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BSEB 12th Result: बिहार के इस गांव में एक भी बच्चा नहीं हुआ पास

बिहार के भागलपुर डिवीजन के बांका के अमरपुर का राजपुर एक गाँव है जहां के 55 स्टूडेंटों ने इंटर का इम्तहान दिया था और सभी विद्यार्थी फेल हो गए।

बिहार में सबसे ज्यादा फेल होने वाले विद्यार्थियों में रोहतास, गया, मधुबनी ज़िला अव्वल आया है।

बिहार के भागलपुर डिवीजन के बांका के अमरपुर का राजपुर एक गाँव है जहां के 55 स्टूडेंटों ने इंटर का इम्तहान दिया था और सभी विद्यार्थी फेल हो गए। ये सभी परीक्षार्थी एचकेवी कालेज अमरपुर के है। इससे एक बात तो साफ़ दिखती है कि बिहार की परीक्षाओं में चोरी पर अंकुश लगने का यह नतीजा है। जबकि नकल पर लगाम पूरी तौर पर नहीं लगी है। इस दफा इंटर रिजल्ट बिहार में काफी खराब रहा। इसके बाद छात्र-छात्राओं का गुस्सा सड़कों पर खुलकर सामने दिख रहा है। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन और बिहार बोर्ड अध्यक्ष आंनद किशोर कहते है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सख्ती जरुरी है। पहली दफा कोडिंग का इस्तेमाल किया गया। जिसका असर परीक्षा परिणाम में देखा गया।

इस रिजल्ट के बाद अमरपुर बांका मुख्य पथ को गुस्साए छात्रों ने बस स्टैंड के पास जाम कर खूब हंगामा किया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस प्रशासन को जाम हटाने में जुट गई जिसमे उसे काफी मशक्कत करना पड़ा। पुलिस ने उत्तेजित छात्रों को कॉपी जांच करवाने का भरोसा दिलाकर इस जाम को हटवाया। रामचंद्रपुर इटहरी से 34 छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया था जिसमे मात्र तीन छात्र ही उतीर्ण हो पाए बाकी फेल हो गए। यह हाल बिहार की सरकारी स्कूलों का है। बता दें कि इंटर के तीनों संकाय को मिलाकर 12 लाख 40 हजार 168 छात्र छात्राएं परीक्षा में बैठे थे। जिसमें से केवल 4 लाख 37 हजार 115 ही सफल हो पाए। मसलन सफलता 35.24 फीसदी स्टूडेंटों के ही हाथ लगी।

बिहार में बीते साल टॉपर घोटाला के उजागर होने के बाद सख्ती के साथ पहली दफा इम्तहान लेने और इसके नतीजे सामने आया है। बिहार में सबसे ज्यादा फेल होने वाले विद्यार्थियों में रोहतास, गया, मधुबनी ज़िला अव्वल आया है। रोहतास में 32 हजार 201 में 26 हजार 420, गया में 26 हजार 926 में 16 हजार 492 और मधुबनी में 15 हजार के करीब छात्र- छात्राएं असफल हुए। जबकि निजी स्कूलों के आए सीबीएसई और आईसीएससी के नतीजे में बिहार के स्टूडेंट दूसरे राज्यों की तुलना में किसी मायने में पीछे नहीं रहे। बल्कि यूं कहें कि फेल का आंकड़ा शून्य फीसदी बताया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों के साथ साथ शिक्षकों के पढ़ाने के तौर तरीकों और उनकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान उठ रहा है। बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक कुमार फेल स्टूडेंटों के भविष्य की फ़िक्र कर एक से डेढ़ महीने में कंपार्टमेंटल परीक्षा लेने की बात बोलते है। मगर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता कैसे सुधारी जाए इस पर इनका कोई बयान नहीं है।

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