दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की कार्यकारी परिषद ने छात्रों और शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। परिषद ने चार वर्षीय स्नातक पूरा करने वाले योग्य छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही विदेशी विश्वविद्यालयों में एक सेमेस्टर पढ़ाई करने के लिए सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) को भी हरी झंडी मिल गई। हालांकि, इन दोनों प्रस्तावों पर निर्वाचित परिषद सदस्यों ने गंभीर आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।
UG के बाद सीधे PhD का रास्ता खुला
कार्यकारी परिषद ने पीएचडी अध्यादेश में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश के लिए पात्र होंगे।
नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों के लिए निम्न शर्तें तय की गई हैं
न्यूनतम 7.5 CGPA होना अनिवार्य।
Scopus में सूचीबद्ध कम से कम एक शोध प्रकाशन (Publication) होना चाहिए।
पात्र उम्मीदवार सीधे PhD कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
निर्वाचित सदस्यों ने जताई आपत्ति
इंडियन नेशनल टीचर्स कांग्रेस के निर्वाचित सदस्य मिथुराज धूसिया और अमन कुमार ने इस फैसले पर असहमति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि, पीएचडी के लिए विषय की गहरी समझ आवश्यक होती है। केवल चार वर्षीय UG के आधार पर शोध के लिए पर्याप्त तैयारी संभव नहीं है और विभागीय रिसर्च कमेटी (DRC) के सामने प्रवेश परीक्षा या इंटरव्यू नहीं रखा गया है।
इससे शोध की गुणवत्ता और पोस्टग्रेजुएट डिग्री का महत्व प्रभावित हो सकता है। सदस्यों ने यह भी कहा कि चौथे वर्ष में शोध प्रकाशन की अपेक्षा कई छात्रों के लिए व्यावहारिक नहीं है।
सुपरवाइजर नियमों पर भी उठे सवाल
असहमति नोट में यह भी कहा गया कि यदि किसी शोधार्थी को पीएचडी के दौरान गाइड बदलना पड़े तो इसके लिए स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि, नया सुपरवाइजर कौन नियुक्त करेगा? शोध समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
सेमेस्टर अवे प्रोग्राम को भी मंजूरी
कार्यकारी परिषद ने अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क (UGCF)-2022 के तहत सेमेस्टर अवे प्रोग्राम (SAP) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत DU के स्नातक छात्र एक सेमेस्टर किसी विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर सकेंगे।
सेमेस्ट अवे प्रोग्राम पर क्या हैं नियम?
छात्र विदेशी विश्वविद्यालय में एक सेमेस्टर की पढ़ाई करेंगे और वहां अर्जित क्रेडिट डीयू में ट्रांसफर किए जा सकेंगे।
छात्र स्कॉलरशिप, मोबिलिटी ग्रांट और अन्य वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकेंगे।
डीयू और संबंधित कॉलेज जरूरत और मेरिट के आधार पर आर्थिक सहायता भी दे सकते हैं, यदि फंड उपलब्ध हो।
SAP पर भी हुआ विरोध
निर्वाचित सदस्यों ने इस योजना पर भी कई सवाल उठाए, जिसमें उनका कहना है कि, विदेशी संस्थान की फीस के साथ डीयू की नियमित फीस भी देनी होगी। यात्रा और रहने का खर्च छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा इसलिए यह योजना केवल आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। इसके साथ ही इससे उच्च शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलने की आशंका है।
डीयू ने लिए ये अन्य बड़े फैसले
कार्यकारी परिषद ने बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है, जो इस प्रकार हैं।
वर्ष 2025-26 के वार्षिक खातों को मंजूरी।
हॉल, हॉस्टल, प्रोविडेंट फंड और एनपीएस खातों को स्वीकृति।
एडहॉक और अस्थायी शिक्षकों के लिए पे प्रोटेक्शन का प्रावधान।
यह सुविधा 1 अप्रैल 2022 या उसके बाद नियमित नियुक्ति पाने वाले पात्र शिक्षकों को मिलेगी।
स्कूल ऑफ ऑपन लर्निंग (SOL) में एक वर्षीय PG कोर्स शुरू होंगे।
इन विषयों में शुरू होंगे एक वर्षीय पीजी कोर्सेस
एसओएल में निम्न विषयों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिसमें एमए हिन्दी, एमए हिस्ट्री, एमए पॉलिटिकल साइंस, एमए संस्कृत और एम कॉम शामिल हैं।
डीयू कर्मचारियों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम
कार्यकारी परिषद ने डीयू कर्मचारियों और संविदा कर्मियों के आश्रितों के लिए नई ग्रुप इंश्योरेंस योजना को भी मंजूरी दी।
मुख्य विशेषताओं में 20 लाख रुपये का बीमा कवर, स्कीम का ऑप्शन होना, 500 रुपये प्रति माह + GST प्रीमियम शामिल हैं।
वीसी योगेश सिंह का बड़ा लक्ष्य
बैठक के दौरान सदस्यों ने प्रोफेसर योगेश सिंह को दूसरे कार्यकाल के लिए कुलपति नियुक्त होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दुनिया के Top-200 विश्वविद्यालयों में शामिल होना है। उन्होंने बताया कि QS World University Rankings में DU की रैंकिंग 2022 में 521-530 बैंड से बढ़कर 2027 रैंकिंग में 322 तक पहुंच चुकी है।
