देशभर में तेजी से बढ़ रही फर्जी उच्च शिक्षण संस्थाओं को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को गंभीर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे संस्थानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है, जो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि छोटे शहरों और कस्बों के छात्र अक्सर ऐसे फर्जी संस्थानों के झांसे में आ जाते हैं। वे अपनी मेहनत, समय और पैसे खर्च करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जो रोजगार दिलाने में मददगार नहीं होती।

कोर्ट ने मांगा हलफनामा

हाईकोर्ट एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था, जिसे अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने दायर किया है। याचिका में देशभर, खासकर दिल्ली में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों और गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

अदालत ने केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पूछा कि फर्जी संस्थानों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

छात्रों का भविष्य हो रहा बर्बाद

पीआईएल पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, “ऐसे संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का समय, ऊर्जा और संसाधन बर्बाद हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जो उन्हें रोजगार योग्य नहीं बनाती।”

कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी कहा कि वे शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करें और जरूरी कदम उठाने को कहें।

दिल्ली सरकार से भी मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

अदालत ने इस मामले में दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा है, जिसमें कोर्ट ने पूछा कि फर्जी विश्वविद्यालयों की जांच के लिए बनाई गई समिति ने अब तक क्या जानकारी जुटाई है और किन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

कोर्ट ने आदेश दिया कि समिति की जांच और कार्रवाई से जुड़ी पूरी रिपोर्ट हलफनामे के रूप में पेश की जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।

स्थिति चौंकाने वाली

सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि स्थिति बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि कुछ फर्जी संस्थान कानून, व्यावसायिक और यहां तक कि मेडिकल कोर्स भी चला रहे हैं।

इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। यह जानकारी सभी के पास उपलब्ध है।”

सीबीआई जांच की मांग

याचिकाकर्ता शशांक देव सुधि ने अपनी जनहित याचिका में मांग की है कि, फर्जी विश्वविद्यालय घोषित संस्थानों पर आपराधिक कार्रवाई हो और ऐसे संस्थानों को तुरंत बंद किया जाए। पीआईएल में इन संस्थानों के संचालन में शामिल लोगों के खिलाफ सीबीआई जांच कराई जानें की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि फर्जी विश्वविद्यालयों का संचालन जनता के साथ धोखाधड़ी है और यह छात्रों के शिक्षा एवं रोजगार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

क्या सावधानी बरतें छात्र

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले छात्रों को संस्थान के यूजीसी से मान्यता प्राप्त होने,AICTE/NAAC/NMC जैसी संबंधित संस्थाओं की स्वीकृति, आधिकारिक वेबसाइट और मान्यता प्रमाणपत्र, पिछले अकादमिक रिकॉर्ड और यूजीसी की फर्जी फर्जी विश्वविद्यालय सूची की जांच कर लेनी चाहिए।