्रावास में रहने की सुविधा बहुत कम है। जिसके चलते दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों को अकसर महंगे पीजी या निजी किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
आयोग ने इस मामले को छात्रों के मानवाधिकारों से जुड़ा मुद्दा माना और 30 सितंबर 2025 को आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी बेंच ने इस मामले पर विचार किया और ‘मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993’ की धारा 12 के तहत संबंधित अधिकारियों से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) मांगी। लेकिन तय समय के अंदर रिपोर्ट नहीं मिली, इसलिए आयोग ने संबंधित अधिकारियों को अनुस्मारक भेजा और रिपोर्ट जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया। इसके बाद, डीयू की तरफ से दिए गए जवाब को रिकॉर्ड में लिया गया।
यूजी प्रोग्राम 65 कालेजों के जरिए चलाए जा रहे हैं
डीयू ने अपने जवाब में कहा कि उसके यूजी प्रोग्राम 65 कालेजों के जरिए चलाए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के बाहर से आने वाले छात्रों को रहने की जगह मिलने में होने वाली दिक्कतों का जिक्र भी किया था। हालांकि आयोग ने पाया कि डीयू का जवाब शिकायत में उठाए गए मुख्य मुद्दे को ठीक से संबोधित नहीं करता है। जिसके बाद अब दोबारा आयोग ने मुख्य सचिव व यूजीसी अध्यक्ष को ठोस कार्य योजना जमा करने का निर्देश दिया है।
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी बेंच ने मुख्य सचिव व यूजीसी के अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वह डीयू के साथ मिलकर छात्रावास में रहने की सुविधा बढ़ाने की एक विस्तृत रपट जमा करें। लेकिन प्रस्तावित योजना केवल छात्रावास बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मौजूदा छात्रावासों की आधारभूत संरचना को बढाने, विस्तार करने, मरम्मत करने व उसे बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विचार किए जाने वाली होनी चाहिए।
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