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अवसर: पर्यावरण की सेहत के साथ अपना भविष्य संवारें

वर्तमान में पर्यावरण विज्ञानियों की मांग काफी बढ़ गई है और इस क्षेत्र में करिअर बनाना फायदेमंद हो सकता है। इसकी मांग बढ़ने के पीछे बढ़ते औद्योगीकरण, आर्थिक विकास और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों का हाथ है।

Author February 14, 2019 6:19 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

सतत औद्योगिक विकास और जनसंख्या विस्फोट के चलते विश्व के बरक्स पर्यावरण प्रदूषण के रूप में एक भयावह स्थिति उत्पन्न होती जा रही है। इस संदर्भ में पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए पर्यावरण प्रबंधन एक अति आवश्यक विषय बन गया है। इसके लिए पर्यावरणविदों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। पर्यावरणविदों से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों को समझता हो और पर्यावरण प्रबंधन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली उन्नत तकनीकों से परिचित हो। पर्यावरण विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के लिए बढ़ते रोजगार के विकल्प इस विषय की समझ रखने वाले विशेषज्ञों का भविष्य सुरक्षित बनाते हैं। इस क्षेत्र में भविष्य की संभावनाएं तलाश रहे युवाओं के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में पर्यावरण विज्ञानियों की मांग काफी बढ़ गई है और इस क्षेत्र में करिअर बनाना फायदेमंद हो सकता है। इसकी मांग बढ़ने के पीछे बढ़ते औद्योगीकरण, आर्थिक विकास और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों का हाथ है।

स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए अभ्यर्थी का विज्ञान विषयों (जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान) के साथ 12वीं कक्षा में पास होना जरूरी है। इस पाठ्यक्रम की अवधि तीन साल है। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए आवेदक के पास विज्ञान विषयों में स्नातक डिग्री होनी चाहिए। इस पाठ्यक्रम की अवधि दो साल होती है। स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए विश्वविद्यालय अलग-अलग तरीका अपनाते हैं। कुछ कक्षा 12 के अंकों के आधार पर प्रवेश देते हैं जबकि कुछ अन्य प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला देते हैं। जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय 12वीं के अंकों के आधार पर जारी कटआॅफ से दाखिला देता है।

पाठ्यक्रम
पर्यावरण अध्ययन सर्टिफिकेट
पर्यावरण विज्ञान सर्टिफिकेट
पर्यावरण कानून डिप्लोमा
पर्यावरण संरक्षण डिप्लोमा
पर्यावरण अध्ययन डिप्लोमा
बीएससी पर्यावरण प्रबंधन
बीएससी पर्यावरण विज्ञान
बीएससी पर्यावरण अध्ययन एवं जल प्रबंधन
एमएससी पर्यावरण विज्ञान
पीजी डिप्लोमा पर्यावरण एवं सतत विकास
एमफिल पर्यावरण विज्ञान
पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में रोजगार की अनेकों संभावनाएं हैं। निजी और सरकारी क्षेत्रों के साथ ही बढ़ते उद्योग भी युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं। इन संस्थानों में वे शोध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास की दिशा में अग्रसर वैश्विक संगठन पर्यावरणविदों को आकर्षक पैकेज की पेशकश कर रहे हैं। वातावरण को सुरक्षित रखने में पर्यावरण इंजीनियर और वैज्ञानिक बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। बहुत से पर्यावरण विज्ञानी और जीव विज्ञानी किसी कपड़ा मिल, रिफाइनरी, फर्टिलाइजर प्लांट, खाद्य प्रसंस्करण, डिस्टलरी, खान और संबंधित प्रतिष्ठानों में नियुक्त किए जाते हैं।

वातावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) भी बड़ी संख्या में पर्यावरणविदों को नौकरी देते हैं। इसके अलावा कई पेशेवर कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण का कार्य भी कर सकते हैं। साथ ही मीडिया क्षेत्र भी ऐसे युवाओं को बतौर पर्यावरण पत्रकार नियुक्त करता है।जो लोग फ्रीलांसिंग कर रहे हैं या जिन्होंने अपनी खुद की फर्म स्थापित की है, उनके लिए आमदनी की कोई सीमा नहीं है।

पर्यावरण विज्ञान पाठ्यक्रम को करने के बाद विद्यार्थी पर्यावरण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्तर पर एक शिक्षक के रूप में, संयुक्त राष्ट्र से संबंधित विभिन्न एजंसियों में, सरकारी संगठनों जैसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिक के रूप में, पर्यावरण सलाहकार के रूप में, उद्योग व प्रयोगशालाओं में, शहरी नियोजन क्षेत्र, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन में रोजगार पा सकता है। रोजगार के क्षेत्र में पर्यावरण विज्ञान के विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल है।
– डॉ. सोमवीर बजाड़, पर्यावरण विज्ञान विभाग, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय

प्रमुख संस्थान
पारिस्थितिक विज्ञान केंद्र, आइआइसी, बंगलुरु
पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र, आइआइटी मुंबई
पर्यावरण अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय
भारतीय पारिस्थितिक एवं पर्यावरण संस्थान, दिल्ली
पर्यावरण अध्ययन संस्थान, जेएनयू, दिल्ली
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़

वेतनमान
शुरुआती तौर पर पर्यावरण विज्ञानियों को 12,000 से 18,000 रुपए प्रति माह वेतन मिलता है। स्नातक डिग्री करने वाले युवाओं को 35,000 से 50,000 रुपए प्रति माह तक वेतन मिल सकता है जबकि पीएचडी डिग्री धारकों 50,000 से 75,000 रुपए प्रति माह तनख्वाह मिल सकती है।

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