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डीयू एडमिशनः ‘आरक्षित श्रेणी में आवेदन करने वालों के प्रमाणपत्रों की हो जांच’

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कॉलेजों और विभागों में शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 22 मई से एमफिल व पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले के पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

Author नई दिल्ली | Published on: May 21, 2018 5:32 AM
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दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कॉलेजों और विभागों में शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 22 मई से एमफिल व पीएचडी पाठ्यक्रमों में दाखिले के पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। डीयू की विद्वत परिषद (एसी) के एक सदस्य ने कुलपति प्रोफेसर योगेश त्यागी को पत्र लिखकर आरक्षित श्रेणी में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के जाति प्रमाणपत्रों की जांच की मांग की है। एसी के सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन के मुताबिक, स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पहली कटऑफ सूची 19 जून को आनी है।

इससे पहले अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटे के तहत प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के जाति प्रमाणपत्रों की जांच होनी चाहिए। यह मांग इसलिए की जा रही है क्योंकि पिछले कई सालों में देखने में आया है कि कुछ छात्र फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश पा लेते हैं और वास्तविक रूप से दाखिला पाने के हकदार अभ्यर्थी वंचित रह जाते हैं। उनका कहना है कि कॉलेजों में दाखिले के समय एससी, एसटी और ओबीसी कोटे के जाति प्रमाणपत्रों की ठीक से जांच नहीं की जाती।

यही नहीं, इन प्रमाणपत्रों की जांच प्रवेश के बाद भी नहीं कराई जाती है। उन्होंने दाखिला समिति की बैठक में भी यह मांग की थी कि जाति प्रमाणपत्र और अन्य प्रमाण पत्रों की जांच के लिए हर कॉलेज में फोरेंसिक लैब बने और वहीं पर सर्टिफिकेट की जांच की जाए। उन्होंने बताया कि पहले एससी-एसटी वर्ग के छात्रों के दाखिले के लिए डीयू में केंद्रीकृत आधार पर पंजीकरण होता था। पंजीकरण कराने का पूर्ण दायित्व एससी-एसटी सेल का होता था। सेल पंजीकरण के बाद छात्रों के जाति प्रमाणपत्रों को जांच के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजता था। फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर छात्र का प्रवेश रद्द कर दिया जाता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है।

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