Delhi School New Rules 2026: दिल्ली के स्कूलों में कक्षा 9 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कई बड़े बदलाव लागू किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत छात्रों के लिए वोकेशनल एजुकेशन (कौशल विकास) को मुख्य विषय बनाया गया है। इसके साथ ही कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। नई व्यवस्था में गणित और विज्ञान में भी छात्रों को अपने स्तर के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी।
ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य पढ़ाई को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय छात्रों में कौशल, व्यावहारिक समझ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप क्षमता विकसित करना है।
कक्षा 9 में ये होंगे छह मुख्य विषय
संशोधित व्यवस्था के अनुसार कक्षा 9 के छह मुख्य विषयों में भाषा-1, भाषा-2, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और वोकेशनल एजुकेशन शामिल होंगे। यही विषय छात्रों की अकादमिक प्रगति और कक्षा 10 में प्रमोशन के लिए महत्वपूर्ण होंगे। वोकेशनल एजुकेशन को शामिल करने का मकसद विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही अलग-अलग व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल से परिचित कराना है।
तीसरी भाषा भी पढ़नी होगी
सीबीएसई के संशोधित नियमों के तहत 2026-27 में कक्षा 9 में पढ़ने वाले हर छात्र को तीन भाषाओं R1, R2 और R3 का अध्ययन करना होगा। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कक्षा 10 में 2026-27 के दौरान पढ़ने वाले छात्रों पर यह नया तीसरी भाषा नियम लागू नहीं होगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि इस बैच के लिए पुरानी दो-भाषा व्यवस्था जारी रहेगी।
दिल्ली के छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था में कक्षा 9 में पहुंचने वाले छात्रों को केवल पारंपरिक विषयों की पढ़ाई नहीं करनी होगी। उन्हें भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के साथ कौशल आधारित शिक्षा भी लेनी होगी।
इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्कूलों को छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और करियर विकल्पों को समझने में शुरुआती स्तर पर मदद मिलने की उम्मीद है।
गणित और विज्ञान में भी मिलेगा विकल्प
नई व्यवस्था में कक्षा 9 के छात्रों के लिए गणित और विज्ञान को लेकर भी बदलाव किया गया है। छात्रों को अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार एडवांस्ड लेवल मैथ्स और साइंस चुनने का विकल्प मिलेगा। इसका उद्देश्य छात्रों को एक ही स्तर की पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उनकी शैक्षणिक क्षमता के मुताबिक आगे बढ़ने का अवसर देना है।
AI और नई तकनीक पर भी जोर
संशोधित शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक से जुड़े मॉड्यूल को भी महत्व दिया गया है। यह बदलाव स्कूल शिक्षा को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। यानी आने वाले समय में छात्रों की पढ़ाई का फोकस केवल परीक्षा और अंक हासिल करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कौशल, तकनीक, भाषा और व्यावहारिक ज्ञान पर भी रहेगा।
CBSE की तीन भाषा नीति क्या है?
CBSE की नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। CBSE ने जून 2026 में जारी दिशानिर्देशों में कक्षा 9 के छात्रों के लिए इस व्यवस्था को स्पष्ट किया था। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुभाषी शिक्षा से जोड़ना और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना है।
बोर्ड परीक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
तीसरी भाषा को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा सवाल बोर्ड परीक्षा को लेकर है। CBSE की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार 2026-27 में कक्षा 9 में पढ़ रहे छात्रों के लिए तीसरी भाषा का स्कूल-स्तरीय अध्ययन जरूरी है, जबकि बोर्ड परीक्षा में इसके लागू होने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। CBSE ने अलग से स्पष्ट किया है कि 2026-27 में कक्षा 10 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा की कोई आवश्यकता नहीं है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या मायने?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यह है कि कक्षा 9 से ही छात्रों की पढ़ाई का दायरा व्यापक होगा। एक तरफ उन्हें तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, वहीं दूसरी ओर वोकेशनल और तकनीकी शिक्षा के जरिए उन्हें भविष्य के कौशल से जोड़ने की कोशिश होगी।
हालांकि, छात्रों के लिए अतिरिक्त विषय और तीसरी भाषा शुरुआत में पढ़ाई का बोझ बढ़ा सकते हैं। इसलिए स्कूलों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था को केवल एक अतिरिक्त विषय के तौर पर लागू करने के बजाय उसे व्यावहारिक और रुचिकर तरीके से पढ़ाया जाए।
