CBSE Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 9 में तीन भाषाएं अनिवार्य करने वाली नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अहम जानकारी दी है। केंद्र ने अदालत को बताया कि तीन भाषा नीति को लागू करने के तौर-तरीकों पर काम किया जा रहा है। CBSE भी इसके लिए जरूरी व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी है।
यह मामला ऐसे समय में अहम है जब सीबीएसई पहले ही शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर चुका है। नई व्यवस्था के तहत तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा?
गुरुवार को हुई सुनवाई में केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सीबीएसई नीति को लागू करने के संबंध में अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहा है और इसके लिए आवश्यक तौर-तरीके तैयार किए जा रहे हैं।
अदालत ने केंद्र की इस दलील को रिकॉर्ड में लिया और सुनवाई को एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में भी इस बात पर चिंता जताई थी कि नई भाषा व्यवस्था लागू करते समय छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
बच्चों पर न बढ़े पढ़ाई का बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त को कहा था कि तीन भाषा नीति लागू करने में समस्या नीति के उद्देश्य से ज्यादा उसके अमल के तरीके को लेकर है। अदालत ने यह भी कहा था कि अतिरिक्त भाषाएं शुरू करने वाले स्कूलों में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक और जरूरी संसाधन उपलब्ध होने चाहिए। अलग-अलग भारतीय भाषाओं के लिए मानव संसाधन तैयार करना भी बड़ी चुनौती हो सकती है।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया था कि भाषा नीति को किस कक्षा से लागू किया जाना चाहिए और अलग-अलग बोर्डों में इसका संचालन किस तरह होगा। मामले में याचिकाकर्ताओं ने CBSE की नीति को चुनौती दी है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा था।
नई तीन भाषा नीति क्या है?
सीबीएसई के 29 जून 2026 के आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। सीबीएसई ने इस व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप बताया है।
भाषाओं को R1, R2 और R3 के रूप में समझा जा सकता है। विद्यार्थी द्वारा चुनी जाने वाली तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं रखना जरूरी है। कुछ परिस्थितियों में गैर-भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर चुनने की अनुमति है, बशर्ते बाकी दो भाषाएं भारतीय भाषाएं हों।
कौन-कौन सी भाषाएं चुनी जा सकती हैं?
सीबीएसई ने भारतीय भाषाओं के उदाहरण के तौर पर हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओड़िया और असमिया सहित कई भाषाओं को शामिल किया है।
वहीं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी गैर-भारतीय भाषाओं को अलग श्रेणी में रखा गया है। सीबीएसई ने छात्रों के लिए कुल 23 भाषा विकल्प उपलब्ध कराने की जानकारी दी है।
अगर कोई छात्र पहले से हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा के रूप में वह एक अन्य भारतीय भाषा या किसी गैर-भारतीय भाषा का विकल्प चुन सकता है। अगर छात्र तमिल और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो तीसरी भाषा के तौर पर उसे भारतीय भाषा चुननी होगी।
वहीं जिन कक्षा 9 के विद्यार्थियों ने पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं ले रखी हैं, उनके लिए सीबीएसई ने संक्रमण अवधि में विशेष छूट का प्रावधान किया है। ऐसे विद्यार्थी दोनों भाषाएं जारी रखते हुए तीसरी भाषा के तौर पर एक भारतीय भाषा ले सकते हैं।
अभी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
छात्रों और अभिभावकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा कक्षा 9 बैच के लिए तीसरी भाषा को लेकर सीबीएसई ने परीक्षा का बोझ सीमित रखा है। बोर्ड की गाइडलाइंस के मुताबिक 2026-27 में कक्षा 9 में पढ़ रहे विद्यार्थियों की तीसरी भाषा स्कूल आधारित आंतरिक मूल्यांकन के जरिए आंकी जाएगी। जब यह बैच कक्षा 10 में पहुंचेगा, तब R3 के लिए CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका उद्देश्य नई भाषा सीखने का अवसर देने के साथ विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा दबाव को कम रखना है।
कक्षा 10 के मौजूदा छात्रों को राहत
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि 2026-27 में कक्षा 10 में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया है। ये विद्यार्थी पुरानी दो-भाषा प्रणाली के तहत ही पढ़ाई जारी रखेंगे। इस बैच के लिए तीसरी भाषा लेना अनिवार्य नहीं है। इसका मतलब है कि नई व्यवस्था का तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से कक्षा 9 और नीचे की कक्षाओं के आगामी बैचों पर पड़ेगा।
तीसरी भाषा की किताबों को लेकर भी व्यवस्था
नई व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर में तीसरी भाषा की अलग किताबों को लेकर भी सवाल उठे हैं। CBSE के मुताबिक जब तक कक्षा 9 के लिए समर्पित R3 पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक कक्षा 6 की R3 किताबों के 2026-27 संस्करण का इस्तेमाल किया जाएगा। सीबीएसई और एनसीईआरटी आगे विद्यार्थियों के लिए उम्र और कक्षा के स्तर के अनुरूप सीखने की सामग्री उपलब्ध कराने की बात कह चुके हैं।
असली चुनौती क्या है ?
तीन भाषा नीति पर सबसे बड़ा व्यावहारिक सवाल शिक्षकों को लेकर है। अगर किसी स्कूल में किसी भारतीय भाषा को पढ़ाने वाला पर्याप्त शिक्षक नहीं है तो विद्यार्थियों को उस भाषा का विकल्प उपलब्ध कराना चुनौती बन सकता है।
सीबीएसई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में बताया था कि उसके 28,848 संबद्ध स्कूलों में से 47.3 प्रतिशत स्कूल पहले से ही कक्षा 9 में दो या उससे अधिक भारतीय भाषाएं उपलब्ध करा रहे हैं। बोर्ड के मुताबिक 99.19 प्रतिशत स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा शिक्षक मौजूद है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर स्कूल में हर भारतीय भाषा के लिए शिक्षक उपलब्ध है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने भाषा शिक्षकों और मानव संसाधन की उपलब्धता को नीति के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण चुनौती माना है।
तीन भाषा नीति क्यों लाई गई?
सीबीएसई का कहना है कि यह बदलाव नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के अनुरूप किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में बहुभाषी सीखने को बढ़ावा देना और भारतीय भाषाओं के अध्ययन को मजबूत करना है।
एनईपी 2020 में भी भारतीय भाषाओं और बहुभाषिकता को शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय की एनईपी सामग्री में भारतीय भाषाओं के संरक्षण और उनके अध्ययन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?
कुछ अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से सीबीएसई की तीन भाषा नीति को चुनौती दी गई है। याचिका में नीति के अचानक लागू होने, शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता तथा छात्रों पर संभावित अतिरिक्त बोझ जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने बोर्ड के इस फैसले को कानूनी आधार पर भी चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को याचिका पर विचार करते हुए केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा था। अदालत ने बाद की सुनवाई में यह स्पष्ट किया कि भाषा सीखने के विचार में उसे समस्या नहीं दिखती, लेकिन इसे लागू करने का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल केंद्र और सीबीएसई सुप्रीम कोर्ट की ओर से उठाए गए सवालों और सुझावों के आधार पर कार्यान्वयन की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी है।
इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि वे अफवाहों के आधार पर भाषा विषय में बदलाव न करें। स्कूल द्वारा दिए गए निर्देशों और CBSE की आधिकारिक गाइडलाइंस के आधार पर ही विषय चयन करें।
फिलहाल यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है और केंद्र द्वारा कार्यान्वयन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर काम किए जाने की जानकारी दी गई है। इसलिए नीति में आगे कोई बदलाव या नई व्यवस्था आती है तो उसकी पुष्टि CBSE और सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक अपडेट से ही करनी चाहिए।
