सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने एक अहम फैसले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE को निर्देश दिया है कि वह बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े खर्च, उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद, टेंडर प्रक्रिया और अन्य संबंधित जानकारियां “पॉइंट-वाइज और कैटेगरी-वाइज” तरीके से उपलब्ध कराए। यह जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई थी।

सीआईसी ने सीबीएसई द्वारा पहले दी गई जानकारी को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जहां जरूरी हो, वहां केवल वैध छूट के तहत ही जानकारी रोकी जा सकती है लेकिन उसका ठोस कारण बताना अनिवार्य है।

RTI आवेदन में क्या मांगी गई थी जानकारी?

यह मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है जिसमें वर्ष 2023–24 और 2024–25 के लिए सीबीएसई की कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित विवरण मांगे गए थे, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता (पेपर GSM), पेजों की संख्या और आकार, कुल खरीद लागत, कुल खर्च और GST भुगतान, टेंडर प्रक्रिया का विवरण और चयनित कंपनियों और दरों की जानकारी शामिल है।

CBSE का जवाब क्या था?

सीबीएसई ने कुछ तकनीकी जानकारी साझा की थी, जिसमें बताया गया कि उत्तर पुस्तिकाओं में पेपर क्वालिटी 60 GSM से 120 GSM तक थी, उत्तर पुस्तिकाओं में 8, 20, 32, 40 और 48 पेज होते हैं और आकार 22×28 सेमी और 37.5×54.5 सेमी था। हालांकि बोर्ड ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत उत्तर पुस्तिकाओं का वजन रिकॉर्ड में नहीं रखा जाता।

किन जानकारियों से किया गया इनकार?

CBSE ने कई महत्वपूर्ण जानकारियों को देने से इनकार किया, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद लागत, कुल संख्या और कुल खर्च, टेंडर प्रक्रिया का विवरण और कंपनियों के नाम और दरें शामिल हैं। बोर्ड ने इसे “कॉन्फिडेंशियल” और “सेंसिटिव” बताते हुए RTI Act की धारा 8(1)(d), 8(1)(e) और 8(1)(g) के तहत छूट का दावा किया। इसके अलावा, परीक्षा शुल्क और प्रैक्टिकल परीक्षा खर्च को भी अलग से देने से इनकार किया गया।

CIC की सख्त टिप्पणी

केंद्रीय सूचना आयोग की सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने कहा कि CBSE ने बिना उचित कारण बताए कई धाराओं के तहत जानकारी रोक दी। सीआईसी ने यह भी नोट किया कि CPIO (केंद्रीय जन सूचना अधिकारी) न तो सुनवाई में उपस्थित हुआ और न ही कोई लिखित जवाब दिया।

CIC का आदेश क्या है?

CIC ने अपने आदेश में कहा कि, सीबीएसई को आरटीआई आवेदन की दोबारा समीक्षा करनी होगी, जिसमें सभी उपलब्ध जानकारी “पॉइंट-वाइज” दी जाए। केवल वही जानकारी रोकी जाए जो कानून के तहत वास्तव में छूट प्राप्त हो।

धारा 10 के तहत गोपनीय हिस्सों को ब्लैक आउट किया जा सकता है और धारा 8(1)(d) के तहत इनकार करने पर ठोस कारण देना जरूरी है। CIC ने यह भी कहा कि सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता जरूरी है और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है।

सार्वजनिक हित बनाम गोपनीयता का मुद्दा

अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि यह मामला बड़े सार्वजनिक हित और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए जानकारी का खुलासा होना चाहिए। सीआईसी ने भी माना कि टेंडर प्रक्रिया और सरकारी खर्च जैसे मामलों में पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।