केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम इंटर्नशिप स्कीम (PMIS) में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार इस योजना में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्मों को शामिल करने पर विचार कर रही है। अभी तक इस योजना में केवल वे 500 बड़ी कंपनियां भाग ले सकती हैं, जिनका कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) खर्च सबसे अधिक है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो देशभर की एक लाख से अधिक पंजीकृत CA फर्मों के लिए इंटर्नशिप के अवसर खुल जाएंगे, जिससे खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को बड़ा फायदा मिलेगा।
वर्तमान नियम क्या हैं?
फिलहाल PMIS के तहत, केवल टॉप 500 CSR खर्च करने वाली कंपनियां ही इंटर्न रख सकती हैं, जिसमें इंटर्न को 12 महीने तक हर महीने 5,000 रुपये मिलते हैं और इसमें से 4,500 रुपये सरकार की तरफ से दिए जाते हैं और 500 रुपये कंपनी अपने CSR फंड से देती है।
CA फर्मों को क्यों नहीं मिल पा रही थी अनुमति?
CA फर्मों के पास CSR फंड नहीं होता, इसलिए वे वर्तमान नियमों के तहत योजना में भाग नहीं ले सकतीं।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार डी के अनुसार, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ इस विषय पर चर्चा चल रही है। योजना में CSR की अनिवार्यता में बदलाव किया जा सकता है, ताकि प्रोफेशनल फर्मों को भी भागीदारी का अवसर मिल सके।
छोटे शहरों में बढ़ेंगे अवसर
अगर संशोधन लागू होता है तो, 1 लाख से अधिक CA फर्मों को इंटर्न रखने का मौका मिलेगा, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में युवाओं को स्थानीय स्तर पर ट्रेनिंग मिलेगी।
MSME सेक्टर को बेहतर कंप्लायंस और एडवाइजरी हेल्प मिलने के साथ ही सीए फर्में फर्में पहले से ही छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए टैक्स, ऑडिट और वित्तीय सलाह की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में यह बदलाव स्कीम की पहुंच को और गहरा कर सकता है।
बजट में भी हुआ था ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट में प्रोफेशनल संस्थाओं जैसे आईसीएआई को एमएसएमई अनुपालन सहायता मजबूत करने के लिए शॉर्ट-टर्म प्रोग्राम विकसित करने में समर्थन देने की घोषणा की थी।
ICAI ने सुझाव दिया
आईसीएआई ने सुझाव दिया है कि,व्यावसायिक प्रशिक्षण का खर्च CSR में शामिल किया जाए और रोजगार के बाद होने वाला खर्च सामान्य व्यावसायिक व्यय माना जाए।
क्या होगा आगे?
अब अंतिम फैसला कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की अधिसूचना पर निर्भर करेगा। यदि नियमों में संशोधन होता है, तो पीएम इंटर्नशिप स्कीम का दायरा कॉरपोरेट सेक्टर से आगे बढ़कर प्रोफेशनल सर्विस फर्मों तक पहुंच जाएगा। यह कदम युवाओं के लिए छोटे शहरों में रोजगार के अवसर विस्तार और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
