केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसके OnMark पोर्टल में साइबर सुरक्षा संबंधी कमजोरियां सामने आई थीं। यह पोर्टल CBSE की On-Screen Marking (OSM) प्रणाली का हिस्सा है, जिसका इस्तेमाल Class 12 बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन के लिए किया जाता है।
बोर्ड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह सार्वजनिक मंचों पर सामने आई इन कमजोरियों पर लगातार नजर बनाए हुए था और इन्हें ठीक करने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों और IITs के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है।
CBSE ने क्या कहा?
CBSE ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, “OnMark पोर्टल में चिन्हित की गई कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और अन्य संभावित खामियों की भी जांच की जा रही है।”
बोर्ड ने उन एथिकल हैकर्स और नागरिकों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने समय रहते इन समस्याओं की जानकारी दी। साथ ही CBSE ने अन्य लोगों से भी तकनीकी खामियों की जानकारी साझा करने के लिए secy-cbse@nic.in पर संपर्क करने को कहा है।
कैसे सामने आया मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब साइबर रिसर्चर निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि OnMark पोर्टल का लिंक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था। उन्होंने बताया कि ब्राउज़र द्वारा डाउनलोड किए जा रहे JavaScript कोड का विश्लेषण करने पर उन्हें कई गंभीर सुरक्षा खामियां मिलीं, जिनके जरिए कथित तौर पर एग्जामिनर अकाउंट टेकओवर तक संभव था।
उन्होंने इस संबंध में CERT को रिपोर्ट करने के बाद विस्तृत ब्लॉग पोस्ट प्रकाशित कर अपने निष्कर्ष सार्वजनिक किए।
5,000 ब्लर्ड स्कैन और 23 गलत उत्तर पुस्तिकाएं
मामला केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE इस साल लागू की गई नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को संभाल रही हैदराबाद स्थित कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड पर आर्थिक जुर्माना लगाने पर विचार कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, 5,000 उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन धुंधले पाए गए और 23 मामलों में छात्रों को किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी भेजी गई। यह गड़बड़ियां सीधे तौर पर मूल्यांकन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
पहली बार लागू हुआ था पूरी तरह डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम
सीबीएसई ने 2026 में पहली बार Class 12 बोर्ड परीक्षा के लिए पूरी तरह डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था।
इस प्रक्रिया के तहत, 18 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों का मूल्यांकन हुआ और करीब 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप से जांचा गया। इतने बड़े स्तर पर लागू इस सिस्टम में सामने आई तकनीकी खामियों ने बोर्ड की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Coempt Edutech पर लग सकता है भारी जुर्माना
CBSE की एक विशेष समिति अब इन तकनीकी त्रुटियों की गंभीरता का आकलन करेगी। इसी आधार पर तय किया जाएगा कि Coempt Edutech Pvt Ltd पर कितनी वित्तीय पेनल्टी लगाई जाए। अगर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है कि क्या मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रही। हालांकि CBSE ने भरोसा दिलाया है कि साइबर कमजोरियों को नियंत्रित कर लिया गया है और परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।
