ताज़ा खबर
 

शिक्षा से ज्यादा परीक्षा बोर्ड बना सीबीएसई

पिछले दिनों सीबीएसई की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय को इस संबंध में बताते हुए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को आयोजित करने में असमर्थता भी जताई थी।

Author May 25, 2017 03:09 am
सीबीएसई के मुताबिक नये नियमों से शिक्षा प्रणाली में एकरुपता आएगी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई शिक्षा से ज्यादा परीक्षा बोर्ड बनता जा रहा है। विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की वजह से बोर्ड अतिरिक्त दबाव में रहता है। बोर्ड हर वर्ष कक्षा 10 और 12 के 27 लाख से अधिक बच्चों की परीक्षाएं आयोजित करता है जो उसका प्रमुख कार्य है। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर वर्ष औसतन 68 लाख उम्मीदवार बोर्ड के पास पंजीकरण कराते हैं।  पिछले दिनों सीबीएसई की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय को इस संबंध में बताते हुए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को आयोजित करने में असमर्थता भी जताई थी। इसके बाद काफी विद्यार्थियों ने इसे लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद मंत्रालय का कहना है कि सभी परीक्षाएं जिस रूप में आयोजित हो रही हैं, उसी तरह आयोजित होती रहेंगी। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक कि राष्ट्रीय टेस्टिंग एजंसी बनकर कार्य न करने लगे।

सीबीएसई ने प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के लिए अलग से विभाग बनाए हुए हैं जिसमें बड़ी संख्या में बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई हैं। इसकी वजह से अधिकारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ है हालांकि इस संबंध में खुलकर कोई सामने नहीं आता है। सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की पूर्व सदस्य उषा राम का कहना है कि बोर्ड पर कक्षा 10 और 12 के पाठ्यक्रम, शिक्षकों के प्रशिक्षण, स्कूलों की मान्यता, बोर्ड परीक्षाओं आदि का पहले से काफी काम होता है। दूसरी, ओर प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन की वजह से बोर्ड अधिकारियों को अपना प्रमुख काम करने का मौका बहुत कम मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसा मैंने कई बार महसूस किया है। गौरतलब है कि सीबीएसई के पूर्व चेयरमैन आरके चतुर्वेदी भी कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव की बात करते रहे हैं।
बेहतर गुणवत्ता की शिक्षा देना बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य

गुणवत्ता में कोई समझौता किए बिना सभी बच्चों को तनाव मुक्त, बाल केंद्रित और समग्र शिक्षा प्रदान करने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों के उचित दृष्टिकोण को परिभाषित करना।  विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया एकत्रित करके अकादमिक गतिविधियों की गुणवत्ता का विश्लेषण और निगरानी करना। गुणवत्ता संबंधी मुद्दों सहित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए मानदंडों का विकास करना, बोर्ड के विभिन्न अकादमिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को नियंत्रित और समन्वय करना और शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और इस प्रक्रिया में शामिल अन्य एजंसियों की निगरानी करना।
मनोवैज्ञानिक, शैक्षिणक और सामाजिक सिद्धांतों के अनुरूप शैक्षणिक प्राप्त करने के लिए तरीकों को अनुकूल और नया करना।
– स्कूलों को शिक्षक और विद्यार्थियों के अनुकूल तरीकों से छात्रों की प्रगति का दस्तावेजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करना।
– राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप स्कूल शिक्षा में गुणवत्ता मानक प्राप्त करने की योजनाओं का प्रस्ताव देना।
– शिक्षकों की योग्यता को बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षमता निर्माण और सशक्तीकरण कार्यक्रमों का आयोजन करना।
– परीक्षाओं की शर्तों का निर्धारण करना और संबद्ध स्कूलों के कक्षा 10 एवं 12 के विद्यार्थियों की साल के अंत में परीक्षा लेना और सफल विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र जारी करना।
– ऐसे अभिभावकों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना जिनका समय-समय पर ट्रांसफर होता रहता है।
– परीक्षा के निर्देशों को निर्धारण और उनमें समय-समय पर सुधार।
– संबद्ध संस्थाओं की परीक्षाओं के लिए देश के शैक्षिक मानकों में सुधार।
(स्रोत : सीबीएसई की वेबसाइट)

एक साल में बोर्ड के पास पंजीकृत उम्मीदवार 

309 स्कूल वर्ष 1962 में सीबीएसई से जुड़े हुए थे
18,694 स्कूल 31 मार्च 2017 तक सीबीएसई से संबद्ध थे
1,117 केंद्रीय विद्यालय
2,720 सरकारी या सरकारी की ओर से सहायता प्राप्त स्कूल
14,253 निजी स्कूल
590 जवाहर नवोदय विद्यालय
14 केंद्रीय तिब्बतीय स्कूल
211 स्कूल 25 अन्य देशों में भी बोर्ड से जुड़े हुए हैं
(स्रोत : सीबीएसई की वेबसाइट)

आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई सुरक्षा की गुहार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App