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CBSE 10th Result 2017: इस आसान तरीके से समझें सीबीएसई का ग्रेडिंग सिस्टम, क्या हैं आपके ग्रेड के मायने

CBSE 10th Result 2017: सीबीएसई ने 10वीं कक्षा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की है, जिसके तहत छात्रों को उनके प्रतिशत बताने की बजाए उन्हें ग्रेड देता है। इस प्रणाली के तहत छात्रों को उनके प्रमाणपत्र में पास या फेल नहीं बल्कि ग्रेड लिखा होगा।

CBSE 10th Result 2017: बोर्ड ने इस साल 9 मार्च से 10 अप्रेल के बीच इस परीक्षा का आयोजन किया था

सीबीएसई ने 10वीं कक्षा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू की है, जिसके तहत छात्रों को उनके प्रतिशत बताने की बजाए उन्हें ग्रेड देता है। इस प्रणाली के तहत छात्रों को उनके प्रमाणपत्र में पास या फेल नहीं बल्कि ग्रेड लिखा होगा। बता दें, एक्सटर्नल पेपरों में नाइन प्वाइंट स्केल सिस्टम होता है वहीं इंटर्नल एग्जाम में फाइव प्वाइंट स्केल A,B,C,D & E सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ग्रेड प्रणाली शुरू होने के बाद कई छात्रों में इसको लेकर कंफ्यूजन बना रहता है। आज हम आपके बताएंगे क्या है ग्रेड प्रणाली।

इस प्रणाली के तहत 91 से 100 प्रतिशत पाने वाले छात्र को A ग्रेड, 81 से 90 प्रतिशत पाने वाले छात्र को A2 ग्रेड, 71 से 80 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र को B1 ग्रेड, 61 से 70 प्रतिशत अंक वाले छात्र को B2 ग्रेड , 51 से 60 प्रतिशत अंक लेने वाले छात्र को C1 ग्रेड, 41 से 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र को C2 ग्रेड , 40 से 49 प्रतिशत अंक छात्र को C3 ग्रेड, 33 से 39 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र को E1 ग्रेड तथा 33 प्रतिशत से कम अंक लेने वाले छात्र को E2 ग्रेड दिया जाएगा।

इस सिस्टम के कई शिक्षक खुश नहीं हैं। शिक्षको का कहना है यह सिस्टम लागू होने के बाद किसी विषय की व्यक्तिगत परफॉर्मेंस पर ध्यान नहीं दिया जाता बल्कि सामूहिक परफॉर्मेंस को प्राथमिकता दी जाती है। जो छात्रों के लिए सही नहीं है। इस सिस्टम से सबसे बड़ी समस्या जो आने वाली है वो है री-इवैल्यूशन की, जिसमें काफी मुश्किल आ सकती है।

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