केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए बनाए गए परीक्षक पोर्टल पर अंतिम सुरक्षा मंजूरी मिल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) की अगुवाई में हुई साइबर सुरक्षा समीक्षा के अंतिम चरण के परीक्षण शुक्रवार रात पूरे हो गए, जिसके बाद पोर्टल को सुरक्षित घोषित कर दिया गया।
इस मंजूरी के साथ ही छात्रों द्वारा जमा किए गए री-इवैल्यूएशन अनुरोधों पर कार्रवाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों के अनुसार, किसी भी नई तकनीकी समस्या की स्थिति में IIT की विशेषज्ञ टीमें निगरानी और सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगी।
IIT टीमों ने किया अंतिम सुरक्षा परीक्षण
सीबीएसई को अपने पोस्ट रिजल्ट एक्टिविटीज (PRA) पोर्टल के लॉन्च में देरी करनी पड़ी थी, जिसमें आईआईटी के विशेषज्ञों ने बोर्ड की डिजिटल प्रणाली में कई गंभीर सुरक्षा खामियों की पहचान की थी। इसके बाद CBSE ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए पहले इस्तेमाल किए जा रहे Coempt EduTeck प्लेटफॉर्म का उपयोग न करने का फैसला लिया।
इसके बजाय छात्र और परीक्षा संबंधी डेटा को सीधे सीबीएसई के नियंत्रण वाले सर्वरों पर स्थानांतरित किया गया तथा पूरी प्रक्रिया को बोर्ड की अपनी डिजिटल प्रणाली पर पुनः डिजाइन किया गया।
‘रेड टीम-ब्लू टीम’ मॉडल से हुई सुरक्षा जांच
सुरक्षा ऑडिट के दौरान “रेड टीम-ब्लू टीम” पद्धति अपनाई गई। इसमें ब्लू टीम में CBSE के डेवलपर्स, IIT मद्रास और डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC) के विशेषज्ञ शामिल थे।
रेड टीम में आईआईटी कानपुर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल थे, जिनका कार्य सिस्टम में कमजोरियों की पहचान करना था।
सूत्रों के अनुसार, अंतिम परीक्षण के दौरान कोई बड़ी सुरक्षा खामी नहीं मिली। विशेषज्ञों ने कहा कि जो भी महत्वपूर्ण कमियां पहले सामने आई थीं, उन्हें दूर कर दिया गया है।
अब परीक्षक देख सकेंगे छात्रों के अनुरोधित प्रश्न
परीक्षकों के लिए बनाया गया पोर्टल अभी तक सुरक्षा मंजूरी के अभाव में सक्रिय नहीं हो पाया था। हालांकि 2 जून को PRA पोर्टल लॉन्च होने के बाद छात्र अपने री-इवैल्यूएशन आवेदन जमा कर रहे थे।
अब सीबीएसई परीक्षकों को पोर्टल एक्सेस देने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, परीक्षक पूरी उत्तर पुस्तिका की बजाय केवल उन्हीं प्रश्नों को देख सकेंगे जिन्हें छात्र ने पुनर्मूल्यांकन के लिए चुना है।
डिजिटल मोड में होगी पूरी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया
री-इवैल्यूएशन पूरी तरह डिजिटल तरीके से किया जाएगा। परीक्षक टैबलेट पर स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं देखेंगे और CBSE की मूल मूल्यांकन योजना के अनुसार अंक देंगे। विशेष बात यह है कि पुनर्मूल्यांकन करने वाले परीक्षक को मूल परीक्षक द्वारा दिए गए अंक दिखाई नहीं देंगे। इससे मूल्यांकन स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो सकेगा तथा पक्षपात की संभावना कम होगी।
शिक्षा मंत्रालय को सौंपी जाएंगी नई सिफारिशें
आईआईटी की विशेषज्ञ टीमें अब शिक्षा मंत्रालय और CBSE के लिए विस्तृत सिफारिशें तैयार कर रही हैं। इनमें भविष्य में विकसित होने वाले सभी परीक्षा सॉफ्टवेयर में शुरुआती चरण से ही साइबर सुरक्षा मानकों को शामिल करने पर जोर दिया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिए जाने की संभावना है कि किसी भी परीक्षा संबंधी सॉफ्टवेयर को लागू करने से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा “रेड-टीमिंग” सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए।
छात्रों के लिए क्या है इसका मतलब?
सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए यह बड़ी राहत है। सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद अब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ सकेगी और छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष दोबारा जांच का अवसर मिलेगा।
