केंद्र सरकार देशभर के स्कूलों और कॉलेजों में ‘सेक्स एजुकेशन’ को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। सोमवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह किशोरों की शिक्षा पर नेशनल एक्सपर्ट कमिटी के प्रस्तावों को मानने के लिए सहमत हो गई है और सुप्रीम कोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद केंद्र इस प्रोग्राम को लागू करेगा।
क्लास 6वीं से मिलेगी सेक्स एजुकेशन!
केंद्र सरकार की एक्सपर्ट कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में क्लास 6 से ग्रेडेड सिस्टम के तहत किशोरों की शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें शुरुआती स्टेज से ही पर्सनल सेफ्टी, बॉडी अवेयरनेस, हाइजीन और सेफ और अनसेफ टच पर उम्र के हिसाब से जानकारी देना शामिल है। लंबे समय से इस विषय को लेकर समाज में बहस चल रही है कि क्या स्कूलों में ‘सेक्स एजुकेशन’ को लागू किया जाना चाहिए या फिर नहीं? लंबे समय से ये मांग उठ रही है कि बच्चों को सही उम्र में वैज्ञानिक एवं जागरूकता आधारित जानकारी देने की दिशा में काम किया जाए।
NCERT को सिलेबस तैयार करने का सुझाव दिया गया
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा गठित 26 सदस्यीय एक्सपर्ट पैनल ने स्कूलों में व्यापक सेक्स एजुकेशन और बच्चों को यौन शोषण से बचाव से जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है। साथ ही, NCERT को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप इसका पाठ्यक्रम तैयार करने का सुझाव भी दिया गया है। रिपोर्ट में प्राथमिक स्तर से ही प्रशिक्षित विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से सप्ताह में दो बार 20 मिनट की कक्षाएं आयोजित करने की सिफारिश की गई है, ताकि बच्चों को उनके शरीर, सुरक्षा, सहमति (Consent) और यौन शोषण से बचाव जैसे विषयों की उम्र के अनुरूप वैज्ञानिक जानकारी दी जा सके।
पोक्सो को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने जताई चिंता
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पोक्सो (POCSO)के कथित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि खासकर 16 से 18 साल के किशोरों के आपसी सहमति वाले संबंधों से जुड़े मामलों में चिंता जताई है। ऐसे मामलों को देखते हुए एक्सपर्ट पैनल ने जागरूकता बढ़ाने और व्यापक यौन शिक्षा को समय की जरूरत बताया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सेक्स एजुकेशन को लेकर क्या-क्या टिप्पणी की?
- सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सितंबर 2024 में कहा था कि हम अपने बच्चों को जितनी जल्दी सही यौन शिक्षा के बारे में बताएंगे उतनी ही जल्दी बच्चे यौन संबंध नहीं बनाएंगे बल्कि अधिक जिम्मेदार और सुरक्षित व्यवहार अपनाएंगे। कोर्ट ने इस दौरान वैज्ञानिक रिसर्च का हवाला देते हुए ये बात कही थी।
- कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में कहा था कि सेक्स एजुकेशन कक्षा 9 से शुरू करना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को कम उम्र से ही इसकी जानकारी देनी चाहिए। इससे बच्चों को प्यूबर्टी के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों को समझने में मदद मिलेगी।
- सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने NCERT और SCERT से जवाब तलब करते हुए कहा था कि व्यापक यौन शिक्षा को किताबों में शामिल करने संबंधी निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ है। कोर्ट ने इस दिशा में प्रोग्रेसिव रिपोर्ट मांगी थी।
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