BPSC TRE 4.0: बिहार में शिक्षक भर्ती के चौथे चरण यानी BPSC TRE 4.0 को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। बिहार लोक सेवा आयोग ने 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का ऐलान कर दिया है और आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। इसके बावजूद पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। अभ्यर्थियों की नाराजगी सिर्फ TRE-4 की देरी को लेकर नहीं है, बल्कि पिछली शिक्षक भर्तियों में देरी, परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और नियुक्ति प्रक्रिया के लंबे खिंचने को लेकर भी है।

क्यों नाराज हैं अभ्यर्थी?

BPSC ने TRE-4 के तहत 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से असमंजस बना हुआ था। कई बार तारीखों और प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उनकी तैयारी प्रभावित हुई।

अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायत यह है कि सरकार और आयोग नई भर्ती की घोषणा तो कर रहे हैं, लेकिन पिछली भर्तियों से जुड़े मामलों को समय पर पूरा नहीं किया जा रहा। ऐसे में उनका सवाल है कि जब पुरानी भर्ती की प्रक्रिया ही पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, तो नई भर्ती पर भरोसा कैसे किया जाए?

TRE-1 से TRE-4 तक क्यों बढ़ता गया असंतोष?

BPSC की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के पिछले चरणों में भी अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। इनमें परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम में देरी, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति आदेश मिलने में लगने वाला लंबा समय प्रमुख हैं।

यही वजह है कि TRE-4 के ऐलान के बावजूद अभ्यर्थियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। उनके लिए यह सिर्फ नई 32 हजार नौकरियों का सवाल नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल बन गया है।

पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी भी मुद्दा

पिछले वर्षों में बिहार की प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर भी चर्चा में रही हैं। शिक्षक अभ्यर्थी चाहते हैं कि TRE-4 की प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें प्रश्नपत्र से लेकर परीक्षा, मूल्यांकन, रिजल्ट और नियुक्ति तक पूरी पारदर्शिता बरती जाए। अभ्यर्थियों के आंदोलन के पीछे यही डर भी है कि कहीं नई भर्ती भी पुरानी प्रक्रियाओं की तरह लंबी न खिंच जाए।

विपक्ष क्यों दे रहा आंदोलन को समर्थन?

TRE-4 आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है, जिसमें विपक्षी दलों ने अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के वादे करती है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं कर पाती। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी TRE-4 में देरी को लेकर सरकार पर हमला कर चुके हैं और इसे बिहार के युवाओं के साथ धोखा बताया है।

यानी आंदोलन अब केवल शिक्षक भर्ती बनाम बीपीएससी का मामला नहीं रह गया है। इसके साथ बिहार में रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य का राजनीतिक सवाल भी जुड़ गया है।

पहले भी सड़क पर उतरें हैं अभ्यर्थी

TRE-4 के नोटिफिकेशन और परीक्षा में देरी को लेकर अभ्यर्थियों ने पहले भी पटना में प्रदर्शन किया है। मई 2026 में आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई की भी खबर सामने आई थी। अभ्यर्थियों ने बाद में आमरण अनशन और विधानसभा घेराव जैसे विरोध कार्यक्रमों की भी घोषणा की थी।

अब सरकार और बीपीएससी के सामने क्या चुनौती?

TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सरकार ने फिलहाल एक बड़ी मांग पूरी कर दी है। लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म करने के लिए केवल विज्ञापन जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। अब BPSC और बिहार सरकार के सामने असली चुनौती सिर्फ परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि यह साबित करना है कि TRE-4 की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और विवादों से मुक्त होगी।