केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद जो बवाल खड़ा हुआ है वह अभी थमता नहीं दिख रहा क्योंकि बोर्ड ने ‘पोस्ट-रिजल्ट सर्विस पोर्टल’ से जुड़े कुछ आंकड़े शेयर किए हैं, जिनको लेकर घमासान और बढ़ सकता है। दरअसल, बोर्ड ने बताया है कि कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन और वेरिफिकेशन के लिए 1.6 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया है। सीबीएसई बोर्ड ने बताया कि 2 जून से 7 जून तक खुली वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन विंडो के दौरान 1.6 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने 3.8 लाख से अधिक आंसर शीट से जुड़ी रिक्वेस्ट सबमिट की है।
बोर्ड की री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर हुए साइबर हमले
CBSE के मुताबिक, सरकारी टेक्निकल एजेंसियों और IITs की टीमों की देखरेख में चलाई गए री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया नोटिफाइड टाइमलाइन के दौरान एक्टिव रही। इस दौरान बोर्ड ने गलत ट्रैफिक और साइबर हमलों को रोकने के लिए डेडिकेटेड साइबर सिक्योरिटी टीमों की मदद से सिस्टम पर लगातार नजर बनाए रखी। इसने यह भी कहा कि प्रोसेस के दौरान स्टूडेंट्स की मदद के लिए हेल्पडेस्क और शिकायत सुलझाने के तरीके मौजूद रहे।
CBSE द्वारा जारी पहले के डेटा से पता चला है कि क्लास 12 के रिजल्ट घोषित होने के बाद 11,31,961 स्टूडेंट्स ने आंसर बुक की स्कैन कॉपी मांगी थी। ये रिक्वेस्ट 4,04,319 आंसर की के लिए आई थी। 26 मई तक, बोर्ड ने पहले ही 8,98,214 आंसर बुक डिजिटली दे दी थीं और कहा था कि बाकी रिक्वेस्ट अगले दिन तक पूरी कर दी जाएंगी।
नए जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि स्टूडेंट्स ने शुरू में 11.3 लाख से ज़्यादा आंसर बुक की कॉपी मांगी थीं, लेकिन बाद में सिर्फ़ लगभग 3.8 लाख आंसर बुक को ही देखी गई दिक्कतों के वेरिफिकेशन और आंसर्स के री-इवैल्यूएशन के लिए आगे बढ़ाया गया। आसान भाषा में इसे समझें तो जिन तीन आंसर बुक की स्कैन्ड कॉपी स्टूडेंट्स ने मांगी थीं, उनमें से लगभग एक आखिरकार वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन प्रोसेस का हिस्सा बन गई।
