केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद बोर्ड का ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानि OSM सिस्टम चलाने वाली कंपनी COEMPT की भागीदारी भी लगातार सवालों के घेरे में है। सबसे पहले पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस कंपनी का जिक्र मीडिया के सामने किया था और अब झारखंड के 17 वर्षीय स्टूडेंट सार्थक सिंद्धांत ने इस कंपनी की पूरी कुंडली खोज निकाली है। उन्होंने कुछ दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाया है कि सीबीएसई बोर्ड ने Coempt कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर के नियम बदले थे। सार्थक के आरोपों ने इस मामले में नया मोड़ ला दिया है।

स्टूडेंट ने COEMPT पर लगाए गंभीर आरोप

सार्थक सिद्धांत का कहना है कि मैंने एक ब्लॉग लिखा है जिसमें CBSE के टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना की गई है। मैंने इसे अपलोड और पब्लिश भी किया है। मेरे ब्लॉग के अनुसार, कम से कम 15 ऐसी डिफिशिएंसी हैं जो यह बताती हैं कि इस कंपनी को टेंडर देने के लिए टेंडरिंग के नियमों में बदलाव किया गया था इनमें से 3-4 डिफिशिएंसी का जिक्र मैं यहां कर रहा हूं। सार्थक का कहना है कि सबसे पहले पहले Coempt के बैकग्राउंड के बारे में बताता हूं, यह कंपनी पहले Globarena नाम से थी और इसी कंपनी की वजह से तेलंगाना में 23 स्टूडेंट्स ने सुसाइड किया था।

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स्टूडेंट की वह बातें जो कंपनी पर उठाती है सवाल

सार्थक का दावा है कि COEMPT कंपनी को फायदा देने के लिए Request For Proposal यानि RFP के नियमों में बदलाव किए गए। सार्थक ने कहा है, “सरकार की ओर से एक टेंडर जारी किया गया और बिडर से इसके लिए बिड करने को कहा गया। CBSE ने यह टेंडर तीन बार जारी किया… मैंने पुराने RFP और नए RFP की तुलना की है और मुझे कुछ अंतर मिले।

पहला अंतर यह है कि खराब परफॉर्मेंस के तीन क्लॉज थे जिन्हें नए RFP से पूरी तरह हटा दिया गया था। पहले के RFP में ब्लैकलिस्टेड नाम का एक क्लॉज था, जबकि नए RFP में इसे बदलकर ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। बोर्ड ऐसा सर्विस प्रोवाइडर क्यों चाहेगा जो पहले ब्लैकलिस्ट किया गया था?

RFP यानि Request For Proposal में कहा गया कि तीन साल का औसत कंपनी का टर्न ओवर 50 करोड़ के आसपास होना चाहिए जबकि COEMPT का फाइनेंशियल लॉग शीट (financial log sheet) देखकर पता चलता है कि यह कम था। TCS हजारों करोड़ की मल्टीनेशनल कंपनी है, दूसरा रंकगुरु टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस (Rankguru Technology) का सालाना टर्न ओवर 117.56 करोड़ का है जबकि Coempt कंपनी की शीट से पता चलता है कि मार्च 2023 में कंपनी का सालाना टर्न ओवर 32.1 करोड़ और मार्च (march) 2024 में 52.7 करोड़ था।

मार्च 2025 में कंपनी का टर्नओवर 67.8 करोड़ था। तीनों साल का टर्नओवर मिलाने पर औसत टर्नओवर 50.86 हो रहा था यानि बहुत कम अंतर से ये कंपनी बिड के लिए क्वालिफाई कर पाई थी जबकि इससे पहले वाली RFP में एक दूसरी कंपनी Shree Info Solution ने CBSE से 30 करोड़ रुपए सलाना टर्नओवर रखने को कहा था, लेकिन ये मांग खारिज कर दी गई थी।